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नहीं घटा दुनिया की सबसे मोटी महिला का वजन, बहन बोली- डॉक्टर बना रहा बेवकूफ

दुनिया की सबसे मोटी महिला के ठीक होने और वजन घटाने को लेकर एक नया विवाद सामने आ गया है. इमान की बहन साइमा सलीम का दावा है कि इमान की हालत में कोई सुधार नहीं है और डॉक्टर उन्हें बेवकूफ बना रहा है. जबकि डॉक्टर्स का कुछ और ही कहना है...

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World heaviest woman sister denies recovery doctor is fooling
World heaviest woman sister denies recovery doctor is fooling

वजन घटाने और इलाज कराने के उद्देश्य से इस साल फरवरी में मिस्र से भारत आई विश्‍व की सबसे मोटी महिला इमान अहमद की बहन ने दावा किया है कि इमान की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है और डॉक्टर उन्हें बेवकूफ बना रहे हैं.

इमान अहमद का इलाज मुंबई के सैफी अस्पताल में डॉ. मफ़ाजल लकडावाला की देखरेख में हो रहा है.


कुछ दिनों पहले ही डॉक्टरों ने दावा किया था कि इमान का वजन 250 किलो तक कम कर लिया गया है, पर पैरों की मांसपेशियां कमजोर होने के कारण वो चल नहीं सकतीं. लेकिन इमान की बहन साइमा सलीम ने इन दावों को झूठ बताते हुए कहा है कि डॉ. लकड़ावाला झूठे हैं और वो इमान की रिकवरी के बारे में वास्तविक जानकारी नहीं दे रहे हैं.

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जबकि दूसरी ओर डॉक्टर्स का कहना है कि इमान की बहन साइमा सलीम बेवजह में सीन क्रीएट कर रही हैं क्योंकि पैसों की तंगी के कारण वो अपनी बहन को अपने साथ मिश्र नहीं ले जाना चाहतीं.

डॉक्टरों के अनुसार इमान बहुत तेजी से रिकवर कर रही हैं और जल्द ही उनका सीटी स्कैन होने वाला है ताकि उनके न्यूरोलॉजिकल कंडिशन को भी समझा जा सके और इससे यह भी पता चलेगा कि उनकी सेहत में कितना बदलावा आया है.

डॉक्टर ने एएनआई को बताया कि दरअसल, शुरुआती 15 दिनों तक साइमा सलीम सब कुछ ठीक था, पर जब इमान रिकवर करने लगीं और साइमा को सुझाव दिया गया कि अब वो अपनी बहन को मिश्र ले जा सकती हैं, तभी से साइमा ने ड्रामा करना शुरू कर दिया. क्योंकि वित्तीय कारणों की वजह से वो अपने बहन को वापस मिश्र नहीं ले जाना चाहतीं.

डॉ. लकड़वाला ने बताया कि सर्जरी होने के बाद इमान ने 250 किलोग्राम वजन घटाया है और 6 महीने के भीतर इमान 200 किलोग्राम वजन और घटाएंगी.

वजन घटने के बाद इमान के किडनी, फेफड़े और दिल बेहतर काम कर रहे हैं.

डॉक्टर ने कहा कि इमान का इलाज हम चैलेंज के तौर पर नहीं, बल्कि मानवता के तौर पर कर रहे हैं. बेड पर लेटे-लेटे मौत का इंतजार करते हम उन्हें नहीं देख सकते. उनके मरने की 99 फीसदी गुंजाइश थी. कम से कम हमने उन्हें जीने का एक मौका दिया है. अगर उन्हें फिजियोथेरेपी दिया जाए तो इमान दोबारा चल भी सकती हैं. लेकिन इसके लिए इमान को भी कोशिश करनी होगी.

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