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दृष्टिहीन छात्राओं के लिए 'डिजिटल विजन साइनेज' लगाएगा मिरांडा हाउस

छात्रा ने बताया कि जब उसने कॉलेज में एडमिशन लिया था तो उनकी टीचर्स ने उनके फोन में यह ऐप डाउनलोड किया था और इसे इस्तेमाल करना भी सिखाया.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिव्यांग छात्रों के लिए कैंपस को और बेहतर बनाने की ओर कदम बढ़ाते हुए मिरांडा हाउस डीयू का पहला ऐसा कॉलेज बन गया है जहां पर 'डिजिटल विजन साइनेज' लगाए जाएंगे. ये साइनेज खासकर दृष्टिहीन छात्राओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं.

स्मार्टफोन देता है वॉइस कमांड

इन साइनेज के कारण 70 दृष्टिहीन छात्राओं को पूरे कैंपस में कहीं भी जाने में सहूलियत मिलेगी. 'मैप्ड बाइ डिजिटल विजन प्रोग्राम' के तहत मिरांडा हाउस ने जगह-जगह 10 क्यूआर कोड ऐक्रिलिक शीट लगाई हैं. जब को एक कस्टमाइज्ड ऐप के जरिये तीन फीट की दूरी तक लाया जाएगा तो एक वॉइस मैसेज आएगा जो दृष्टिहीन छात्रा को लोकेशन और अन्य सूचनाएं देगा.

मिरांडा हाउस की प्रिंसिपल प्रतिभा जॉली ने बताया', ‘जब भी कोई दृष्टिहीन छात्रा मुझसे मिलने आएगी तो ऑफिस कॉरिडोर में लगा डिजिटल साइनेज उसे कांच के दरवाजे के बारे में चेतावनी देगा और उसे के जरिए रास्ता बताने में मदद करेगा कि कितने कदम चलकर वह मेरे पास आ सकती है.'

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दिव्यांगों को सशक्त बनाने के लिए है ये प्रोग्राम

जॉली ने कहा कि ये डिजिटल मैपिंग प्रोग्राम कॉलेज में दिव्यांगों को सशक्त बनाने वाली सोसायटी 'लक्षिता' के जरिये लागू किया जा रहा है. उन्होंने ये भी कहा, 'हम एक प्रोग्राम चला रहे हैं जिसका नाम 'समदृष्टि' है. इसके तहत दृष्टिहीन छात्रों के लिए कैंपस, मेट्रो स्टेशनों और बस स्टैंडों पर क्यूआर कोड तकनीक से मदद मुहैया कराई जाएगी.'

मिरांडा हाउस में हिन्दी ऑनर्स की छात्रा शांति चौरसिया ने कहा, ‘दृष्टिहीन होने के नाते कैंपस में एक जगह से दूसरी जगह पर जाना मेरे लिए परेशानी भरा काम था. लेकिन मेरे फोन में ऐप इन्स्टॉल करने के बाद यह काफी आसान हो गया है. जब भी मैं किसी गलत रास्ते की तरफ जाने लगती हूं तो यह वॉइस मैसेज के जरिए मेरी मदद करता है,' छात्रा ने बताया कि जब उसने कॉलेज में एडमिशन लिया था तो उनकी टीचर्स ने उनके फोन में यह ऐप डाउनलोड किया था और इसे इस्तेमाल करना भी सिखाया.

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