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जानिये, उस संगीतकार को जिसने गाया 'बाबुल की दुवाएं लेती जा'

हिंदी, तेलुगू और मलयालय सिनेमा के विख्यात संगीतकार रवि शंकर शर्मा का निधन 2012 में 7 मार्च को हुआ था. उन्होंने इलेक्ट्रीशियन के रूप में काम करते पोस्टल एंड टेलिग्राफ में 1945 से लेकर 1950 तक नौकरी की और उसी समय आकाशवाणी दिल्ली में गायन भी करने लगे।  

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Ravi shankar sharma
Ravi shankar sharma

प्रसिद्ध फिल्म संगीतकार 'रवि शंकर शर्मा'  रवि के नाम से मशहूर थे. 86 की उम्र से बीमार चल रहे थे, जिस वजह से 7 मार्च 2012 को उनका देहांत हो गया. रवि शंकर ने हिन्दी फिल्मों में कई सदाबाहर गाने दिए, जिसमें 'चौहदवीं का चांद हो', 'आज मेरे यार की शादी है', 'नीले गगन के तले', 'बाबुल की दुआएं लेती जा', 'ओ मेरी जोहरा जबीं' जैसे अनेक गाने शामिल है जो आज भी 21वीं सदी में गुनगुनाए जाते है.

जानते हैं उनसे जुड़ी खास बातें

1. संगीत की कोई विधिवत शिक्षा नहीं ली.

2. परिवार चलाने के लिए 50 के दशक में बातौर इलेक्ट्रीशियन काम किया.

3. दिल्ली से गायक बनने के लिए बंबई की ओर निकल गये थे.

4. 1950 में वह मुंबई आ गए. संगीतकार हेमंत कुमार ने सबसे पहले उन्हें 1952 में आनंद मठ में ‘वंदे मातरम’ गीत के लिए संगीत देने का मौका दिया.

5. उन्होंने इलेक्ट्रीशियन के रूप में काम करते हुए रवि ने हारमोनियम बजाना और गाना सीखा.

6. उनकी अंतिम उल्लेखनीय फिल्म निकाह मानी जाती है जिसके गीत ‘दिल के अरमां आंसुओं में बह गए’को संगीत प्रेमी काफी पसंद करते हैं. रवि ने 14 मलयाली फिल्मों में संगीत दिया.

7. उन्होंने शादी के शानदार गाने गाएं है, जो आज के दौर में भी गाए जाते है.

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आज मेरे यार की शादी है...

बाबुल की दुआएं लेती जा...

डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली..

मेरा यार बना दुल्हा...

8. उनकी चर्चित फिल्में

चौंदहवी का चांद, घराना, खानदान, वक्त, भरोसा, वक़्त, भरोसा, दो बदन, काजल, हमराज, बहु- बेटी, नीलकमल, और निकाह शामिल है.

9. बता दें रवि के संगीत में ही आशा भोसले और महेंद्र कपूर ने कई यादगार नघमे गाए, जिन्होंने अपार लोकप्रियता हासिल की.

10. उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ संगीतकार' पुरस्कार से नवाजा गया हैं. 

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