scorecardresearch
 
Advertisement
एजुकेशन

शेख अब्दुल्ला कैसे बने शेर-ए-कश्मीर, नेहरू ने इसलिए भेजा था जेल

शेख अब्दुल्ला कैसे बने शेर-ए-कश्मीर, नेहरू ने इसलिए भेजा था जेल
  • 1/8
क्या आपको पता है कि जम्मू-कश्मीर के दूसरे प्रधानमंत्री और तीसरे मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला कश्मीरियों के लिए शेर-ए-कश्मीर रहे हैं. उनके बेटे पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला ने भी कश्मीर की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आइए जानते हैं, कौन थे शेख अब्दुल्ला और उन्हें किसलिए शेर-ए-कश्मीर कहा जाता था. फिर ऐसा क्या हुआ कि उनके दोस्त और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को उन्हें जेल भेजना पड़ा.

(फाइल फोटो: कश्मीर में नेहरू को रिसीव करते शेख अब्दुल्ला)
शेख अब्दुल्ला कैसे बने शेर-ए-कश्मीर, नेहरू ने इसलिए भेजा था जेल
  • 2/8
शेख अब्दुल्ला का जन्म 5 दिसंबर, 1905 में श्रीनगर के बाहरी इलाके में स्थित सौरा गांव में हुआ. उनके जन्म से 11 दिन पहले ही उनके पिता की मौत हो चुकी थी. उनके पिता कश्मीरी शॉल के व्यापारी थे. उन्होंने मैट्रिक की पढ़ाई पंजाब यूनिवर्सिटी से की, इसके बाद अलीगढ़ मुस्‍लिम यूनिवर्सिटी से 1930 में फीजिक्स विषय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया. कहा जाता है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही उनका संपर्क प्रगतिशील नेताओं से हो गया था इससे उनके भीतर राजशाही को लेकर चिढ़ आ गई थी. उन्होंने इस दौरान सिल्क फैक्ट्री वर्कर्स के कई आंदोलन देखे.
शेख अब्दुल्ला कैसे बने शेर-ए-कश्मीर, नेहरू ने इसलिए भेजा था जेल
  • 3/8
अपने अधिकारों के लिए आंदोलनरत श्रमिकों के जज्बे ने उन पर गहरी छाप छोड़ी. यहीं से उन्हें जम्मू और कश्मीर राज्य के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष की सूझी थी. पढ़ाई पूरी करके वो वापस कश्मीर लौटे और पढ़े-लिखे मुसलमान नौजवानों का संगठन बनाया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शेख अब्दुल्ला ने कश्मीर में रीडिंग रूम से कश्मीरी पॉलिटिक्स की नई नींव रखी. कश्मीर में राजा के शासन में किसी भी तरह पॉलिटिकल चर्चा मना थी, लेकिन उन्होंने इस रीडिंग रूम से ये चर्चाएं शुरू कीं.
Advertisement
शेख अब्दुल्ला कैसे बने शेर-ए-कश्मीर, नेहरू ने इसलिए भेजा था जेल
  • 4/8
पढ़े-लिखे मुसलमान शेख अब्दुल्ला से धीरे-धीरे जुड़ने लगे और राजा के विरुद्ध एक माहौल बनने लगा और कुछ विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए. फिर गरीब मुसलमान संगठित होने लगे, ये संगठित लोग निरंकुश सत्ता के सामने अपनी आवाज रखने को तैयार हो चुके थे. इसी दौरान शेख अब्दुल्ला ने 1932 में मुस्लिम कांफ्रेंस संगठन की नींव रखी. संगठन के पहले सम्मेलन में बड़ी संख्या में भीड़ जुटी थी.
शेख अब्दुल्ला कैसे बने शेर-ए-कश्मीर, नेहरू ने इसलिए भेजा था जेल
  • 5/8
1938 में संगठन का छठवां सम्मलेन हुआ जिसमें गैर-मुस्लिमों को भी बुलाया गया था. ये ही संगठन कांग्रेसी नेता प्रेम नाथ बजाज की सलाह पर मुस्लिम कांफ्रेंस से नेशनल कांफ्रेंस बन गया. जिसमें बजाज भी शामिल हुए. कुछ ही सालों में शेख अब्दुल्ला लोगों के फेवरेट नेता बन चुके थे. हजारों लोग दूर दूर से उन्हें सुनने आने लगे.

(फाइल फोटो:बायें से नेहरू, बादशाह खान और शेख अब्दुल्लाह)
शेख अब्दुल्ला कैसे बने शेर-ए-कश्मीर, नेहरू ने इसलिए भेजा था जेल
  • 6/8
साल 1944 में नेशनल कांफ्रेंस ने नया कश्मीर घोषणापत्र निकाला जिसमें धर्म निरपेक्षता, स्वतंत्रता और समानता की बात की गई. इसमें महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता से लेकर गरीबों के लिए फिर से उनकी जमीनें देने जैसे वादे थे. उन्हेांने इस घोषणापत्र का इस्तेमाल करके कश्मीर छोड़ा आंदोलन चलाया था जो वहां के राजा के खिलाफ था. इससे चिढ़कर राजा ने उन्हें जेल में डाल दिया.

(फाइल फोटो: जम्मू व कश्मीर विधान सभा)
शेख अब्दुल्ला कैसे बने शेर-ए-कश्मीर, नेहरू ने इसलिए भेजा था जेल
  • 7/8
फिर आजादी के वक्त जब महाराजा हरिसिंह ने कश्मीर भारत पाकिस्तान को न देने का फैसला लिया था. लेकिन पाकिस्तान ने जब कश्मीर पर आक्रमण किया तो महाराजा ने भारत से संधि की. इस संधि की एक शर्त में शेख अब्दुल्ला की रिहाई भी थी. रिहा होकर शेख अब्दुल्लाह ने कश्मीर की आजादी के लिए अपने वालंटियर तैयार करके जंग लड़ी. इसी के बाद 1948 में वो राज्य के प्रधानमंत्री बने.

(फाइल फोटो: शेख अब्दुल्ला के बेटे व जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्लाह)
शेख अब्दुल्ला कैसे बने शेर-ए-कश्मीर, नेहरू ने इसलिए भेजा था जेल
  • 8/8
प्रधानमंत्री के पद पर पहुंचकर अब्दुल्ला अपना वादा नहीं भूले और कश्मीर में महिलाओं की एजुकेशन पर काम शुरू किया. उन्होंने गरीबों की जमीनें भी लौटा दीं. उनसे जमींदार नाराज हो गए और कांग्रेसी नेताओं को मिलाकर नेहरू तक ये बात पहुंचाई गई अब्दुल्ल कश्मीर को भारत से अलग करना चाहते हैं. 1953 में नेहरू ने उन्हें गैरकानूनी ढंग से जेल भेज दिया जहां वो 11 साल रहे. लेकिन जेल में रहकर भी वो शेर ए कश्मीर के तौर जनता के दिल में कायम रहे. जेल से बाहर आकर भी वो कश्मीर मुद्दे पर लड़ते रहे और समाधान खोजते रहे. उन्होंने चुनाव भी लड़ा, जिसे जीतकर वो फिर से कश्मीर के प्रमुख बने. 1982 में उनकी मौत के बाद फारुख अब्दुल्ला ने राजनीति में सक्रियता से प्रवेश किया.
 

Advertisement
Advertisement