सुनीसुनाई बातों पर है ये चचनामाकुछ इतिहासकार और लेखक चचनामा पर संदेह जाहिर करते हैं. डॉ मुरलीधर जेटली के मुताबिक़ चचनामा सन 1216 में अरब सैलानी अली कोफी ने लिखी थी जिसमें हमले के बाद लोगों से सुनी-सुनाई बातों को शामिल किया गया. इसी तरह पीटर हार्डे, डॉक्टर मुबारक अली और गंगा राम सम्राट ने भी इसमें मौजूद जानकारी की वास्तविकता पर संदेह जताया.
पाकिस्तान में इतिहासकारों और एकेडमिक्स का एक धड़ा अब देश के सच्चे इतिहास के प्रचार-प्रसार की बात कर रहा है. पाकिस्तान की वो शख्सीयतें जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए आक्रांताओं से संघर्ष किया और कुर्बानी दी, उनको उचित सम्मान देने की मांग जोर पकड़ रही है. न्यायप्रिय राजा दाहिर के लिए भी सिंध और पाकिस्तान में एक वर्ग अपने हीरो को वो दर्जा दिलाना चाहता है, असलियत में जिसके वे हकदार थे.
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