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जान बची, अब करियर कैसे बचाएं? नहीं मिल रहा यूक्रेन से लौटे MBBS छात्रों को जवाब

हजारों ऐसे एमबीबीएस छात्र हैं जो रूस यूक्रेन युद्ध के कारण भारत लौट आए हैं. अब छात्र व अभ‍िभावक भारत सरकार से मांग कर रहे हैं कि यहां के मेडिकल कॉलेजों में बच्चों को पढ़ने का मौका दिया जाए. aajtak.in ने ऐसे ही छात्रों और उनके अभ‍िभावकों से बातचीत करके उनकी मांग जानी. 

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खारकीव यूनिवर्सिटी से लौटे भाई-बहन की तस्वीर (Photo: Special Permission) खारकीव यूनिवर्सिटी से लौटे भाई-बहन की तस्वीर (Photo: Special Permission)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 26 जून को सांकेत‍िक भूख हड़ताल करेंगे यूक्रेन से लौटे छात्र-अभ‍िभावक
  • सरकार से भारत के मेडिकल कॉलेज में दाखि‍ले की है मांग
राहुल और काजल डॉक्टर बनने के सपने लेकर खारकीव यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए थे. लेकिन रूस यूक्रेन का युद्ध छिड़ने के बाद किसी तरह जान बचाकर घर लौटे. कुछ दिनों तक मन में यही रहा कि शायद शांत‍ि बहाल होगी और वे वापस लौट जाएंगे, लेकिन युद्ध है कि रुकने का नाम नहीं ले रहा और अब करियर दांव पर लगा है.... 

ये पीड़ा सिर्फ राहुल और काजल की नहीं बल्क‍ि हजारों ऐसे एमबीबीएस छात्रों की है जो रूस यूक्रेन युद्ध के कारण भारत लौट आए हैं. अब छात्र व उनके अभ‍िभावक भारत सरकार से मांग कर रहे हैं कि यहां के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने का मौका दिया जाए. aajtak.in ने ऐसे ही छात्रों और उनके अभ‍िभावकों से बातचीत करके उनकी मांग जानी. 

राहुल और काजल के बड़े भाई विवेक किशोर पांडेय बताते हैं कि यूक्रेन से आए स्टूडेंट्स मुसीबत में हैं. उनका भाई राहुल और काजल कुमारी एमबीबीएस सेकेंड और फर्स्ट इयर में पढ़ते थे. वो मार्च के शुरुआती हफ्ते में इंडिया आए थे. वहां यूनिवर्सिटी वाले  फीस ले चुके थे, जून से सेशन एंड हो रहा था. अब फीस मांगेगे लेकिन जब ऑफलाइन पढ़ाई ही नहीं कर पाएंगे तो फीस देने का क्या फायदा. हमने यूनिवर्सिटी से नेबर कंट्री में एडमिशन की मांग भी की है. सबका ओरिज‍िनल डॉक्यूमेंट यूनिवर्सिटी में जमा है. अब उसके लिए भी जाना पड़ेगा. अभी जाना भी उचित नहीं है. खारकीव के आसपास रूस ने कब्जा कर लिया है. यूनिवर्सिटी से रोमानिया आदि कंट्री में एडमिशन की बातचीत चल रही है.

सुप्रीम कोर्ट में है मामला

 विवेक बताते हैं कि इस मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल डाली गई है. अभ‍िभावक और बच्चे बराबर प्रोटेस्ट करते रहते हैं. हम सरकार से मांग कर रहे हैं कि अगर इंडिया में नॉर्म नहीं हैं तो बाहर कहीं रोमानिया, पोलैंड, कजाकिस्तान आदि जगह एडमिशन कराएं. यूनिवर्सिटी भी कह रही कि ट्रांसफर होगा तो जून जुलाई में होगा. फीस और रहने का लाखों का खर्च हो गया. हम लोगों को बहुत आर्थ‍िक क्षति भी हुई है. चार्टर्ड प्लेन का टिकट दो लोगों का एक लाख रुपये के करीब लगा था जो कि रिफंड नहीं हुआ. तीन साढे तीन महीने बीत गए, एअरलाइंस वाले कह रहे कि अभी  पेमेंट स‍िस्टम काम नहीं कर रहा. अब हमारा मेन फोकस भाई बहन को सेटल करना है. हम सरकार से चाह रहे हैं कि यहीं बच्चों को एडमिशन दे दे, नहीं तो नेबर कंट्री में श‍िफ्ट कर दे. 

यूक्रेन से लौटा छात्र राहुल
यूक्रेन से लौटे छात्र राहुल

दूसरी कंट्री हुईं महंगी, हम कहां जाएं

यूक्रेन से लौटे एमबीबीएस छात्र तलहा नालंदा बिहार के रहने वाले हैं. तलहा ने बताया कि मैं 2020 में गया था. हमारा चौथा सेमेस्टर शुरू हो गया था. वार तो दिसंबर में ही शुरू हो गया था लेकिन वहां के लिए जैसे ये नॉर्मल बात थी. स्थानीय स्टूडेंट्स हंसकर टाल देते थे. उस पर वहां स्टडी का पैटर्न अलग है, अबसेंट होने पर वॉक ऑफ हो जाता है, उसे क्लीयर कराना पड़ता है. यूनिवर्सिटी ने कहा कि जो यहां रहना चाहता है, वो ऑफलाइन पढ़ेगा बाकी सबको ऑनलाइन पढ़ाया जाएगा. कैसे तो जान बचाकर हम वापस लौटे हैं अब आगे स्टडी का कुछ समझ नहीं आ रहा. वहां अभी तक वॉर चल रहा. वहीं हंग्री और पोलैंड काफी महंगा हो गया. 70 लाख रुपये तक फीस चली जाएगी. अब हम लोग मांग कर रहे हैं कि इंडिया में कम फीस लेकर गवर्नमेंट नहीं तो प्राइवेट कॉलेज में ही एडमिशन दे दें.  

तलहा कहते हैं कि यूक्रेन से करीब 16 हजार स्टूडेंट लौटे हैं, हममें से ज्यादातर लोग नीट दे चुके हैं. उसमें कम रैंक थी. यही नहीं कोटा में दो तीन साल कोचिंग की. फिर यूक्रेन पढ़ने गए. मेरे पिता का छोटा मोटा बिजनेस है, मम्मी हाउसवाइफ. घर में हम तीन भाई एक बहन है. मेरा एक भाई रूस में पढ़ रहा है, दूसरे ने बीकॉम में एडमिशन लिया है. बहन जामिया से पढ़ाई करके जीबी पंत से इंटर्नश‍िप कर रही. पेरेंट्स पढ़ाई का अब डबल खर्च कैसे उठाएंगे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि कहां जाएं. 

दूसरे कोर्सेज में दाख‍िले को मजबूर हैं बच्चे 

पेरेंट्स एसोसिएशन यूक्रेन एमबीबीएस स्टूडेंट के प्रेसीडेंट आरबी गुप्ता ने बताया कि मेरा बेटा इवानो नेशनल मेड‍िकल यूनिवर्सिटी में सेकेंड इयर में पढ़ता है. अब वहां से लौटने के बाद उसका भविष्य अधर में लटका है. मार्च 2022 में एक पीआईएल सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई थी, उसकी 29 जून को दोबारा सुनवाई है. सुप्रीम कोर्ट ने इंडिया को दो महीने की डेडलाइन दी थी कि यूक्रेन से लौटे छात्रों की प्रैक्ट‍िकल स्टडी के लिए अरेंजमेंट किया जाए.  अभी तक कुछ हुआ नहीं, इसलिए कई छात्रों ने एमबीबीएस छोड़कर दूसरे कोर्सेज जैसे कि बीएएमएस या पैरामेडिकल कोर्सेज में दाख‍िला ले लिया है. 

26 जून को करेंगे भूख हड़ताल

अब पेरेंट्स प्रशासन से अनुमत‍ि मिलने के बाद 26 जून को सांकेतिक भूख हड़ताल जंतर-मंतर, दिल्ली में करेंगे. एसोसिएशन ने सभी माता-पिता / छात्रों को एक दिवसीय सांकेतिक भूख अनशन के लिए आमंत्रित किया है. सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक अनशन के लिए पूरे राज्य से एक छात्र बैठेगा. 300 अध‍िकतम के लिए ये अनुमति मिली है. PAUMS की ओर से 24 जून (शुक्रवार) को एनएमसी कार्यालय, द्वारका दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध के लिए सभी माता-पिता / छात्रों को आमंत्रित किया गया है. छात्रों को सुबह 9.30 बजे NMC कार्यालय में बुलाया गया है. 

पूर्व में हुए प्रोटेस्ट की तस्वीर
पूर्व में हुए प्रोटेस्ट की तस्वीर

इन राज्यों के स्टूडेंट्स वापस लौटे 

कुल 16000 के करीब MBBS स्टूडेंट्स यूक्रेन से भारत लौटे 
दिल्ली के 150, हरियाणा के 1400, हिमाचल के 482, ओड‍िशा के 570, केरला 3697, महाराष्ट्र के 1200, कर्नाटक के 760, उत्तर प्रदेश के 2400, उत्तराखंड के 280, बिहार के 1050, गुजरात के 1300, पंजाब के 549, झारखंड के 184 और वेस्ट बंगाल के 392 स्टूडेंट हैं.

 


 

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