एलुरु जिले के चिंतालापुडी में एक सरकारी इंटीग्रेटेड हॉस्टल में लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां 8वीं कक्षा की छात्रा स्वप्ना को कथित तौर पर सिर्फ कंबल मांगने पर देर रात हॉस्टल से बाहर कर दिया गया. बता दें कि वह चिंतालापुडी मंडल के प्रगडावरम गांव की रहने वाली हैं. वह स्थानीय जेडपी (ZP) गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ती है और स्कूल से जुड़े इंटीग्रेटेड हॉस्टल में रहती है.
सोने से पहले मांगा कंबल
उसके परिवार ने बताया कि यह घटना शनिवार रात को हुई जब सोने से पहले स्वप्ना ने ठंड से बचने के लिए कंबल मांगने के लिए हॉस्टल वार्डन से संपर्क किया. बुनियादी जरूरत पूरी करने के बजाय, वार्डन कथित तौर पर गुस्से में आ गई. बिस्तर का सामान देने के बजाय, वार्डन ने हॉस्टल के कर्मचारियों को लड़की के माता-पिता से तुरंत संपर्क करने का निर्देश दिया.
स्वप्ना के लिए नहीं है कोई सीट उपलब्ध
जब माता-पिता पहुंचे, तो उन्हें अचानक बताया गया कि हॉस्टल में स्वप्ना के लिए अब कोई सीट उपलब्ध नहीं है और उन्हें आधी रात को अपनी बेटी को घर वापस ले जाने के लिए मजबूर किया गया.

संज्ञान में आया मामला
एलुरु जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट वेट्री सेल्वी के ने चिंतालापुडी स्थित सरकारी गर्ल्स हॉस्टल (IWHC) के वेलफेयर ऑफिसर (हाउसकीपिंग) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया है. जिला कलेक्टर ने अपने आदेश में कहा कि ड्यूटी में भारी लापरवाही और आचार संहिता, 1964 के उल्लंघन के लिए APCS (CCA) नियम 1991 के नियम 8 के उप-नियम (1)(a) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा रहा है.
किसी और को सौंपी गई जिम्मेदारी
फिलहाल खाली पड़े चिंतालापुडी गर्ल्स हॉस्टल की हाउसकीपिंग की पूरी अतिरिक्त जिम्मेदारी चिंतालापुडी IWHC (A.O) की हॉस्टल वेलफेयर ऑफिसर श्रीमती के. सुनीता को सौंपी गई है. कलेक्टर ने चिंतालापुडी के असिस्टेंट सोशल वेलफेयर ऑफिसर को इन निलंबन आदेशों को तुरंत लागू करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.