मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में शिक्षक भर्ती 2022 एक बार फिर सवालों के घेरे में है. डीपीआई कार्यालय के बाहर बुधवार को चयनित शिक्षकों ने ज्वाइनिंग की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. रिजल्ट जारी हुए 8 महीने बीत चुके हैं, लेकिन नियुक्ति आदेश अब तक जारी नहीं हुए. लगातार हो रही देरी ने अब अभ्यर्थियों का धैर्य तोड़ दिया है.
चार साल पहले शुरू हुई इस भर्ती प्रक्रिया में प्री, मेन्स, रिजल्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन जैसे सभी चरण पूरे हो चुके हैं. 25 सितंबर को परिणाम भी घोषित हो गया, लेकिन इसके बाद से प्रक्रिया ठहर सी गई है. चयनित अभ्यर्थी बार-बार सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला. प्रदर्शन के दौरान हालात ऐसे थे कि भीषण गर्मी में एक शिक्षक बेहोश हो गया, तो एक दिव्यांग अभ्यर्थी बैसाखी के सहारे खड़ा होकर अपनी ज्वाइनिंग की मांग करता नजर आया. यहां प्रदर्शन में कई अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ गई. यह तस्वीरें सिस्टम की सुस्ती और संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं.
दिव्यांग होकर घर से सैंकड़ों किलोमीटर दूर नौकरीटीकमगढ़ से आए दिव्यांग अभ्यर्थी मनोहर लाल चढ़ार पिछले 8 महीनों से ज्वाइनिंग का इंतजार कर रहे हैं. मजबूरी में उन्हें गेस्ट टीचर के तौर पर काम करना पड़ रहा है, वो भी अपने जिले से सैकड़ों किलोमीटर दूर आगर-मालवा में. आर्थिक तंगी और अनिश्चितता ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है. उनका कहना है कि वो बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वो एक टीचर ही बनना चाहते हैं इसलिए उन्होंने दूसरी किसी नौकरी की बजाय अतिथि शिक्षक बनने का फैसला किया.
ज्वाइनिंग नहीं होने से टूटा रिश्ता
मऊगंज के धीरेंद्र चौरसिया के लिए यह देरी निजी जिंदगी पर भी भारी पड़ रही है. ज्वाइनिंग नहीं होने के कारण उनका दो बार रिश्ता टूट चुका है. परिवार वाले रिश्ता लेकर आए, लेकिन नौकरी पक्की न होने की वजह से वापस लौट गए. पिछले साल नवंबर में भी उन्हें इसी कारण ठुकरा दिया गया. धीरेंद्र इसका अकेला उदाहरण नहीं है, कई अभ्यर्थी इस समस्या का सामना कर रहे हैं.
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब चयनित शिक्षक प्रदर्शन कर रहे हैं. यह उनका छठवां आंदोलन है, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ भरोसा मिला, नतीजा नहीं. ना सूची आई और ना ही ज्वाइनिंग प्रक्रिया आगे बढ़ी. अब इस देरी का असर साफ दिखने लगा है और करीब 10,700 चयनित शिक्षक आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं.