JEE Topper Kartik Vaishnav: कहा जाता है कि लगन हो कुछ करने की, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं होता. अपने जुनून और लगन से कमाल कर दिखाया है किशनगढ़ के कार्तिक वैष्णव ने. कार्तिक ने माता-पिता और रिश्तेदारों के लगातार सपोर्ट और मोशन कोचिंग संस्थान के टीचर्स के मार्गदर्शन में JEE Advanced में 325 वी रैंक हासिल की है. उन्होंने खुद के साथ कोचिंग संस्थान और परिवार का नाम रोशन किया है.
लगातार 8 से 9 घंटे की पढ़ाई, परिवार के सपोर्ट और अध्यापकों के मार्गदर्शन से यह संभव हो पाया है. कार्तिक को हमेशा यह डर सताता था कि अगर मेरा सेलेक्शन नहीं होगा तो क्या होगा. मैं मिडिल क्लास फैमिली से हूं. पापा एक छोटी सी रेडीमेड की शॉप चलाते हैं. इतना पैसा परिवार वाले खर्च कर रहे हैं. बस इसी डर के साथ पढ़ता रहा और आज मेहनत रंग लाई.
कार्तिक ने बताया कि मिडिल क्लास फैमिली से होते हुए भी परिवार कहां से व्यवस्था करता था, यह मुझे कभी महसूस नहीं होने दिया. जब भी मुझे जिस चीज की भी जरूरत पड़ी, मुझे मिली. अपने पैरेंट्स के आशीर्वाद और उनके सपोर्ट से आज मैं यहां तक पहुंचा हूं.
कार्तिक ने कहा, 'मैंने पूरी तरह डेडीकेट होकर हर दिन 8 से 9 घंटे की स्टडी की. इसमें मैं कई बार कई चीजों को लेकर उदास भी हुआ, लेकिन मेरे परिवार और मेरे रिश्तेदार और टीचर्स ने कभी मुझे डिमोटिवेट नहीं होने दिया. मेरे पिताजी ने मुझे पूरी तरह सपोर्ट किया. यह सफर मुश्किल भरा था, लेकिन आज बहुत अच्छा लग रहा है.'
कार्तिक ने कहा कि कई बार मॉक टेस्ट वगैरह में नंबर कम आते थे तो मैं परिवार को बताता था कि मुझे टेंशन हो रही है. लेकिन फैमिली ने मुझे डिमोटिवेट नहीं होने दिया. उन्होंने कहा कि तुम अपनी तरफ से पूरी मेहनत कर रहे हो, रिजल्ट जो भी हो टेंशन नहीं लेनी.
छात्र के पिता गोविंद वैष्णव का कहना है कि मेरा और मेरे परिवार समेत सबका सपना इसे IIT करवाना था. बहुत सारे फाइनेंशियल इश्यूज थे जिनकी वजह से दिक्कतें भी आईं, लेकिन मुझे मेरे परिवार और रिश्तेदार व दोस्तों का पूरा सहयोग मिला. हमने अपने स्तर पर उन समस्याओं का समाधान किया लेकिन बच्चे को पढ़ाई के मामले में कभी डिमोटिवेट नहीं होने दिया. कोचिंग संस्थान की तरफ से भी बच्चे को पूरा गाइड किया गया है और इसका परिणाम आज सबके सामने है. बच्चे ने भी अपने तरफ से पूरी मेहनत की है. अब बस सपना यही है कि अच्छे IIT में दाखिला मिल जाए और मनपसंद सब्जेक्ट मिल जाए.
मोशन कोचिंग संस्थान के डायरेक्टर नितिन विजय ने बताया, 'मेरा मानना यह है कि जो बच्चे 100-150वी रैंक तक के होते हैं, उनमें हमारा योगदान 30% से 40% होता है. उसके बाद के जो बच्चे होते हैं, उन में हमारा योगदान 8% होता है. ऐसे बच्चों पर हम ही नहीं, सबको प्राउड है. मेरी तरफ से मैं इनके माता-पिता को भी धन्यवाद देना चाहूंगा. उन्होंने अपने बच्चे को इस लायक बनाया.'
उन्होंने आगे कहा, 'आज के युग में यह मायने नहीं रखता कि आप कहां से आते हैं. अगर आपकी काबिलियत और हुनर है तो आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं. मिडिल क्लास के बच्चे पढ़ लिखकर आज अच्छा मुकाम हासिल कर रहे हैं. ऐसा ही किया 325 वी रैंक लाकर कार्तिक वैष्णव ने जिसके पिता एक सामान्य रेडीमेड की दुकान चलाते हैं. लेकिन दोस्तों, रिश्तेदार और संस्थान के सहयोग से आज उनके बच्चे ने 325वी रैंक लाकर उन सबका नाम रोशन किया है.