जयपुर पुलिस ने पैरामेडिकल की पहली वर्ष की परीक्षाओं में नकल करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है. इसके अगले दिन एक परीक्षा केंद्र को लेकर नई जानकारी सामने आई है. इस दौरान कई छात्रों ने आरोप लगाया है कि परीक्षा के दौरान उन्हें काफी देरी हुई और अव्यवस्था रही. उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा में कई गड़बड़ियां और भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ा. वहीं, पुलिस के मुताबिक, कथित रैकेट का उद्देश्य 45 प्रथम वर्ष के पैरामेडिकल छात्रों को 5.5 लाख रुपये के बदले परीक्षा पास कराने में मदद करना था.
4 लोगों की हुई गिरफ्तारी
इस मामले में अब तक कॉलेज के अधिकारियों समेत चार लोगों की गिरफ्तारी हुई है. पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान बरामद डायरियों, व्हाट्सएप चैट और एडमिट कार्ड की पीडीएफ फाइलों से एक पहले से प्लान की हुई साजिश का संकेत मिलता है. वहीं, इस मामले में अन्य लोगों को लेकर जांच जारी है.
प्रश्नपत्र में देरी से उठे सवाल
इस मामले ने प्रभा देवी मेमोरियल परीक्षा केंद्र ने भी ध्यान आकर्षित किया है, जहां कई उम्मीदवारों ने दावा किया कि उन्हें समय पर अपने प्रश्न नहीं मिले. छात्रों के मुताबिक, जिन परीक्षार्थियों को नीचे बैठाया गया था, उन्हें प्रश्नपत्र समय पर मिल गया. लेकिन जो छात्र चौथी मंजिल पर बैठे थे, उन्हें प्रश्नपत्र मिलने में कई घंटे की देरी हुई और उन्हें इंतजार करना पड़ा. इस देरी के कारण परीक्षा केंद्र के अंदर अफरा-तफरी मच गई और कई छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा शुरू होने के बाद भी उन्हें इंतजार करना पड़ा.
छात्रों ने लगाया गड़बड़ी का आरोप
छात्रों ने आरोप लगाया है कि कई उम्मीदवारों को कक्षाओं की बजाय अस्थायी टेंट के नीचे परीक्षा देनी पड़ी. इससे परीक्षा का माहौल प्रभावित हुआ और व्यवस्था पर सवाल उठे. कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्र बांटने और परीक्षा करवाने में कई गड़बड़ियां हुईं.
छात्रों का कहना है कि सभी को समान सुविधाएं नहीं मिलीं, इसलिए परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं और इसकी जांच होनी चाहिए.
यह मामला नकल रैकेट की पुलिस जांच के साथ सामने आया है, हालांकि,पुलिस ने अभी तक इन व्यवस्थागत समस्याओं को नकल की साजिश से नहीं जोड़ा है और जांच जारी है.
इसके बाद छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता और सही व्यवस्था की मांग की है ताकि किसी भी छात्र को नुकसान न हो.