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CBSE में ये बदलावों का साल है! अब 9वीं में लैंग्वेज को लेकर आया नया रूल, 10वीं में प्रेशर कम, समझें पूरा गण‍ित

इससे पहले आई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की रिपोर्टों में कहा गया था कि तीन भाषाओं का यह फॉर्मूला कक्षा 6 से ही लागू किया जाएगा, जो 2030-31 तक कक्षा 10 तक पहुंचेगा. 15 मई के इस नए सर्कुलर ने उसी बुनियादी ढांचे को कानूनी रूप देते हुए कक्षा 9 और 10 के लिए समय-सीमा तय कर दी है और इसे 1 जुलाई 2026 से पूरी तरह अनिवार्य बना दिया है.

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CBSE 9वीं क्लास में अब 3 भाषाएं पढ़ना जरूरी पर 10वीं एग्जाम में नहीं होगा 'तीसरी लैंग्वेज' का प्रेशर (Photo: cbse.gov.in)
CBSE 9वीं क्लास में अब 3 भाषाएं पढ़ना जरूरी पर 10वीं एग्जाम में नहीं होगा 'तीसरी लैंग्वेज' का प्रेशर (Photo: cbse.gov.in)

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने अपनी भाषा नीति में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव किया है. 15 मई 2026 को जारी एक नए सर्कुलर के मुताबिक, इसी साल 1 जुलाई 2026 से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के कक्षा 9 के छात्रों के लिए अब तीन भाषाएं (Three Languages) पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है. बोर्ड ने साफ किया है कि यह नियम सीबीएसई से मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों पर लागू होगा. हालांकि, राहत की बात यह है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में इस तीसरी भाषा का कोई पेपर नहीं देना होगा.

इससे पहले आई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की रिपोर्टों में कहा गया था कि तीन भाषाओं का यह फॉर्मूला कक्षा 6 से ही लागू किया जाएगा, जो 2030-31 तक कक्षा 10 तक पहुंचेगा. 15 मई के इस नए सर्कुलर ने उसी बुनियादी ढांचे को कानूनी रूप देते हुए कक्षा 9 और 10 के लिए समय-सीमा तय कर दी है और इसे 1 जुलाई 2026 से पूरी तरह अनिवार्य बना दिया है.

चूंकि यह बदलाव इसी शैक्षणिक सत्र (2026-27) से लागू हो रहा है, जो कि पहले ही अप्रैल के महीने से शुरू हो चुका है, इसलिए सीबीएसई ने अपनी अध्ययन योजना (Scheme of Studies) को एनसीईआरटी (NCERT) के पाठ्यक्रम के साथ तालमेल में लाने के लिए एक 'ट्रांजिशनल अप्रोच' यानी बदलाव के दौर वाली 'प्रणाली' को अपनाने का फैसला किया है.

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अब दो भारतीय भाषाएं पढ़ना हुआ अनिवार्य
इस संशोधित व्यवस्था के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिन्हें R1, R2 और R3 नाम दिया गया है. सीबीएसई ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं मूल भारतीय (Native Indian Languages) होनी ही चाहिए.

छात्र चाहें तो विदेशी भाषा (Foreign Language) भी चुन सकते हैं, लेकिन वे ऐसा तभी कर पाएंगे जब उनकी बाकी दो भाषाएं भारतीय हों. इसके अलावा विदेशी भाषा को चौथे अतिरिक्त विषय (Additional 4th Subject) के रूप में भी लिया जा सकता है.

सीबीएसई ने अपने नोटिफिकेशन में लिखा है कि 1 जुलाई 2026 से कक्षा IX के लिए तीन भाषाओं (R1, R2, R3) का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिसमें कम से कम दो भाषाएं मूल भारतीय भाषाएं होनी चाहिए. जो छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहते हैं, वे इसे तीसरी भाषा के रूप में तभी ले सकते हैं जब अन्य दो भाषाएं भारतीय हों, या फिर वे इसे चौथे अतिरिक्त विषय के रूप में चुन सकते हैं. इसका पूरा विवरण www.cbseacademic.nic.in पर उपलब्ध है.

सीबीएसई द्वारा जारी इस आधिकारिक नोटिफिकेशन को आप समाचार एजेंसी ANI के इस ट्वीट में देख सकते हैं:

तीसरी भाषा के लिए बोर्ड परीक्षा का कोई दबाव नहीं
सीबीएसई ने छात्रों को एक बड़ी राहत देते हुए साफ कहा है कि कक्षा 10 के स्तर पर इस तीसरी भाषा (R3) की कोई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी.

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इस तीसरी भाषा का पूरा मूल्यांकन (Assessment) स्कूलों द्वारा आंतरिक यानी इंटरनल तौर पर ही किया जाएगा. इसके नंबर छात्र के फाइनल सर्टिफिकेट में दिखाई तो देंगे, लेकिन इस विषय की वजह से किसी भी छात्र को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने से रोका नहीं जाएगा.

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि छात्रों का ध्यान पढ़ाई पर बना रहे और उन पर कोई फालतू का दबाव न पड़े, इसके लिए कक्षा X के स्तर पर R3 के लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी. R3 का मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल-आधारित और आंतरिक होगा. छात्र के इस प्रदर्शन को सीबीएसई सर्टिफिकेट में बकायदा दर्शाया जाएगा. यह भी स्पष्ट किया जाता है कि R3 के कारण किसी भी छात्र को कक्षा X की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने से वंचित नहीं किया जाएगा.

कोई अचानक हुआ बदलाव नहीं, यह बदलाव का साल है
सीबीएसई ने सत्र 2026-27 के लिए बहुत ही समझदारी भरा रास्ता चुना है. चूंकि नया साल अप्रैल में ही शुरू हो चुका है, इसलिए स्कूलों को इस बदलाव को धीरे-धीरे अपनाने की छूट (फ्लेक्सिबिलिटी) दी जा रही है. बोर्ड ने इस बात पर जोर दिया है कि पाठ्यक्रम को बराबर लाने के इस दौर में किसी भी छात्र का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. बोर्ड का पूरा ध्यान सख्त नियम थोपने के बजाय बच्चों को सिखाने पर है.

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स्कूल कैसे करेंगे इस बदलाव का सामना?
इस नए नियम को लागू करने में जमीनी स्तर पर कुछ चुनौतियां भी हैं, खासकर भाषा के शिक्षकों की कमी को लेकर. लेकिन सीबीएसई ने उन स्कूलों के लिए कई लचीले विकल्प दिए हैं जो शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं.

स्कूल चाहें तो हाइब्रिड टीचिंग (ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों) का इस्तेमाल कर सकते हैं, 'सहोदय स्कूल क्लस्टर्स' के जरिए आपस में संसाधन साझा कर सकते हैं, रिटायर्ड शिक्षकों को रख सकते हैं या फिर दूसरे विषयों के उन शिक्षकों की मदद ले सकते हैं जो उस भाषा को अच्छी तरह जानते हों.

सीबीएसई के अनुसार जिन स्कूलों के पास योग्य मूल भारतीय भाषा शिक्षकों की कमी है, वे एक अंतरिम व्यवस्था (कामचलाऊ व्यवस्था) के तौर पर R3 भाषा के लिए अपने ही उन शिक्षकों को नियुक्त कर सकते हैं जो उस भारतीय भाषा को कामकाजी तौर पर बोलना और समझना जानते हों.

स्कूल सीबीएसई की स्वीकृत सूची में से कोई भी भाषा चुन सकते हैं, बशर्ते दो भारतीय भाषाओं वाला नियम न टूटे. स्कूलों को 30 जून 2026 तक ओएसआईएस (OASIS) पोर्टल पर अपनी भाषाओं की जानकारी को अपडेट करना होगा.

छात्र फिलहाल क्या और कैसे पढ़ेंगे?
जब तक इस नई नीति के हिसाब से नई किताबें नहीं आ जातीं, तब तक कक्षा 9 के छात्र तीसरी भाषा के लिए कक्षा 6 के स्तर की किताबों से पढ़ाई करेंगे.

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इस कमी को पूरा करने के लिए स्कूल अपनी स्थानीय या क्षेत्रीय साहित्य जैसे कविताएं, छोटी कहानियां और गद्य को पाठ्यक्रम में शामिल करेंगे. उम्मीद है कि सीबीएसई 15 जून तक इसके लिए पूरी गाइडलाइन जारी कर देगा.

नोटिफिकेशन के मुताबिक, "तुलनात्मक विश्लेषण से पता चलता है कि मिडिल स्टेज और सेकेंडरी स्टेज की R3 भाषा की बुनियादी योग्यताओं (मौखिक बातचीत, पढ़ना, लिखना और व्याकरण) में लगभग 75-80% की समानता होती है. इसलिए, जब तक समर्पित R3 किताबें उपलब्ध नहीं हो जातीं, कक्षा IX के छात्र चुनी गई भाषा की कक्षा VI की R3 टेक्स्टबुक (सत्र 2026-27 संस्करण) का उपयोग करेंगे.

बोर्ड ने आगे कहा कि 19 अनुसूचित भाषाओं की कक्षा VI की R3 किताबें 1 जुलाई से पहले स्कूलों को उपलब्ध करा दी जाएंगी. बाकी बची मूल भारतीय भाषाओं के लिए पुरानी व्यवस्था के अनुसार उपलब्ध SCERT और राज्य स्तर की किताबों का उपयोग किया जा सकता है.

छूट और विशेष मामले
सीबीएसई ने इस नीति में सभी बच्चों को शामिल करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण ढील भी दी है. दिव्यांग बच्चों (Children with Special Needs) को आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 (RPWD Act 2016) के तहत दूसरी या तीसरी भाषा पढ़ने से छूट मिल सकती है. इसके अलावा, विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों और भारत से बाहर स्थित सीबीएसई स्कूलों के लिए भी लचीले नियम तय किए गए हैं.

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यह बदलाव क्यों है बेहद खास?
देखा जाए तो यह हाल के सालों में पाठ्यक्रम का सबसे बड़ा बदलाव है, जो भारतीय भाषाओं पर आधारित बहुभाषी शिक्षा (Multilingual Education) को बढ़ावा देता है. अच्छी बात यह है कि सीबीएसई ने नीति के साथ-साथ व्यावहारिकता का भी पूरा ध्यान रखा है. तीसरी भाषा से बोर्ड परीक्षा का डर हटाकर और स्कूलों को संसाधन जुटाने की छूट देकर बोर्ड ने इस पूरे सफर को छात्रों और अभिभावकों के लिए बेहद आसान बनाने की कोशिश की है.

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