scorecardresearch
 

कर्नाटक में राज्य भाषा कानून पर विवाद, CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी का जोरदार विरोध

कर्नाटक स्कूल एसोसिएशन (केएएमएस) ने सीबीएसई की नई थ्री-लैग्वेज पॉलिसी का विरोध करते हुए तर्क दिया है कि यह राज्य के कन्नड़ भाषा कानून के विपरीत है. एसोसिएशन ने सीबीएसई से स्पष्टीकरण मांगा है और बोर्ड से आने वाले शैक्षणिक वर्ष के लिए इस परिपत्र को स्थगित रखने का आग्रह किया है. 

Advertisement
X
CBSE के थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी का विरोध  (Getty Images)
CBSE के थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी का विरोध (Getty Images)

कर्नाटक में प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों के मैनेजमेंट एसोसिएशन (KAMS) ने राज्य में CBSE की नई अनिवार्य तीन-भाषा नीति को लागू करने पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि यह कर्नाटक के मौजूदा भाषा कानून के खिलाफ है. CBSE चेयरमैन को सौंपे गए एक कानूनी पत्र में एसोसिएशन ने स्पष्टीकरण मांगा है और अनुरोध किया है कि आने वाले शैक्षणिक सेशन के लिए इस सर्कुलर को लागू न किया जाए. पत्र में तर्क दिया गया है कि कर्नाटक कन्नड़ भाषा शिक्षण अधिनियम, 2015 और कन्नड़ भाषा शिक्षण नियम, 2017 के तहत CBSE संस्थानों सहित सभी स्कूलों में कन्नड़ को पहली या दूसरी भाषा के रूप में पढ़ाना पहले से ही अनिवार्य है, जिससे CBSE के नए निर्देश को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है. 

पॉलिसी लागू करने से पहले मांगा जवाब 

KAMS के जनरल सेक्रेटरी शशि कुमार ने कहा कि राज्य की मौजूदा कानूनी भाषा नीति के कारण कर्नाटक में CBSE की सिफारिशों को लागू नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने CBSE के सामने कई चिंताएं रखी हैं और इसे लागू करने से पहले स्पष्टता की मांग की है. उनका कहना है कि आने वाले शैक्षणिक वर्ष के लिए कर्नाटक में इस सर्कुलर को लागू नहीं किया जाना चाहिए. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement