कई कर्मचारी खासकर करियर की शुरुआत में नई नौकरी मिलने या किसी अन्य वजह से नोटिस पीरियड पूरा किए बिना ही ऑफिस आना बंद कर देते हैं. उन्हें यह आसान विकल्प लग सकता है, लेकिन HR एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा करने से भविष्य में कई परेशानियां हो सकती हैं. फिर चाहे वह खराब वर्क प्लेस कल्चर हो या नए ऑफिस में ज्वाइन करने की तारीख वाला बेहतर ऑफर हो या व्यक्तिगत कारण, कर्मचारी कभी-कभी औपचारिक इस्तीफा दिए बिना ही संगठन छोड़ देते हैं.
अगर कोई कर्मचारी बिना इस्तीफा दिए या सूचना दिए लगातार 3 से 7 दिनों तक काम पर नहीं आता, तो HR की भाषा में इसे एब्सकॉन्डिंग कहा जाता है. इसके कारण फाइनल सेटलमेंट, एक्सपीरियंस पत्र, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और नई नौकरी में शामिल होने जैसी प्रक्रियाओं में दिक्कतें आ सकती हैं. इसलिए नौकरी छोड़ते समय कंपनी की तय प्रक्रिया का पालन करना बेहतर माना जाता है. आमतौर पर कंपनियां किसी कर्मचारी को तुरंत एब्सकॉन्डिंग घोषित नहीं करती. अधिकांश संगठन बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू करने से पहले एक प्रोसेस का पालन करते हैं.
क्या होता है HR का कदम?
HR सबसे पहले कर्मचारी से संपर्क करता है. आमतौर पर वह फोन, ईमेल या मैसेज के जरिए उनसे ऑफिस न आने की वजह पूछते हैं. इसके बाद अगर उन्हें कोई जवाब नहीं मिलता है, तो HR उसे एक औपचारिक नोटिस भेजता है. इसमें कर्मचारी से तय समय के भीतर काम पर लौटने या अनुपस्थित रहने का कारण बताने के लिए कहा जाता है. यह नोटिस आमतौर पर कर्मचारी के रजिस्टर्ड ईमेल और घर के पते पर भेजा जाता है. लेकिन अगर बार-बार संपर्क करने के बाद भी कर्मचारी की ओर से कोई जवाब नहीं मिलता, तो कंपनी अपनी HR नीति के अनुसार उसे नौकरी छोड़ने यानी कि एब्सकॉन्डिंग की प्रक्रिया में शामिल कर आगे की कार्रवाई करती है.
कंपनियां क्यों करती हैं औपचारिक प्रक्रिया का पालन?
मानव संसाधन (HR) एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनियों को कर्मचारी से जुड़ी पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो. डेलॉयट इंडिया की HR विशेषज्ञ सृष्टि नारजरी के अनुसार, किसी कर्मचारी को तुरंत एब्सकॉन्ड नहीं मान लेना चाहिए. पहले कंपनी को उससे संपर्क करने की पूरी कोशिश करनी चाहिए और उसे अपनी अनुपस्थिति का कारण बताने का मौका देना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि नौकरी छोड़ने की सही प्रक्रिया कर्मचारी और कंपनी, दोनों के हित में होती है. इससे कर्मचारियों को भविष्य में बेवजह की परेशानियों से बचने में मदद मिलती है और कंपनी भी अपनी नीतियों का सही तरीके से पालन कर पाती है.
नई नौकरी पर पड़ता है असर?
बिना बताए नौकरी छोड़ने का सबसे बड़ा असर भविष्य की नौकरी पर पड़ सकता है. कई कंपनियां नई भर्ती से पहले उम्मीदवार का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन करती हैं और पिछले संस्थान का रिलीविंग लेटर या नौकरी छोड़ने का प्रमाण मांगती हैं. अगर कर्मचारी ने नौकरी छोड़ने की प्रक्रिया पूरी नहीं की है, तो नई नौकरी जॉइन करने में दिक्कत आ सकती है. इसके अलावा, फुल एंड फाइनल सेटलमेंट, रिलीविंग लेटर और एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट मिलने में भी देरी हो सकती है.
क्या नौकरी से भाग जाना गैरकानूनी है?
आमतौर पर बिना सूचना दिए नौकरी छोड़ना कोई आपराधिक अपराध नहीं माना जाता है. लेकिन कर्मचारी अपने जॉब कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों और कंपनी की नीतियों, खासकर नोटिस पीरियड से बंधे होते हैं.
कुछ खास परिस्थितियों में, भारतीय न्याय संहिता 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत मामला गंभीर हो सकता है, लेकिन सामान्य तौर पर ऐसे मामलों में आपराधिक कार्रवाई बहुत कम देखने को मिलती है. जब तक कि इसमें धोखाधड़ी या चोरी जैसी बातें शामिल न हो.
कंपनी चाहें तो नोटिस पीरियड का पैसा वसूल सकती है या अनुबंध के अनुसार अन्य कार्रवाई कर सकती है.
HR एक्सपर्ट्स का मानना है कि नौकरी छोड़ने का सही तरीका हमेशा औपचारिक इस्तीफा देना है. इससे नोटिस पीरियड पर चर्चा, प्रक्रिया का पालन और सभी सेटलमेंट पूरा करने में आसानी होती है और आगे चलकर किसी तरह की को परेशानी नहीं होती है.