बच्चों को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए एक शिक्षक किस हद तक जा सकता है, इसकी प्रेरणादायक मिसाल कोटा में देखने को मिली है. आमतौर पर शिक्षक विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ने और अच्छे नंबर हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं लेकिन कोटा के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने अपने विद्यार्थियों से किया वादा न सिर्फ निभाया बल्कि एक होनहार छात्र के सपनों को उड़ान देने के लिए उसे अपने खर्चे पर दिल्ली की सैर कराई और हवाई जहाज का सफर भी कराया.
लेकिन इस कहानी से जो बात सबसे खास है वह ये है कि जिस छात्र को शिक्षक ने फ्लाइट में सफर कराया, उसके साथ शिक्षक ने भी अपनी जिंदगी में पहली बार हवाई सफर किया. कुन्हाड़ी स्थित बापू नगर सरकारी स्कूल में पदस्थ थर्ड ग्रेड शिक्षक रविकांत कटारिया कक्षा 10 तक विद्यार्थियों को सामाजिक अध्ययन (साइंस) पढ़ाते हैं. उन्होंने अपने क्लास के विद्यार्थियों के सामने एक अनूठी चुनौती रखी थी. शिक्षक ने वादा किया था कि जो भी विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में 90 प्रतिशत से ज्यादा नंबर लेकर आएगा, उसे वे अपने निजी खर्चे पर दिल्ली घुमाएंगे और हवाई जहाज में सफर भी कराएंगे.
टीचर के वादे को चुनौती की तरह लिया
शिक्षक के इस वादे को कक्षा के छात्र आदित्य मंगल ने चुनौती की तरह लिया. आदित्य ने लक्ष्य हासिल करने के लिए दिन-रात मेहनत की. जब 10वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम आया तो उसने 98.67 प्रतिशत अंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार और स्कूल का नाम रोशन किया बल्कि शिक्षक से किए गए वादे को भी पूरा करवाने का हकदार बन गया.

शिक्षक ने निभाया वादा, छात्र को कराया दिल्ली दर्शन
आदित्य की शानदार सफलता के बाद शिक्षक रविकांत कटारिया ने अपने वादे के मुताबिक उसे अपने खर्चे पर दिल्ली घुमाने का फैसला किया. 10 अगस्त को दोनों कोटा से दिल्ली के लिए रवाना हुए. अगले दिन 11 अगस्त को दिल्ली पहुंचने के बाद शिक्षक ने पूरे दिन आदित्य को राजधानी के प्रमुख ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थलों की सैर कराई. आदित्य ने इंडिया गेट, अक्षरधाम मंदिर, राष्ट्रीय संग्रहालय और कुतुब मीनार समेत दिल्ली के कई प्रमुख स्थलों को देखा. उसके लिए यह सिर्फ घूमने का मौका नहीं था, बल्कि उसकी मेहनत के बदले शिक्षक की ओर से दिया गया एक यादगार पुरस्कार भी था.
छात्र के साथ शिक्षक ने भी पहली बार भरी उड़ान
दिल्ली की सैर के बाद दोनों ने रात में दिल्ली से जयपुर के लिए फ्लाइट पकड़ी. इस सफर की सबसे खास बात यह रही कि छात्र आदित्य ही नहीं बल्कि उसके टीचर रविकांत कटारिया ने भी पहली बार प्लेन में सफर किया. दोनों के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा. जयपुर पहुंचने के बाद दोनों ट्रेन से कोटा के लिए रवाना हुए और 12 अगस्त की सुबह कोटा वापस पहुंचे.

15 हजार रुपये खर्च कर निभाया वादा
शिक्षक रविकांत कटारिया ने बताया कि इस पूरे सफर में उनका करीब 15 हजार रुपये का खर्च हुआ. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने यह वादा किया था और आदित्य के 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल करने के बाद उन्होंने अपना वादा पूरा किया. उन्होंने कहा कि यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा. हर साल उनके स्कूल का जो भी छात्र 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल करेगा, उसे वे अपने खर्चे पर घुमाने लेकर जाएंगे. उनका उद्देश्य सिर्फ बच्चों को अच्छे अंक दिलाना नहीं बल्कि उन्हें मेहनत करने के लिए प्रेरित करना और उनकी सफलता को यादगार बनाना है.
आदित्य का सपना IIT में एडमिशन, बनना चाहता है इंजीनियर
98.67 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले छात्र आदित्य मंगल का अगला लक्ष्य भी बड़ा है. आदित्य का कहना है कि वह किसी अच्छे संस्थान से B.Tech करना चाहता है और IIT में एडमिशन लेना उसका लक्ष्य है. इसी लक्ष्य को लेकर वह आगे की पढ़ाई में जुटा हुआ है. आदित्य ने बताया कि उसके पिता खादी ग्रामोद्योग में प्राइवेट कार्मिक हैं और उनका परिवार कुन्हाड़ी के बालाजी टाउन में रहता है. आदित्य के लिए यह पहला हवाई सफर था और शिक्षक के साथ दिल्ली से जयपुर तक फ्लाइट में सफर करना उसके लिए जिंदगी का बेहद खास अनुभव बन गया.
शिक्षक का सफर भी छात्र के साथ बना यादगार
रविकांत कटारिया ने बताया कि वे 10 अगस्त की रात को कोटा से ट्रेन के जरिए दिल्ली के लिए रवाना हुए थे. 11 अगस्त को दिल्ली पहुंचने के बाद पूरे दिन आदित्य को राजधानी के प्रमुख स्थानों की सैर कराई. इसके बाद रात में दिल्ली से जयपुर के लिए फ्लाइट पकड़ी और जयपुर से ट्रेन के जरिए दोनों 12 अगस्त की सुबह कोटा पहुंचे.
एक सरकारी स्कूल के शिक्षक का अपने छात्र के लिए अपनी जेब से करीब 15 हजार रुपये खर्च करना और उसे पढ़ाई की सफलता के बाद दिल्ली दर्शन से लेकर पहली हवाई यात्रा तक का अनुभव कराना सिर्फ एक वादे की कहानी नहीं है. यह उस शिक्षक की सोच को दिखाता है, जो अच्छे नंबरों के साथ बच्चों के सपनों को भी उड़ान देना चाहता है. रविकांत कटारिया का यह प्रयास उन तमाम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. वहीं, आदित्य की 98.67 प्रतिशत की सफलता और IIT में दाखिले का सपना इस बात की मिसाल है कि जब मेहनत के साथ शिक्षक का भरोसा और प्रोत्साहन मिल जाए, तो सरकारी स्कूल का छात्र भी अपने सपनों की ऊंची उड़ान भर सकता है.