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जब अश्वेत अमेरिकियों को मतदान का अधिकार मिला, अमेरिकी संविधान में हुआ था 15वां संशोधन

आज के दिन ही अमेरिका में अश्वेत लोगों को बराबरी का अधिकार मिला था. जब वहां संविधान में संशोधन के बाद उन्हें मतदान करने का हक दिया गया.

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आज ही अश्वेत अमेरिकियों को मिला था वोटिंग राइट (Photo - Pexels)
आज ही अश्वेत अमेरिकियों को मिला था वोटिंग राइट (Photo - Pexels)

अमेरिकी में गृहयुद्ध 1865 में खत्म हो गया था. फिर भी कई मतभेद वर्षों तक जारी रहे. वहां का सियासी फोकस उन अश्वेत पुरुष और महिलाओं पर था, जो कभी गुलाम हुआ करते थे. क्योंकि कुछ सवाल थे जो अभी भी अनुत्तरित थे -  क्या अब नागरिक बन चुके इन काले लोगों को वास्तव में उनके पहले के उत्पीड़कों के बराबर माना जा रहा था? क्या वे मतदान कर सकते थे और खुद भी हाउस के मेंबर बन सकते थे? अगर उन्हें रोकने की कोशिश की गई, तो सरकार की क्या प्रतिक्रिया होगी?

 फरवरी 1869 में, प्रतिनिधि सभा ने संविधान में 15वां संशोधन तैयार किया, जिसमें कहा गया कि संयुक्त राज्य अमेरिका के नागरिकों के मतदान के अधिकार को संयुक्त राज्य अमेरिका या किसी भी राज्य द्वारा नस्ल, रंग या पूर्व दासता की स्थिति के आधार पर नकारा या कम नहीं किया जाएगा. क्योंकि सिविल वॉर खत्म होने के बाद पूर्व में कॉन्फेडरेट संघ के अधीन रहा दक्षिणी भाग सैन्य कब्जे में था और राजनीतिक ध्यान उन अश्वेत पुरुषों और महिलाओं के भविष्य पर केंद्रित हो गया था जो कभी गुलाम थे.

दक्षिण में बढ़ती हिंसा के बीच, कुछ दासता-विरोधी रिपब्लिकनों ने अश्वेत मतदाताओं के लिए अधिक सुरक्षा की मांग की. फरवरी 1869 में, प्रतिनिधि सभा ने संविधान में 15वां संशोधन तैयार किया. हालांकि, इस संशोधन को कानून बनने के लिए तीन-चौथाई राज्यों द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक था - और यह कोई आसान काम नहीं था.

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नवनिर्वाचित राष्ट्रपति, पूर्व संघ सेनापति यूलिसिस एस ग्रांट ने जोर देकर कहा कि प्रस्तावित संशोधन हमारी स्वतंत्र सरकार की स्थापना से लेकर आज तक इस तरह के किसी भी अन्य अधिनियम की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण उपाय है. एक-एक करके सभी राज्य इसके अनुरूप हो गए. अंततः, 3 फरवरी 1870 को 15वां संशोधन कानून बन गया. इस फैसले से अमेरिका के अश्वेत समुदाय खुशी से झूम उठे. लेकिन, समान अधिकारों के लिए उनका संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ था. आगे लंबी लड़ाई जारी रही और आज भी 'ब्लैक लाइव मैटर' जैसे आंदोलन भड़क उठते हैं. 

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