सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे आने के बाद अक्सर कोचिंग संस्थानों और उनकी प्रचार रणनीतियों पर कई तरह के सवाल खड़े होते हैं. इसी बीच हाल ही में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए एक सवाल ने इस बहस को और ज्यादा बढ़ा दिया है. इस सवाल में जानने की कोशिश की गई है कि क्या कोचिंग संस्थान उम्मीदवारों की अनुमति के बिना उनके मॉक इंटरव्यू को इंटरनेट या सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से साझा कर सकते हैं?
यह सवाल उपभोक्ता मामलों के विभाग से पूछा गया और उनसे सफाई मांगी गई कि क्या यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थान किसी उम्मीदवार का मॉक इंटरव्यू इंटरनेट पर डाल सकते हैं, खासकर तब जब उम्मीदवार बाद में उसके प्रकाशित होने पर आपत्ति करें.
मिला यह जवाब
हालांकि, जवाब में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कहा कि यह सवाल सलाह या स्पष्टीकरण मांगने जैसा लग रहा है और इसलिए आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एफ) के तहत सूचना में शामिल नहीं होता है. किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण से केवल वही, रिकॉर्ड या जानकारी मांगी जा सकती है जो उसके पास पहले से उपलब्ध हो न कि उसकी राय या व्याख्या. केंद्रीय सूचना आयोग ने बाद में इस जवाब को बरकरार रखा और अपील खारिज कर दी.
खड़ी हुई नई चिंता
यह RTI आवेदन Shashank Gaur ने दायर की थी. इस दौरान उन्होंने पूछा कि क्या कोचिंग संस्थानों को सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान लिए गए मॉक इंटरव्यू को प्रकाशित करने का अधिकार है. क्या कोई उम्मीदवार अपने मॉक इंटरव्यू के प्रकाशन से इनकार कर सकता है? या क्या कोचिंग उसकी सहमति के बिना उसका मॉक इंटरव्यू प्रकाशित कर सकती है? आरटीआई आवेदन में कहा गया था कि ऐसी स्थिति तब पैदा हो सकती है जब कोई उम्मीदवार तैयारी के शुरुआती चरण में मॉक इंटरव्यू देता है और उसमें खराब प्रदर्शन करता है, लेकिन बाद में सुधार कर लेता है. यदि परिणाम घोषित होने के बाद पहले का इंटरव्यू प्रकाशित किया जाता है, तो इससे उम्मीदवार की छवि खराब हो सकती है और सोशल मीडिया पर ऐसे रिएक्शन आ सकते हैं, जो उन्हें परेशान कर सकते हैं.
नाम से जुड़ा भी था सवाल
आवेदन में एक और प्रश्न पूछा गया था जिसमें यह भी चिंता जताई गई थी कि कोचिंग संस्थान प्रचार के लिए छात्रों के नाम का इस्तेमाल करते हैं. एक सवाल में पूछा गया कि क्या कोचिंग सेंटर किसी कोर्स के लिए छात्र का नाम प्रकाशित कर सकते हैं, भले ही छात्र ने वह कोर्स पूरा नहीं किया हो और बाद में अपने नाम के इस्तेमाल पर आपत्ति जताए. आवेदक ने यह भी पूछा कि क्या प्रचार के दौरान छात्र का नाम दिखाने से पहले उसकी अनुमति लेना जरूरी है? यह मुद्दा शुक्रवार को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम घोषित होने के बाद से एक बार फिर गरमा गया है.