11 फरवरी, 1990 को नेल्सन मंडेला जेल से रिहा हुए थे. मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ अहिंसक आंदोलनों का नेतृत्व किया था. दक्षिण अफ्रीका में मंडेला को वहीं दर्जा प्राप्त है, जो भारत में महात्मा गांधी को. उन्हें अश्वेत राजनीति का सबसे बड़ा लीडर माना जाता है.
1944 में, मंडेला दक्षिण अफ्रीका के सबसे पुराने अश्वेत राजनीतिक संगठन, अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (एएनसी) में शामिल हुए. वहां वे जोहान्सबर्ग स्थित एएनसी की युवा शाखा के नेता बने. 1952 में, वे एएनसी के उप-राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की संस्थागत श्वेत वर्चस्व और नस्लीय भेदभाव प्रणाली, रंगभेद के खिलाफ अहिंसक प्रतिरोध का समर्थन किया.
कहा जाता है कि 1960 में शार्पविले में शांतिपूर्ण अश्वेत प्रदर्शनकारियों के नरसंहार के बाद , नेल्सन ने श्वेत अल्पसंख्यक सरकार के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ने के लिए एएनसी की एक अर्धसैनिक शाखा को संगठित करने में मदद की थी. 1961 में उन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, बाद में उन्हें बरी कर दिया गया, लेकिन 1962 में अवैध रूप से देश छोड़ने के आरोप में उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया.
मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें 5 साल की सजा सुनाई गई और रॉबेन द्वीप पर एक जेल में भेज दिया गया. 1964 में उन पर तोड़फोड़ के आरोप में फिर से मुकदमा चलाया गया. जून 1964 में, उन्हें कई अन्य एएनसी नेताओं के साथ दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.मंडेला ने अपने 27 वर्षों में से पहले 18 वर्ष क्रूर रॉबेन द्वीप के जेल में बिताए.
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बिना बिस्तर और पानी की सुविधा वाली एक छोटी सी कोठरी में कैद, उन्हें पत्थर की खदान में कड़ी मेहनत करने के लिए मजबूर किया गया था. उन्हें हर छह महीने में एक बार पत्र लिखने और प्राप्त करने की अनुमति थी और साल में एक बार उन्हें 30 मिनट के लिए किसी से मिलने की अनुमति दी जाती थी. हालांकि, मंडेला का संकल्प अटूट रहा और रंगभेद विरोधी आंदोलन के प्रतीकात्मक नेता बने रहे.
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उन्होंने जेल में सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसने दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों को रॉबेन द्वीप पर स्थितियों में व्यापक सुधार करने के लिए बाध्य किया. बाद में उन्हें एक अन्य स्थान पर ट्रांसफर कर दिया गया, जहां वे नजरबंद रहे. 1989 में, एफ.डब्ल्यू. डी. क्लार्क दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बने और उन्होंने रंगभेद को समाप्त करने का काम शुरू किया.
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डी. क्लर्क ने एएनसी पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया. फांसी की सजा को निलंबित कर दिया और फरवरी 1990 में नेल्सन मंडेला की रिहाई का आदेश दिया गया. इसके बाद, मंडेला ने अल्पसंख्यक सरकार के साथ रंगभेद को समाप्त करने और एक बहुजातीय सरकार की स्थापना के लिए वार्ता में एएनसी का नेतृत्व किया.
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1993 में, मंडेला और डी क्लर्क को संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. एक वर्ष बाद, देश के पहले स्वतंत्र चुनावों में एएनसी ने बहुमत हासिल किया और मंडेला दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति चुने गए. मंडेला ने 1999 में राजनीति से संन्यास ले लिया, लेकिन दिसंबर 2013 में अपनी मृत्यु तक वे शांति और सामाजिक न्याय के वैश्विक समर्थक बने रहे.