आंखों पर पट्टी बांधे हुए, स्कॉटलैंड की रानी मैरी इंग्लैंड के फोदरिंगहे कैसल में विशेष रूप से तैयार किए गए मचान पर एक तकिये पर घुटने टेककर बैठ गई और लैटिन भाषा में प्रार्थना करने लगी. तभी जल्लाद ने कुल्हाड़ी से प्रहार किया. दुर्भाग्य से, उसका वार चूक गया और गर्दन पर नहीं, सिर पर लगा. दूसरे प्रहार से उसकी गर्दन लगभग कट गई, लेकिन एक छोटी सी हड्डी के कारण ऐसा नहीं हो पाया. हालांकि, तीसरे प्रहार में उसका सिर पूरी तरह से धड़ से अलग हो गया.
भीड़ के सामने जल्लाद ने उनको पकड़ कर लाया था और कुल्हाड़ी चलाते हुए चिल्लाया - ईश्वर महारानी एलिजाबेथ की रक्षा करें! अगले पल सिर पर लगी भूरी विग गिर गई, जिससे मैरी के छोटे-छोटे भूरे बाल दिखाई दे रहे थे. उनके शरीर के ऊपर खड़े होकर, अर्ल ऑफ केंट ने रानी और उनके सभी शत्रुओं का यही अंत हो. यह घटना 8 फरवरी 1587 की है, जब स्कॉटलैंड की क्वीन मैरी को इंग्लैंड में फांसी दे दी गई थी.
स्कॉटलैंड की रानी मैरी को इंग्लैंड के फोदरिंगहे कैसल में 19 वर्षों तक नजर बंद रखा गया था. उन पर रानी एलिजाबेथ ने खुद की हत्या की साजिश का आरोप लगाया था. मौत की सजा से 7 दिन पहले यानी 1 फरवरी को महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने क्वीन मैरी के डेथ वारंट पर साइन किया था. 8 फरवरी को हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में क्वीन मैरी का सिर कलम कर दिया गया.
क्या है क्वीन मैरी की कहानी
1542 में, महज छह दिन की उम्र में, मैरी अपने पिता, राजा जेम्स पंचम की मृत्यु के बाद स्कॉटलैंड की गद्दी पर बैठीं. उनकी मां ने उन्हें फ्रांसीसी दरबार में पालन-पोषण के लिए भेज दिया और 1558 में उनका विवाह फ्रांसीसी राजकुमार से हुआ, जो 1559 में फ्रांस के राजा फ्रांसिस द्वितीय बने, लेकिन अगले ही वर्ष उनकी मृत्यु हो गई. फ्रांसिस की मृत्यु के बाद, मैरी स्कॉटलैंड लौट आईं और देश की शासक के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली.
1565 में अंग्रेजी सिंहासन पर अपने उत्तराधिकार के दावे को मजबूत करने के लिए, मैरी ने अपने अंग्रेज चचेरे भाई लॉर्ड डार्नले से शादी कर ली. जबकि, इंग्लैंड की क्वीन एलिजाबेथ उनकी शादी रॉबर्ट डडली से करवाना चाहती थी, जिसके पिता पर देशद्रोह का आरोप था और जो एलिजाबेथ का संदिग्ध प्रेमी भी माना जाता था.
1567 में, किर्क ओ' फील्ड में एक विस्फोट में डार्नले की रहस्यमय तरीके से मृत्यु हो गई. इस हत्या में संदिग्ध आरोपी मैरी के प्रेमी, अर्ल ऑफ बोथवेल थे. हालांकि, बोथवेल को आरोप से बरी कर दिया गया, लेकिन उसी वर्ष मैरी से उनकी शादी ने सभी स्कॉटिश लॉर्ड को नाराज कर दिया. मैरी ने सभी लॉर्ड्स के खिलाफ एक सेना बुलाई, लेकिन हार गईं और उन्हें स्कॉटलैंड के लोचलेवन में कैद कर लिया गया और डार्नले से हुए अपने बेटे जेम्स के पक्ष में सिंहासन छोड़ने के लिए मजबूर किया गया.
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1568 में, मैरी कैद से भाग निकली और एक बड़ी सेना खड़ी की, लेकिन हार गई और इंग्लैंड भाग गई. महारानी एलिजाबेथ ने शुरू में मैरी का स्वागत किया, लेकिन जल्द ही उन्हें अपनी मित्र और कजिन क्वीन मैरी को नजरबंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि मैरी एलिजाबेथ को उखाड़ फेंकने के लिए विभिन्न अंग्रेजी कैथोलिक और स्पेनिश साजिशों का केंद्र बन गई थीं.
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उन्नीस साल तक एलिजाबेथ ने क्वीन मैरी को नजरबंद रखा. बाद में 1586 में, एलिजाबेथ की हत्या की एक बड़ी साजिश की खबर आई और मैरी पर मुकदमा चलाया गया. उन्हें साजिश में शामिल होने का दोषी पाया गया और मौत की सजा सुनाई गई. 8 फरवरी, 1587 को, स्कॉटलैंड की रानी मैरी को राजद्रोह के आरोप में फांसी दे दी गई. उनके पुत्र, स्कॉटलैंड के राजा जेम्स VI ने अपनी मां की मृत्यु को शांतिपूर्वक स्वीकार कर लिया और 1603 में महारानी एलिजाबेथ की मृत्यु के बाद वे इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और आयरलैंड के राजा बन गए.