आज के समय में एविएशन सेक्टर तेजी से ग्रो कर रहा है और इसके साथ ही एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (AME) की मांग भी लगातार बढ़ती जा रही है. हर दिन बढ़ती फ्लाइट्स और नए एयरपोर्ट्स के कारण ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा हो गई है, जो विमानों की सुरक्षा और मरम्मत का जिम्मेदारी संभाल सकें. यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में युवा इस फील्ड की ओर आकर्षित हो रहे हैं. अच्छी सैलरी, टेक्निकल स्किल और इंटरनेशनल करियर के अवसर इसे एक उभरता हुआ और आकर्षक करियर बना रहे हैं.
लेकिन कई बार युवाओं को इनसे जुड़े कोर्स या ट्रेनिंग की नॉलेज नहीं होती है. ऐसे में अगर आप इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो हम आपको इससे जुड़ी सारी जानकारी देने जा रहे हैं.
करना होता है ये कोर्स
इस फील्ड में आने के लिए सबसे अहम कोर्स एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (AME) है. इसकी अवधि 2 से 3 साल की होती है, जिसमें कोर्स और ट्रेनिंग होती है. इसकी ट्रेनिंग भारत सरकार के DGCA के तहत की जाएगी.
क्या होता है इनका काम?
एयरक्राफ्ट मेंनेटेंस इंजीनियरिंग (AME) वह शाखा है, जो विमानों की मरम्मत का काम करते हैं. वे विमान के इंजन, एवियोनिक्स, संरचना और अन्य प्रणालियों की जांच करके यह सुनिश्चित करतें हैं कि कोई विमान उड़ान भरने के लिए सुरक्षित है या नहीं. विमान और उसके यात्रियों की सुरक्षा AME के हाथों में होती है और कोई भी नागरिक विमान AME के प्रमाणपत्र के बिना उड़ान नहीं भर सकता.
कौन कर सकता है ये कोर्स ?
एयरक्राफ्ट मेंनेटेंस इंजीनियरिंग (AME) करने के लिए युवाओं को 12वीं फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ के साथ पास करना अनिवार्य है. हालांकि, कुछ डिप्लोमा कोर्स हैं, जो 10वीं के बाद भी कर सकते हैं. इन फील्ड में करियर बनाने के लिए मेडिकली फिट होना जरूरी है.
अच्छी होती है सैलरी
वहीं, अगर सैलरी की बात करें, तो इस फील्ड में शुरुआती सैलरी करीब 25 से 50 हजार रुपये हो सकती है. 3 से 5 साल के अनुभव के बाद ये लगभग 60 हजार से 1.5 लाख रुपये तक जा सकती है.
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