संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक है. इसके जरिए IAS, IPS,IFS समेत कई पदों पर नियुक्ति होती है. ये आपको रुतबा, पावर और सम्मान सबकुछ देता है. हर साल लाखों युवा IAS बनने का सपना देखते हैं जिसके लिए UPSC का एग्जाम पास करना होता है लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इसके कई और तरीके हैं जिससे आप इस पद पर काम कर सकते हैं.
राज्य सिविल सेवाओं से प्रमोशन जैसे विकल्प ऐसे रास्ते हैं, जिनके जरिए अधिकारी बाद में आईएएस कैडर में शामिल हो सकते हैं.
प्रशासनिक सेवा में होना चाहिए...
बिना UPSC एग्जाम दिए भी छात्र इस पद पर काम कर सकते हैं. लेकिन उसके लिए आपको प्रशासनिक सेवा में होना जरूरी है. इसके साथ ही आपको अच्छा अनुभव होना चाहिए.
इस तरीके से बन सकते हैं IAS
यूपीएससी सीएसई एग्जाम क्रैक किए बिना अगर आप IAS अधिकारी बनने का सपने देख रहे हैं तो, इसके दो तरीके होते हैं- पहला राज्य सिविल सेवा (PCS) के माध्यम से प्रमोशन के आधार पर और दूसरा लेटरल एंट्री के बेसिस पर.
क्या करना होता है?
बता दें कि सबसे पहले राज्य सिविल सेवा जैसे UP PCS या MP PCS की परीक्षाओं को पास कर राज्य प्रशासनिक सेवा में सरकारी नौकरी ले लें. इसमें SDM या उससे जुड़ा पद होना चाहिए. इसके साथ ही आपकी उम्र 55 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए. भारतीय प्रशासनिक सेवा विनियम 1955 के मुताबिक, PCS पद 10 से 12 साल सेवा के बाद आईएएस कैडर में प्रमोशन के लिए पात्रता मिलती है. हालांकि, प्रमोशन, पद पर अनुभव, परफॉर्मेंस, वैकेंसी और राज्य सरकार की सिफारिश के आधार पर होता है.
कौन करता है फैसला?
किसी PCS अधिकारी को IAS बनाने के लिए कमेटी का गठन होता है, जो प्रमोशन का फैसला लेते हैं. इस कमेटी में मुख्य सचिव, सीनियर IAS और संबंधित अधिकारी शामिल होते हैं. उम्मीदवारों का कॉन्फिडेंशियल कैरेक्टर और सेवा रिकॉर्ड की जांच के बाद कमेटी IAS के लिए प्रमोशन का फैसला करती है.
लेटरल एंट्री स्कीम भी एक तरीका
बिना पेपर दिए IAS बनने का दूसरा ऑप्शन है लेटरल एंट्री स्कीम. बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से साल 2018 में लेटरल एंट्री स्कीम शुरू की थी, जिसके जरिए ज्वॉइंट डायरेक्टर, डायरेक्टर या डिप्टी सेक्रेटरी लेवल के पद पर नियुक्ति होती है. इसके लिए उम्मीदवारों को कम से कम ग्रेजुएट और सरकारी या प्राइवेट क्षेत्र से जुड़े जैसे वित्त, अर्थशास्त्र, सड़क परिवहन, पर्यावरण, कृषि में कम से कम 15 साल तक काम का अनुभव होना चाहिए.