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दो बार IIT में फेल, 40 लाख का कर्ज, पिता ने गिरवी रखी जमीन... बेटी बनी माइक्रोसॉफ्ट में सीनियर डायरेक्टर 

प्रियंका वर्गीदिया ने IIT-JEE में दो बार असफल रहने के बाद अमेरिका जाकर शिक्षा ग्रहण की और माइक्रोसॉफ्ट में सीनियर डायरेक्टर के पद तक पहुंचीं. उनके पिता ने ₹40 लाख का लोन लेने के लिए जमीन गिरवी रखी. प्रियंका की कहानी निरंतरता, आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की प्रेरणा देती है. यह कहानी उन छात्रों के लिए मिसाल है जो असफलता के बाद भी हार नहीं मानते.

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Microsoft leader Priyanka Vergadia (Photo: Priyanka Vergadia/X)
Microsoft leader Priyanka Vergadia (Photo: Priyanka Vergadia/X)

भारत में हर साल लाखों छात्र देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों यानी IIT में पढ़ने का सपना देखते हैं. लेकिन जब यह सपना टूटता है, तो कई युवा डिप्रेशन और हताशा के शिकार हो जाते हैं. अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो आपको प्रियंका वर्गीदिया की कहानी जरूर पढ़नी चाहिए.

प्रियंका दो बार IIT की प्रवेश परीक्षा में बैठीं और दोनों ही बार असफल रहीं. लेकिन आज वे किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. वे दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक, माइक्रोसॉफ्ट में 'सीनियर डायरेक्टर ऑफ एआई ट्रांसफॉर्मेशन' के पद पर तैनात हैं. हाल ही में उन्होंने सोशल मीड‍िया पर अपनी जर्नी साझा की है जो युवाओं को काफी प्रेरित कर रही है. 

पिता ने गिरवी रखी जमीन, ₹40 लाख के कर्ज से शुरू हुआ सफर
प्रियंका ने बताया कि जब दो प्रयासों के बाद भी उनका IIT में सिलेक्शन नहीं हुआ, तो उन्होंने निराश होकर बैठने के बजाय एक बड़ा और साहसी फैसला लिया. उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाने की ठानी. साल 2008 में उन्होंने मास्टर डिग्री के लिए करीब 40 लाख रुपये का एजुकेशन लोन लिया.

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यह फैसला प्रियंका और उनके परिवार के लिए किसी बड़े जुए से कम नहीं था. इस लोन को चुकाने की गारंटी के लिए उनके पिता ने अपनी जमीन तक गिरवी रख दी थी. यहाँ तक कि भारत से अमेरिका जाने की एक तरफा हवाई टिकट (One-way Airfare) के पैसे भी कर्ज लेकर ही जुटाए गए थे. प्रियंका स्वीकार करती हैं कि उस समय उन पर पारिवारिक उम्मीदों और इस भारी-भरकम कर्ज को चुकाने का एक मानसिक दबाव हमेशा बना रहता था.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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थी लोन चुकाने की टेंशन
अमेरिका पहुंचने के बाद शुरुआती महीने प्रियंका के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहे. भारत से बिल्कुल अलग शिक्षा प्रणाली, क्लासरूम का नया माहौल और पूरी तरह अजनबी संस्कृति में खुद को ढालना आसान नहीं था. पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें अकेले रहना, खुद खाना बनाना, घर संभालना और पाई-पाई का बजट बनाना भी सीखना पड़ा. इन सब के बीच दिमाग में सिर्फ एक ही बात चौबीसों घंटे घूमती थी कि जैसे ही ग्रेजुएशन पूरी हो, तुरंत नौकरी ढूंढनी है ताकि पिता पर से कर्ज का बोझ उतारा जा सके.

गूगल से माइक्रोसॉफ्ट तक: लगातार सीखने का जज्बा
प्रियंका की यह जिद और अटूट मेहनत आखिरकार रंग लाई. उन्होंने पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी (University of Pennsylvania) से कंप्यूटर एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में मास्टर्स पूरा किया. इसके बाद उनका करियर रॉकेट की रफ्तार से आगे बढ़ा:

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साल 2017: वे टेक दिग्गज कंपनी गूगल का हिस्सा बनीं.
साल 2021: उन्होंने एक बेस्टसेलिंग किताब भी लिखी.
साल 2024: वे माइक्रोसॉफ्ट में एक सीनियर एआई एग्जीक्यूटिव के रूप में शामिल हुईं.
साल 2025: उन्होंने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ह्वार्टन स्कूल (Wharton School) से अपनी एमबीए (MBA) की डिग्री भी पूरी कर ली.

मैं कोई असाधारण बुद्धिमान नहीं थी...
अपनी इस बेमिसाल कामयाबी पर बात करते हुए प्रियंका वर्गीदिया कहती हैं कि उनकी सफलता के पीछे कोई असाधारण बुद्धिमत्ता नहीं थी. वे आज जहां भी हैं, सिर्फ अपनी निरंतरता, विपरीत हालातों से लड़ने की क्षमता और खुद पर अटूट विश्वास की बदौलत हैं. वे मानती हैं कि उस समय IIT की परीक्षा में दो बार फेल होना भले ही उनके लिए एक गहरा झटका था, लेकिन वही नाकामी उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जिसने उन्हें दुनिया के सामने खुद को साबित करने का मौका दिया.

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