सरकारी नौकरी का नाम सुनते ही सबसे पहले आंखों के सामने मोटी-मोटी किताबें, दिल्ली के मुखर्जी नगर जैसे कोचिंग इलाकों की भीड़ और लाखों रुपये की कोचिंग फीस घूमने लगती है. लेकिन क्या वाकई हर सरकारी सीट के लिए कोचिंग बहुत जरूरी है. जवाब है नहीं. भारत में कुछ ऐसी परीक्षाएं हैं जिन्हें अगर सही स्ट्रेटजी और थोड़े से अनुशासन के साथ घर पर पढ़ा जाए, तो बिना किसी कोचिंग के भी 'सरकारी' नौकरी पाई जा सकती है. यहां हम उन नौकरियों की जानकारी दे रहे हैं.
1. SSC मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS): सबसे सीधा रास्ता
अगर आप सिर्फ 10वीं पास हैं, तो यह आपके लिए सबसे बेहतरीन मौका है. इसमें कोई इंटरव्यू नहीं होता. सिलेबस में वही बेसिक मैथ्स और रीजनिंग है जो हम स्कूल में पढ़ते हैं. इसकी तैयारी के लिए पुराने साल के पेपर्स सॉल्व कर लीजिए, आधा काम वहीं हो जाएगा.
2. SSC जनरल ड्यूटी (GD) कांस्टेबल: वर्दी का सपना, बिना रट्टा मारे
देश सेवा का जज्बा है तो SSC GD से आसान कुछ नहीं. यहां लिखित परीक्षा का लेवल बहुत ही बेसिक होता है. इसमें चयन आपकी किताबी ज्ञान से नहीं बल्कि आपकी 'फिजिकल फिटनेस' से है. अगर आप दौड़ने में माहिर हैं, तो सिर्फ सेल्फ-स्टडी से पेपर निकल जाएगा.
3. डाक विभाग (GDS): बिना परीक्षा वाली नौकरी!
भारतीय डाक विभाग समय-समय पर ग्रामीण डाक सेवक की भर्ती निकालता है. इसमें कई बार कोई एग्जाम ही नहीं होता, सेलेक्शन सीधे आपकी 10वीं की मेरिट के आधार पर होता है. बस आपको समय पर फॉर्म भरना और सही सर्कल चुनना आना चाहिए.
4. SSC स्टेनोग्राफर: जहां मैथ्स का खौफ नहीं
कई छात्रों का सरकारी नौकरी का सपना सिर्फ गणित की वजह से टूट जाता है. स्टेनोग्राफर उन लोगों के लिए वरदान है जिनका मैथ्स कमजोर है, क्योंकि इसमें मैथ्स आता ही नहीं. इस नौकरी के लिए आपको बस शॉर्टहैंड (Stenography) सीखनी होगी जो आप घर बैठे या किसी छोटे सेंटर से 6 महीने में सीख सकते हैं.
5. RRB ग्रुप डी (Group D): वैकेंसी की सुनामी
रेलवे जब भी ग्रुप डी की भर्ती निकालता है, तो पद लाखों में होते हैं. बता दें कि वैकेंसी ज्यादा होने की वजह से सलेक्शन के चांस बढ़ जाते हैं. सिलेबस पूरी तरह से 10वीं की NCERT पर आधारित होता है. अगर आपने स्कूल में ठीक से पढ़ाई की है, तो कोचिंग की कोई जरूरत नहीं.
6. स्टेट पुलिस कांस्टेबल: होम टाउन में नौकरी
यूपी, बिहार या राजस्थान पुलिस की कांस्टेबल भर्ती का सिलेबस बहुत ही प्रिडिक्टेबल (अनुमानित) होता है. इसमें लोकल भाषा और सामान्य ज्ञान का वेटेज ज्यादा होता है, जिसे आप लोकल पब्लिकेशन की किताबों से आसानी से कवर कर सकते हैं.
7. IBPS क्लर्क: प्री और मेंस का सीधा खेल
बैंक PO में भले ही बहुत दिमाग खपाना पड़े, लेकिन क्लर्क लेवल का एग्जाम काफी हद तक स्पीड का खेल है. यदि कैलकुलेशन स्पीड अच्छी है और आप घर पर मॉक टेस्ट देते हैं, तो बैंकिंग सेक्टर की यह नौकरी आपकी हो सकती है. इसमें इंटरव्यू का झंझट भी नहीं है.
8. केंद्रीय विद्यालय (KVS) नॉन-टीचिंग पोस्ट
KVS में समय-समय पर क्लर्क (LDC) और जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट की भर्तियां निकलती हैं. इनका सिलेबस बहुत सीमित होता है. बेसिक कंप्यूटर, थोड़ी हिंदी और थोड़ी इंग्लिश पढ़ लेने ये एग्जाम निकल सकता है.
नोट- गौरतलब है कि इन परीक्षाओं को आसान कहने का मतलब यह कतई नहीं है कि बिना पढ़े या तैयारी किए नौकरी मिल सकती है. इसके आसान का मतलब है कि यहां 'पैटर्न' फिक्स है और कईयों में वैकेंसी बहुत ज्यादा संख्या में निकलती हैं.
बिना कोचिंग के सलेक्शन का थ्री पॉइंट फॉर्मूला
- NCERT की किताबों से 8वीं से 10वीं तक की मैथ्स और साइंस रट लो.
- मॉक टेस्ट जरूर करते रहें. कोचिंग की फीस बचाने के बजाय 200-400 रुपये की 'टेस्ट सीरीज' मददगार होगी.
- करंट अफेयर्स जरूर पढ़ें. रूटीन में अखबार पढ़ने की आदत डालें.