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कंपनी ने लगाया वर्क फ्रॉम होम पर बैन, Gen-Z कर्मचारी ने मैनेजर को सिखाया सबक, जवाब सुनकर बोलती हुई बंद!

Gen Z का काम करने का तरीका बहुत अलग है. सोशल मीडिया पर शेयर की गई मुंबई की एक कंपनी में काम कर रहे एक युवा (Gen Z) कर्मचारी ने वर्क फ्रॉम होम पर लगाए गए सख्त नियमों का शांत तरीके से विरोध किया. उसने अपने मैनेजर को ऐसा जवाब दिया जो थोड़ा व्यंग्यात्मक था, लेकिन बहुत समझदारी के साथ लिया गया एक्शन था. इसके बाद ऑफिस में काम करने के नियमों पर सवाल उठने लगे और लोग इस फैसले को दोबारा सोचने पर मजबूर हो गए.

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Gen Z workplace (Photo : Pexels)
Gen Z workplace (Photo : Pexels)

Gen Z  केवल ऑफिस में बैठकर काम नहीं करते हैं बल्कि नए रूल भी बनाते हैं. कई युवाओं की अच्छी नौकरी के साथ यह उम्मीद जुड़ी होती है कि उन्हें हर समय काम के लिए उपलब्ध रहना होगा. देर रात के मैसेज, जरूरी कॉल और ऑफिस टाइम के बाद छोटे-छोटे काम करना आम बात माना जाता है. लेकिन अगर कोई कर्मचारी इन नियमों को बिल्कुल सख्ती से मानने लगे, तो क्या होगा? मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट पारस गंगवाल ने सोशल मीडिया एक्स पर एक ऐसा ही मामला शेयर किया है. इसमें Gen Z कर्मचारी रोहित ने कंपनी के नियमों को इतने सीधे तरीके से फॉलो किया कि पूरा सिस्टम ही सवालों के घेरे में आ गया.

क्यों बढ़ा मामला? 

एक्स पोस्ट के अनुसार, कर्मचारी ने हाल ही में एक कंपनी में काम शुरू किया था जहां मैनेजमेंट ने पहले ही दिन एक बात स्पष्ट कर दी थी, किसी भी परिस्थिति में किसी भी कर्मचारी को वर्क फॉर्म होम नहीं मिलेगा. कर्मचारी ने इस बात पर  कोई बहस नहीं की. उसने कोई विरोध नहीं किया. उसने ऑफिस के नियमों का पालन किया. वह हर दिन समय पर ऑफिस आता था, अपने काम पूरे करता था और काम के घंटे खत्म होते ही ठीक समय पर लॉग ऑफ कर देता था, बिना कोई सवाल पूछे. सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन एक शाम कुछ ऐसा हुआ जिसने ऑफिस के नियमों को ही बदल दिया. 

मैनेजर हुआ हैरान 

एक रात करीब 8 बजे, कर्मचारी को एक क्लाइंट का मैसेज मिला, लेकिन कर्मचारी ने जवाब न देने का विकल्प चुना. अगले दिन, मैनेजर ने उससे मैसेज को नजरअंदाज करने के बारे में सवाल किया तो उसके शांत जवाब ने मैनेजर को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. रोहित ने कहा कि सर, मुझे लगा कि ऑफिस के घंटों के बाद घर से जवाब देना 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) माना जाएगा, जिसे आपने पूरी तरह बैन कर रखा है. रोहित का जवाब शांत, सीधा और अप्रत्याशित रूप से तीखा था. 

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विद्रोह नहीं, अनुशासन 

इस घटना की खास बात विरोध नहीं बल्कि अनुशासन है. कर्मचारी ने कोई नियम नहीं तोड़ा, बल्कि कंपनी के नियमों को बिल्कुल सही तरीके से फॉलो किया. इसी वजह से एक बड़ी बात सामने आई कि ऑफिस में काम के समय तो सख्ती होती है, लेकिन उसके बाद भी कर्मचारियों से हमेशा काम के लिए तैयार रहने की उम्मीद की जाती है. 
एक्स पर शेयर की गई इस पोस्ट के अनुसार, आज के समय में कई Gen Z कर्मचारी सीधे विरोध नहीं करते, बल्कि शांत तरीके से नियमों का इस्तेमाल करके अपनी सीमाएं तय कर रहे हैं.कभी-कभी सबसे बड़ा विरोध चुप रहकर नियमों को ठीक वैसे ही मानना होता है जैसे वे लिखे होते हैं. 
 

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