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कौन हैं टेक्नो लीगल प्रोफेशनल? जानिए कैसे बढ़ते डिजिटल क्राइम से बदल रहा वकीलों का पूरा रोल, होती है इतनी कमाई

डिजिटल अपराधों में वृद्धि के कारण BTech, LLB और साइबर लॉ की मांग तेजी से बढ़ रही है. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 24 लाख से अधिक साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हुए हैं, जिससे टेक्नो-लीगल प्रोफेशनल्स की जरूरत बढ़ गई है. नए कोर्सेज और करियर विकल्प वकीलों को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं, जहां वे AI, ब्लॉकचेन और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं.

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B.Tech LL.B और साइबर लॉ का बढ़ा क्रेज
B.Tech LL.B और साइबर लॉ का बढ़ा क्रेज

अगर आप सोचते हैं कि वकालत (Law) की पढ़ाई करने का मतलब सिर्फ काले कोट में कोर्ट रूम के चक्कर काटना, जमीन-जायदाद के विवाद सुलझाना या गवाहों से बहस करना है, तो अपनी इस सोच को तुरंत बदल लीजिए. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इकोनॉमी के इस दौर में अब वकालत का पूरा प्रोफाइल ही बदल चुका है.

मार्केट में इस वक्त एक नए किस्म के वकीलों की भारी मांग है, जिन्हें हम 'टेक्नो-लीगल प्रोफेशनल्स' कहते हैं. ये वो एक्सपर्ट्स होते हैं जिन्हें कानून की धाराओं के साथ-साथ कोडिंग, एआई एल्गोरिदम और साइबर सिक्योरिटी की भी गहरी समझ होती है. अगर आप भी अपने करियर को फ्यूचर-प्रूफ और हाई-पेइंग बनाना चाहते हैं, तो यह रिपोर्ट आपके लिए ही है.

साइबर क्राइम के ग्राफ से समझिए वकीलों का नया रोल
इस नए करियर की डिमांड अचानक क्यों बढ़ी, इसकी असली वजह छिपी है देश में पैर पसारते डिजिटल अपराधों में. केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अकेले साल 2025 में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के नेशनल पोर्टल पर 24 लाख से ज्यादा साइबर फ्रॉड और साइबर क्राइम के मामले दर्ज किए गए.

बदला वकीलों का रोल: जब रैनसमवेयर अटैक, डेटा ब्रीच और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी जैसे लाखों केस सामने आते हैं, तो कंपनियों और पीड़ितों को सामान्य वकील की नहीं, बल्कि 'साइबर लॉ' के उस्तादों की जरूरत पड़ती है.

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AI और ब्लॉकचेन की उलझनें: आज की तारीख में जब कोई एआई (AI) गलत फैसला ले लेता है या कोई स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट फेल हो जाता है, तो उसकी कानूनी जिम्मेदारी (लाइबिल‍िटी) किसकी होगी? यह तय करना पारंपरिक वकीलों के बस की बात नहीं है. इसके लिए टेक-लॉयर्स की ही मदद ली जा रही है.

कौन से कोर्सेज हैं मददगार
यदि आप इस फील्ड में एंट्री करना चाहते हैं, तो अब देश के कई बड़े लॉ स्कूल और यूनिवर्सिटीज ने अपने पुराने सिलेबस को बदलकर नए जमाने के इंटरडिसिप्लिनरी कोर्सेज शुरू किए हैं. आप निम्नलिखित प्रमुख कोर्सेज की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं. 

B.Tech LL.B (एकीकृत डिग्री): ये 6 साल का एक बेहतरीन कंबाइंड कोर्स है, जिसमें छात्र को पहले इंजीनियरिंग (कंप्यूटर साइंस) और फिर साइबर व इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ (IPR) की पढ़ाई कराई जाती है. IIT खड़गपुर का राजीव गांधी स्कूल ऑफ इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ इसका बेहतरीन उदाहरण है.

LL.M in Cyber Law / Data Protection: ग्रेजुएशन (LL.B) के बाद छात्र साइबर लॉ, डेटा प्राइवेसी या AI गवर्नेंस में एक या दो साल का स्पेशलाइजेशन मास्टर कोर्स कर सकते हैं.

PG Diploma in Cyber Law & Information Security: कामकाजी प्रोफेशनल्स के लिए NALSAR हैदराबाद और NLSIU बेंगलुरु जैसे शीर्ष संस्थान ऑनलाइन और डिस्टेंस मोड में ये डिप्लोमा कोर्सेज ऑफर करते हैं.

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कोर्ट रूम से ज्यादा कॉर्पोरेट बोर्डरूम 
एक टेक्नो-लीगल प्रोफेशनल का काम केवल मुकदमों तक सीमित नहीं है. आज की तारीख में गूगल, मेटा, टेक महिंद्रा जैसी बड़ी टेक कंपनियों से लेकर हर छोटे-बड़े फिनटेक स्टार्टअप्स को इन एक्सपर्ट्स की जरूरत है.

करियर प्रोफाइल्स: डेटा प्रोटेक्शन ऑफिसर (DPO), एआई एथिक्स कंसलटेंट, साइबर पॉलिसी एडवाइजर और लीगल टेक आर्किटेक्ट. इस फील्ड में शुरुआती पैकेज ही आम वकीलों की तुलना में काफी ज्यादा (सालाना 8 से 12 लाख रुपये) होता है, जो थोड़े से अनुभव के बाद कॉर्पोरेट सेक्टर्स में 25 से 40 लाख रुपये तक आसानी से पहुंच जाता है.

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