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13 साल एक ही कंपनी को दिए, पर AI ने छीन ली नौकरी... जान‍िए चेन्नई के इस शख्स ने फिर क्या किया?

चेन्नई के 36 वर्षीय इंजीनियर को 13 साल की सेवा के बाद AI के बढ़ते प्रभाव के कारण नौकरी से निकाला गया. उन्होंने मैनुअल टेस्टिंग पर निर्भरता के कारण अपडेट न होने की वजह से छंटनी का सामना किया. सोशल मीडिया पर उनकी कहानी वायरल हुई, जिसमें एक्सपर्ट्स ने करियर बचाने के लिए कई जरूरी टिप्स दिए जो ऐसे हालातों से जूझ रहे किसी भी प्रोफेशनल

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चेन्नई के शख्स का 'एक्शन प्लान' सोशल मीडिया पर वायरल (Representative pic from Getty)
चेन्नई के शख्स का 'एक्शन प्लान' सोशल मीडिया पर वायरल (Representative pic from Getty)

क्या आपको लगता है कि एक ही कंपनी में 13 साल बिताने के बाद आपकी कुर्सी 'परमानेंट' हो गई है? अगर हांं,  तो चेन्नई के 36 वर्षीय इंजीनियर की ये कहानी आपकी नींद उड़ा सकती है. जिस कंपनी को उन्होंने अपनी जवानी के सबसे शानदार साल दिए, वहीं से एक सुबह उन्हें 'पिंक स्लिप' (छंटनी का नोटिस) थमा दिया गया.

इसके पीछे की असल वजह सामने आई AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस). वो उसमें अपडेट नहीं थे. लेकिन ये कहानी सिर्फ नौकरी जाने की नहीं है, बल्कि उस 'एक्शन प्लान' की है जो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है. अगर आपकी भी नौकरी पर खतरा है या आप करियर के चौराहे पर हैं, तो दुनिया भर के एक्सपर्ट्स की उनको मिली सलाह आपके बड़े काम आ सकती है.

सोशल मीड‍िया पर शेयर की स्टोरी

चेन्नई का ये शख्स QA (क्वालिटी एश्योरेंस) प्रोफेशनल है. 13 साल तक उन्होंने सिर्फ मैनुअल टेस्ट‍िंंग और SQL के भरोसे अपनी नैया पार लगाई. उन्होंने कभी सैलरी बढ़ाने की जिद नहीं की, न ही कभी ऑफिस पॉलिटिक्स में पड़े. लेकिन जब AI और ऑटोमेशन की लहर आई, तो कंपनी को 'वफादारी' से ज्यादा 'एडवांस स्किल्स' की जरूरत महसूस हुई. इसी वजह से उन्हें जवाब गंवानी पड़ी. 

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इस इंजीनियर ने जब अपनी दास्तां सोशल मीडिया पर शेयर की, तो लोगों ने सहानुभूति के बजाय उन्हें 'मैदान' में उतरने के वो तरीके बताए जो किसी भी करियर कोच की फीस से ज्यादा कीमती हैं:

1. शोक मनाना बंद करें, 'री-स्किलिंग' शुरू करें

लोगों ने साफ कहा कि आपका 13 साल का अनुभव कचरा नहीं है, बस उसे 'री-पैकेजिंग' की जरूरत है. अगर आप मैनुअल पर हैं, तो तुरंत से‍लेनियम, ऑटोमेशन या AI टूल्स सीखें. इसे एक 'फुल-टाइम जॉब' की तरह लें. सुबह 9 से शाम 6 बजे तक सिर्फ नई स्किल पर काम करें.

2. ईगो छोड़ें और 'रिलोकेट' होने को तैयार रहें
चेन्नई में काम नहीं मिल रहा? तो बेंगलुरु, हैदराबाद या पुणे भागिए. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि 13 साल के अनुभव वाले बंदे को कंपनियां हाथों-हाथ लेंगी, बशर्ते वह अपने शहर के मोह से बाहर निकले.

3. नेटवर्किंग: पुराने साथियों को फोन घुमाएं
मंदी के दौर में रिज्यूमे सिर्फ डस्टबिन की शोभा बढ़ाते हैं. असली काम आती है 'नेटवर्किंग'. अपने उन दोस्तों को ढूंढें जो अब दूसरी कंपनियों में बड़े पदों पर हैं. एक 'रेफरल' आपको 100 इंटरव्यू से बचा सकता है.

4. इमोशनल ब्रेकडाउन से बचें
नौकरी जाना सिर्फ आर्थिक नहीं, मानसिक चोट भी है. सलाह दी गई है कि तुरंत नई नौकरी की हड़बड़ी में गलत फैसला न लें. कुछ दिन खुद को दें, दिमाग शांत करें और फिर ठंडे दिमाग से स्ट्रैटेजी बनाएं.

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5. अपनी 'वैल्यू' पहचानें
लोगों ने याद दिलाया कि 13 साल तक एक ही जगह टिके रहना आपकी स्टेबिलिटी को दर्शाता है. कंपनियां ऐसे भरोसेमंद लोग ढूंढती हैं. बस अपनी पुरानी नॉलेज को नई टेक्नोलॉजी के साथ मिक्स कर दें, आप अनस्टॉपेबल हो जाएंगे.

क्या ल‍िया फैसला
इस शख्स ने बताया कि अभी वो भीतर से टूटे नहीं है. उन्होंने फैसला किया है कि वह अपने जागने का हर एक मिनट नई स्किल सीखने में लगाएंगे. वह अब खुद को 'फ्यूचर रेडी' बना रहे हैं.

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