scorecardresearch
 

फिर जिंदा होंगी 'सिटी ऑफ गन्स' फैक्ट्रियां... बिहार के बारूद से हिल जाएगा दुश्मन

बिहार डिफेंस कॉरिडोर से मुंगेर की 250 साल पुरानी बंदूक फैक्टरियों को नई जिंदगी मिलने वाली है. हजारों कुशल रोजगार पैदा होंगे. पलायन रुकेगा और अवैध हथियार कारोबार कम होगा. स्वदेशी रक्षा उत्पादन बढ़ेगा. आयात घटेगा और 2029 तक 3 लाख करोड़ का लक्ष्य हासिल होगा.

Advertisement
X
बिहार डिफेंस कॉरिडोर से राज्य के कई जिले देश की सुरक्षा में मदद करेंगे. (Photo: ITG)
बिहार डिफेंस कॉरिडोर से राज्य के कई जिले देश की सुरक्षा में मदद करेंगे. (Photo: ITG)

बिहार में प्रस्तावित डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (Defence Industrial Corridor) से राज्य का ऐतिहासिक हथियार बनाने वाले केंद्र मुंगेर को नई ऊर्जा मिलने वाली है. लगभग 250 साल पुरानी मुंगेर की बंदूक फैक्टरियां, जो कभी नागरिक हथियारों का प्रमुख उत्पादन केंद्र थीं. अब आधुनिक रक्षा उपकरण बनाने में शामिल होंगी.

यह कॉरिडोर भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगा, रोजगार पैदा करेगा और आयात पर निर्भरता कम करेगा. हाल ही में बिहार कैबिनेट ने डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर पार्क और अन्य टेक हब को मंजूरी दी है.

मुंगेर की बंदूक फैक्टरियों का इतिहास

मुंगेर को 'सिटी ऑफ गन्स' कहा जाता है. यहां हथियार बनाने की परंपरा 250 साल पुरानी है...

स्थापना: 1762 में ब्रिटिश काल में मुंगेर में बंदूक और तोप बनाने की फैक्टरियां शुरू हुईं. नवाब मीर कासिम ने यहां आर्सेनल (हथियार गोदाम) बनवाया था.

स्वतंत्रता के बाद: 1947 के बाद भारत सरकार ने 36-37 निजी यूनिट्स को लाइसेंस दिए. 1962 के भारत-चीन युद्ध में मुंगेर की फैक्टरियों ने .410 बोर मस्केट बंदूकें और गोले सप्लाई किए.

यह भी पढ़ें: रूस का हाइपरसोनिक मिसाइल से यूक्रेन पर हमला... पुतिन के घर पर ड्रोन अटैक का बदला

Advertisement

चरम पर: एक समय में करीब 1500 परिवारों को रोजगार मिलता था. ये फैक्टरियां सिंगल और डबल बैरल बंदूकें बनाती थीं.

पतन के कारण: सख्त हथियार लाइसेंसिंग नियमों, अवैध हथियारों के उदय और प्रतिस्पर्धा से कानूनी उत्पादन घट गया. अब सिर्फ 37 निजी यूनिट्स BIADA (Bihar Industrial Area Development Authority) की जमीन पर चल रही हैं. कई कुशल कारीगर पलायन कर गए या रिक्शा चलाने लगे. अवैध हथियारों की वजह से मुंगेर की छवि खराब हुई, लेकिन कुशल कारीगरों की स्किल अभी भी बरकरार है.

City of Guns Bihar Defence Corridor

बिहार डिफेंस कॉरिडोर क्या है और क्या प्लान है?

भारत सरकार ने पहले उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाए हैं. अब बिहार में नया कॉरिडोर बनने जा रहा है, जो मुंगेर को मुख्य केंद्र बनाएगा...

बिहार कैबिनेट की मंजूरी: हाल ही में (जनवरी 2026 से पहले) बिहार सरकार ने डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, मेगा टेक सिटी और फिनटेक सिटी को मंजूरी दी. उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मुंगेर की बंदूक फैक्टरियां इस कॉरिडोर के तहत अपग्रेड और रिवाइव होंगी.

उत्पादन: पारंपरिक बंदूकें बनाने वाली यूनिट्स अब आधुनिक रक्षा उपकरण बनाएंगी, जैसे...

  • गोला-बारूद (Ammunition)
  • ऑटोमैटिक हथियार (Automatic weapons, AK-47 जैसी मशीन गन)
  • प्रोटेक्टिव गियर (Bulletproof jackets, helmets, body armour)
  • अन्य सिस्टम (Night vision devices, explosives, rocket launchers आदि)

यह भी पढ़ें: एक बीमार के चक्कर में लौटेंगे चार अंतरिक्षयात्री, स्पेस स्टेशन के इतिहास में पहली बार

Advertisement

शुरुआत में मुंगेर पर फोकस, लेकिन कैमूर, बांका, जमुई और अरवल जैसे 5 जिलों में फैलाव का प्लान. केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम करेंगी. जमीन फाइनल होने के बाद काम जल्द शुरू होगा. बड़े प्लांट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर 2026 में शुरू हो सकते हैं. फैक्टरियां और सुविधाएं 2028-2030 तक ऑपरेशनल हो जाएंगी.

यह कॉरिडोर भारत के मौजूदा दो डिफेंस कॉरिडोर (UP और TN) से जुड़ेगा, जहां पहले से उत्पादन चल रहा है.

City of Guns Bihar Defence Corridor

बिहार डिफेंस कॉरिडोर और मुंगेर के रिवाइवल से कई बड़े फायदे होंगे. सबसे पहले, इससे हजारों नए और कुशल रोजगार सृजित होंगे. मुंगेर की पुरानी बंदूक फैक्टरियों में काम करने वाले 1500 परिवारों की स्किल्स का फिर से इस्तेमाल होगा, जिससे युवाओं का पलायन रुकेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा.

दूसरा, यह स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत करेगा. रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम होगी. भारत का लक्ष्य 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन हासिल करने में मदद मिलेगी. मुंगेर की यूनिट्स अब गोला-बारूद, ऑटोमैटिक हथियार, प्रोटेक्टिव गियर और अन्य मिलिट्री सिस्टम बनाने लगेंगी.

तीसरा, अवैध हथियारों का कारोबार कम होगा. जब कानूनी और आधुनिक उत्पादन बढ़ेगा, तो अवैध फैक्टरियां स्वाभाविक रूप से कम होंगी और क्षेत्र की छवि भी सुधरेगी.

चौथा, आर्थिक विकास को तेजी मिलेगी. बड़े निवेश आएंगे, रक्षा उपकरणों का निर्यात बढ़ेगा. इससे राज्य में औद्योगिक विकास का नया दौर शुरू होगा.

Advertisement

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर में फेल फाइटर जेट अब सऊदी अरब को देगा, बातचीत जारी

अंत में, यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. कुल मिलाकर, यह कॉरिडोर मुंगेर को पुराना सम्मान लौटाएगा. बिहार को राष्ट्रीय सुरक्षा में नया योगदान देने वाला राज्य बनाएगा.

चुनौतियां और भविष्य

  • चुनौतियां: लाइसेंसिंग, सुरक्षा नियम, निवेश आकर्षित करना और अवैध हथियारों की समस्या का समाधान.
  • भविष्य: अगर सफल रहा तो मुंगेर फिर से हथियार हब बनेगा. अब अवैध नहीं – बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए  बिहार अब कट्टे और लालटेन का युग पीछे छोड़ उन्नत हथियार बनाने की ओर बढ़ रहा है. आने वाले सालों में मुंगेर की फैक्टरियां फिर से गूंजेंगी.
---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement