अमेरिका बचाने नहीं आया तो चीनी हमले से खुद को कैसे बचा पाएगा ये देश? जानिए ताकत
ताइवान की सेना में 1.7 लाख सक्रिय और 16.6 लाख रिजर्व सैनिक हैं. हथियारों में F-16 विमान, पैट्रियट मिसाइल, टैंक, सबमरीन है. चीन के मुकाबले संख्या में बहुत कम लेकिन अमेरिकी हथियार और रणनीति से लंबा मुकाबला कर सकता है. चीन को हमला महंगा पड़ सकता है.
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ताइवान के सैनिक एक युद्धाभ्यास के दौरान अपने एंफिबियर असॉल्ट व्हीकल के साथ. (File Photo: Getty)
ताइवान और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. चीन ताइवान पर हमला करने की धमकी देता रहता है. ऐसे में ताइवान की सेना की ताकत, उसके हथियार और चीन की विशाल पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) से तुलना समझना जरूरी है. 2025-2026 के आंकड़े ग्लोबल फायरपावर और अमेरिकी रिपोर्ट्स से लिए गए हैं.
ताइवान पोर्क्युपाइन रणनीति अपनाता है – मतलब कांटेदार साही की तरह, हमला करना मुश्किल. अमेरिका से हथियार मिलते हैं. 2026 में रक्षा बजट GDP का 3% से ज्यादा.
संख्या और आकार: चीन बहुत आगे – सैनिक, टैंक, विमान, जहाज सबमें गुना ज्यादा.
तकनीक: ताइवान के हथियार अमेरिकी, अच्छी क्वालिटी. लेकिन चीन तेजी से मॉडर्न हो रहा.
रणनीति: ताइवान द्वीप है, समुद्र और पहाड़ बचाव में मदद. छोटे हथियारों से बड़ा नुकसान पर फोकस. रिजर्व फोर्स ज्यादा.
कमजोरी: ताइवान छोटा, चीन नाकाबंदी कर सकता है. लेकिन अमेरिका की मदद बड़ी ताकत.
विशेषज्ञ कहते हैं
चीन हमला करे तो जीत सकता है, लेकिन बहुत महंगा – हजारों सैनिक खोएगा. ताइवान लंबा युद्ध खींचकर अमेरिकी मदद बुला सकता है. ताइवान सेना मजबूत कर रहा है – कंसक्रिप्शन बढ़ाई, ट्रेनिंग सुधारी.