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स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट को भी मार गिराने की ताकत, चीन ने बनाया 100GW 'माइक्रोवेव वेपन'

चीन ने पहली बार अपने हाई-पावर माइक्रोवेव (HPM) हथियारों की ताकत दुनिया के सामने रखी है. दावा है कि यह सिस्टम 100 गीगावॉट तक की ऊर्जा छोड़ सकता है और जरूरत पड़ने पर लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को निष्क्रिय कर सकता है.

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चीन का माइक्रोवेव वेपन. (Photo- ITG)
चीन का माइक्रोवेव वेपन. (Photo- ITG)

चीन ने अपनी नई पीढ़ी के हाई-पावर माइक्रोवेव (High Power Microwave-HPM) हथियारों का खुलासा कर दुनिया को चौंका दिया है. चीन के रक्षा वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह हथियार 100 गीगावॉट (GW) तक की माइक्रोवेव ऊर्जा पैदा कर सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य की इलेक्ट्रॉनिक और अंतरिक्ष आधारित जंग का स्वरूप बदल सकती है.

यह जानकारी चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (NUDT) के वैज्ञानिकों ने इस महीने प्रकाशित रिसर्च पेपर में दी है. यह पहली बार है जब चीन की सेना ने सार्वजनिक रूप से अपने हाई-पावर माइक्रोवेव हथियार कार्यक्रम की इतनी विस्तृत जानकारी साझा की है.

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वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में चीन ने पल्स्ड-पावर तकनीक में तेजी से प्रगति की है और अब इस क्षेत्र में वह दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है. चीन का कहना है कि उसने इसकी टेस्टिंग भी कर ली है.

100 गीगावॉट क्षमता वाला माइक्रोवेव हथियार

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने कई गीगावॉट क्षमता वाले माइक्रोवेव हथियार विकसित किए हैं और इनमें से कुछ सिस्टम सेना को भी सौंपे जा चुके हैं. सबसे शक्तिशाली सिस्टम 100 गीगावॉट क्षमता वाला है, जिसमें कई हाई-पावर पल्स जनरेटर एक साथ काम करते हैं और बेहद शक्तिशाली माइक्रोवेव बीम तैयार करते हैं.

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक का इस्तेमाल एंटी-सैटेलाइट हथियार के रूप में किया गया तो यह लो-अर्थ ऑर्बिट में मौजूद महंगे सैटेलाइट नेटवर्क, जैसे स्टारलिंक, के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. आम तौर पर माना जाता है कि 1 गीगावॉट की माइक्रोवेव पल्स भी सैटेलाइट के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में गंभीर खराबी पैदा कर सकती है. ऐसे में 100 गीगावॉट क्षमता वाला सिस्टम कहीं ज्यादा विनाशकारी साबित हो सकता है.

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लिथियम-आयन कैपेसिटर हाइब्रिड सिस्टम

रिसर्च में यह भी बताया गया है कि चीन ने एक नया लिथियम-आयन कैपेसिटर हाइब्रिड सिस्टम विकसित किया है, जो माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी तुरंत सक्रिय होकर लगातार ऊर्जा उपलब्ध करा सकता है. इससे बर्फीले और ध्रुवीय इलाकों में भी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता मजबूत होगी. चीन का कहना है कि भविष्य में इस तकनीक को और छोटा, सस्ता और अधिक सटीक बनाया जाएगा, ताकि इसे अलग-अलग सैन्य प्लेटफॉर्म पर आसानी से तैनात किया जा सके.

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