भारतीय सेना ने अपनी पैदल सेना (इन्फैंट्री) को और मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. सेना ने 450 कार्ल गुस्ताफ Mk IV मल्टी-रोल रॉकेट लॉन्चर खरीदने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी कर दिया है. यह खरीद 'बाय इंडियन' कैटेगरी के तहत हो रही है यानी ज्यादातर हिस्सा भारत में बनेगा. Photo: SAAB
यह कदम पुरानी शोल्डर-फायर्ड हथियार प्रणालियों को आधुनिक, हल्के और ज्यादा प्रभावी सिस्टम से बदलने का हिस्सा है. विविध इलाकों जैसे ऊंचे पहाड़ों, रेगिस्तान, जंगलों और शहरी क्षेत्रों में लड़ने के लिए यह हथियार बहुत उपयोगी साबित होगा. Photo: SAAB
कार्ल गुस्ताफ Mk IV साब कंपनी का 84 मिमी रिकॉइललेस हथियार का लेटेस्ट वर्जन है. इसका वजन सिर्फ 6.6 से 7 किलोग्राम (साइट्स और एक्सेसरीज को छोड़कर) है, जो पुराने वर्जन से काफी हल्का है. इससे सैनिक इसे आसानी से उठाकर ले जा सकते हैं और लंबे समय तक लड़ाई में इस्तेमाल कर सकते हैं. Photo: SAAB
Mk III की तुलना में Mk IV ज्यादा एर्गोनॉमिक, कम थकान देने वाला और आधुनिक साइटिंग सिस्टम के साथ जुड़ने वाला है. यह कोई सिर्फ एंटी-टैंक हथियार नहीं है, बल्कि सच्चा मल्टी-रोल सिस्टम है. अलग-अलग गोला-बारूद से यह बख्तरबंद गाड़ियों, बंकरों, किलेबंदी, इमारतों, दुश्मन के फायरिंग पॉइंट्स और सैनिकों के समूह को निशाना बना सकता है. साथ ही धुआं और रोशनी फैलाने वाले राउंड भी दाग सकता है. Photo: SAAB
सेना की RFP में साफ कहा गया है कि नया लॉन्चर पुराने Mk III जितना सटीक और भरोसेमंद होना चाहिए. बैरल की उम्र कम से कम 1500 राउंड या 15 साल होनी चाहिए. यह -20°C से +50°C तक के तापमान, धूल, नमी और भारत की अलग-अलग जलवायु में बिना किसी समस्या के काम करे. Photo: SAAB
आधुनिक डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम, रेड-डॉट साइट और पिकाटिनी रेल्स लगाने की सुविधा होनी चाहिए, ताकि सैनिक तेजी से निशाना लगा सकें और पहली गोली में ही दुश्मन को मार सकें. डिजिटल शॉट काउंटर, बेहतर शोल्डर सपोर्ट और आसान रखरखाव की सुविधाएं सैनिकों की थकान कम करेंगी. Photo: SAAB
खास बात यह है कि यह मौजूदा 84 मिमी गोला-बारूद के साथ पूरी तरह संगत होगा, जिससे लॉजिस्टिक्स आसान रहेगा और भविष्य में अपग्रेड भी संभव होगा. यह खरीद सिर्फ हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है. RFP में लॉन्चर, एक्सेसरीज, स्पेयर पार्ट्स, ट्रेनिंग, तकनीकी दस्तावेज और रखरखाव की पूरी व्यवस्था शामिल है. Photo: SAAB
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि ये लॉन्चर भारत में बनेगे. साब कंपनी हरियाणा के झज्जर में अपना प्लांट स्थापित कर रही है, जो स्वीडन के बाहर कार्ल गुस्ताफ सिस्टम का पहला उत्पादन केंद्र होगा. यहां लॉन्चर और मुख्य कंपोनेंट्स बनाए जाएंगे. इससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और लंबे समय तक निर्भरता कम होगी. Photo: SAAB
भारतीय सेना की पैदल टुकड़ियां देश की सबसे बड़ी ताकत हैं. वे सीमा पर हर तरह के इलाके में तैनात रहती हैं. पुराने हथियार भारी और कम प्रभावी हो चुके थे. Mk IV हल्का होने से सैनिकों की गतिशीलता बढ़ेगी, खासकर सियाचिन जैसे हाई-ऑल्टीट्यूड इलाकों में. बहु-उद्देशीय क्षमता से एक ही हथियार कई काम कर सकेगा, जिससे लॉजिस्टिक बोझ कम होगा. Photo: SAAB
बेहतर साइटिंग सिस्टम से सटीकता बढ़ेगी और दुश्मन पर पहला हमला ही निर्णायक साबित हो सकता है. शहरी लड़ाई, आतंकवाद विरोधी अभियान और पारंपरिक युद्ध – हर स्थिति में यह उपयोगी होगा. कुल मिलाकर सेना की फायरपावर क्षमता मजबूत होगी. Photo: SAAB
यह सौदा न सिर्फ सैन्य रूप से बल्कि आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है. विदेशी निर्भरता घटेगी, भारतीय उद्योग को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मिलेगा और रोजगार बढ़ेगा. झज्जर प्लांट से निर्यात की भी संभावना है. क्षेत्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखें तो चीन और पाकिस्तान जैसी चुनौतियों के बीच सेना को आधुनिक हथियारों की जरूरत थी. Photo: SAAB
Mk IV जैसे सिस्टम दुश्मन के बंकर और हल्के बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ प्रभावी साबित होंगे. साथ ही, भविष्य में नए प्रकार के गोला-बारूद जोड़ने की गुंजाइश रहेगी, जो हथियार को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाएगी. खरीद प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन समय पर डिलीवरी, गुणवत्ता नियंत्रण और ट्रेनिंग सुनिश्चित करना चुनौती रहेगी. Photo: Wiki
सैनिकों को नए सिस्टम की ट्रेनिंग देनी होगी. साथ ही, रखरखाव इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना पड़ेगा. भविष्य में और ज्यादा संख्या में खरीद और स्वदेशी गोला-बारूद विकसित करने की जरूरत है. यह कदम भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगा. अगर सफल रहा तो इसी मॉडल पर अन्य हथियार सिस्टम भी स्वदेशी बनाए जा सकते हैं. Photo: Wiki
450 कार्ल गुस्ताफ Mk IV लॉन्चर की खरीद भारतीय सेना के आधुनिकिकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह हल्के, सटीक और बहु-उद्देशीय हथियार पैदल सैनिकों को नई ताकत देंगे. मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी उत्पादन से न सिर्फ सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचेगा. Photo: Wiki