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Kathua: कठुआ गैंगरेप केस का वह इकलौता आरोपी जिसे कोर्ट ने बरी कर दिया

विशाल ने इस मामले में कोर्ट के सामने कहा था कि वो घटना के दिन वहां मौजूद ही नहीं था. अपनी बात को साबित करने के लिए विशाल ने अदालत में सबूत और गवाह भी पेश किए थे. उसी का फायदा उसे मिला है.

इस मामले में दोषियों को सजा-ए-मौत भी हो सकती है (सांकेतिक चित्र) इस मामले में दोषियों को सजा-ए-मौत भी हो सकती है (सांकेतिक चित्र)

कठुआ गैंगरेप एवं मर्डर केस में पठानकोट अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए 6 आरोपियो को तो दोषी करार दिया है, लेकिन आरोपी विशाल जंगोत्रा को बरी कर दिया है. विशाल ने इस मामले में कोर्ट के सामने कहा था कि वो घटना के दिन वहां मौजूद ही नहीं था. अपनी बात को साबित करने के लिए विशाल ने अदालत में सबूत और गवाह भी पेश किए थे. उसी का फायदा उसे मिला है.

हालांकि जब इस मामले में छानबीन शुरू की गई थी. तो विशाल पर जांचकर्ताओं को गुमराह करने का शक भी था. जांच टीम को पता चला था कि मेरठ में एग्जाम अटेंडेंस रजिस्टर में विशाल के फर्जी हस्ताक्षर थे. जम्मू कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच के मुताबिक पहले फॉरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि आरोपी ने मेरठ में जिस एग्जाम में शामिल होने का दावा किया है, वहां अटेंडेंस रजिस्टर में किए गए हस्ताक्षर आरोपी के हस्ताक्षर से मेल नहीं खा रहे थे.

दरअसल, आरोपी विशाल जंगोत्रा ने दावा किया था कि जिस दिन जम्मू के कठुआ में बच्ची के साथ गैंगरेप की घटना हुई, उस दिन वह मेरठ में एग्जाम दे रहा था. हालांकि क्राइम ब्रांच का कहना था कि जंगोत्रा मेरठ में 15 जनवरी को परीक्षा में देने नहीं गया था. आरोप-पत्र के मुताबिक घटना के दिन वह कठुआ के रासना गांव में मौजूद था.

बाद में इस मामले में आरोपी विशाल के तीन दोस्तों को जम्मू में जांचकर्ताओं के समक्ष बुलाया गया था. जांचकर्ताओं ने यह भी शक था कि आरोपी जानबूझकर एटीएम गया था और अपनी उपस्थिति दिखाने के लिए कैमरे की तरफ देख रहा था.

बताते चलें कि कठुआ दुष्कर्म मामले में सात लोगों को आरोपी बनाया गया था. जिनमें विशाल जंगोत्रा के अलावा चचेरा भाई, विशाल का एक स्थानीय मित्र, दो विशेष पुलिस अधिकारी (SPO), एक हेड कांस्टेबल और जम्मू एवं कश्मीर पुलिस का एक उपनिरीक्षक शामिल था.

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