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दबंगों की दुनियाः कभी छोटा राजन का खास शूटर था यूपी का ये माफिया, अब प्रयागराज में करता है सियासत

ये शातिर अपराधी प्रयागराज के धूमनगंज थाना इलाके का रहने वाला है. निहाल के खिलाफ 2 दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं. यूपी पुलिस के मुताबिक, वो डी-46 गैंग का सरगना है. हालांकि वो इस बात से इनकार करता है.

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बच्चा पासी का नाम मुंबई के काला घोड़ा कांड की वजह से सुर्खियों में आया था
बच्चा पासी का नाम मुंबई के काला घोड़ा कांड की वजह से सुर्खियों में आया था

Mafia Nihal Kumar alias Bacha Pasi: उत्तर प्रदेश सरकार ने अपराधियों पर लगाम कसने के मकसद से इस साल जिन माफियाओं की लिस्ट जारी की, उसमें एक से बढ़कर एक माफिया अपराधी शामिल है. जो या तो जेल में बंद हैं या फिर वो पुलिस से डरकर फरार चल रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है. इस माफिया लिस्ट से हम कई कुख्यात अपराधियों के बारे में आपको बता चुके हैं. इसी सूची में एक ऐसे अपराधी का नाम भी शामिल है, जो अतीक अहमद गैंग की तरह प्रयागराज पुलिस के लिए परेशानी का सबब रहा है. आज हम बात करेंगे माफिया गैंगस्टर निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी की. 

कौन है निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी?
ये शातिर अपराधी प्रयागराज के धूमनगंज थाना इलाके का रहने वाला है. ये वही थाना क्षेत्र है, जहां अतीक के गुर्गों ने उमेश पाल हत्याकांड को सरेआम अंजाम दिया था. निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी के खिलाफ 2 दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं. यूपी पुलिस के मुताबिक, वो डी-46 गैंग का सरगना है. उसके इस गैंग में एक दर्जन से ज्यादा बदमाश शामिल हैं. हालांकि खुद को इस गैंग का सरगना बताए जाने के खिलाफ निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी ने हाई कोर्ट में एक याचिका भी लगाई है. जिसके मुताबिक वो अधिकतर मामलों में बरी हो चुका है. बाकी बचे मामले अदालत में लंबित हैं.   

बच्चा पासी के मकान पर चला था योगी का बुलडोजर
सूत्रों के मुताबिक, निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी ने जुर्म की दुनिया से निकलकर सियासत में कदम रखा था. ताकि उसके काले कारनामे छुप सकें. वो सुलेम सराय इलाके से दो बार निगम पार्षद रह चुका है. योगी सरकार जब माफिया गैंगस्टरों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन ले रही थी. उसी दौरान निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी का आलीशान मकान भी बुलडोजर से ढहा दिया गया था. इल्जाम था कि उसका मकान बिना नक़्शा पास कराए बनाया गया था.

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साल 2001
यही वो साल था जब निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी ने जुर्म की दुनिया में कदम रखा था. उसके खिलाफ पहला मामला हत्या, अपहरण, वसूली या रंगदारी का नहीं था, बल्कि शराब की तस्करी का था. जो उसी साल दर्ज हुआ था. इसके ठीक बाद उसके खिलाफ ड्रग्स तस्करी का इल्जाम लगा था. 

साल 2003
उसे जरायम की दुनिया में भले ही केवल दो साल हुए थे, लेकिन इलाहाबाद में उसके नाम की तूती बोलने लगी थी. यही वो साल था, जब निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी के खिलाफ पुलिस ने सिविल लाइन इलाके में लूट और डकैती करने का मामला दर्ज किया था. 

साल 2006
उसकी करतूतों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही थी. इसी दौरान उसे अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन ने अपनी पनाह में ले लिया. इसके बाद तो जैसे निहाल कुमार को जबरदस्त ताकत मिल गई थी. उसे हथियार चलाने की अच्छी समझ थी. इसी वजह से उसे छोटा राजन ने अपना खास शूटर बना लिया था. यही वो साल था, जब जुर्म की दुनिया में बच्चा पासी का नाम और बड़ा हुआ. दरअसल, उसी साल मुंबई में काला घोड़ा शूटआउट हुआ था. जिसमें बच्चा पासी भी शामिल था. उसके साथ जफर सुपारी, राजेश यादव और खान मुबारक का नाम भी इस कांड में आरोपी थे. बच्चा पासी इस मामले में पकड़ा गया था लेकिन कुछ समय बाद वो मुंबई की जेल रिहा होकर बाहर आ गया था. इसी काला घोड़ा कांड ने उसे बच्चा भाई के नाम से कुख्यात कर दिया था. 

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साल 2007
निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी की पहचान अब एक कुख्यात माफिया डॉन के तौर पर स्थापित हो चुकी थी. उसका खौफ मुंबई से निकलकर इलाहाबाद तक पहुंच चुका था. उसी दौरान इलाहाबाद में एक बड़ी लूट और हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था. जिसमें नाम आया था बच्चा पासी का. इस वारदात के ठीक बाद निहाल समझ चुका था कि अब उसे सियासी संरक्षण की ज़रूरत होगी. लिहाजा, उसने बसपा ने नगर निगम का चुनाव लड़ा और वो खुद इलाहाबाद के वॉर्ड नंबर 2 से पार्षद बन गया. 

साल 2012
अब निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी खुद को एक नेता के तौर पर स्थापित करने की जुगत में लगा था. वो सियासत के गुर तेजी से सीख रहा था. इसी का नतीजा था कि वो राजनीतिक तौर पर और मजबूत होना चाहता था, लिहाजा, उसने अपनी पत्नी रजिता को भी चुनाव मैदान में उतार दिया. बच्चा पासी का खौफ कहें या उसकी किस्मत कि उसकी पत्नी भी चुनाव जीती और पार्षद बन गई.

साल 2017
शुरू में भले ही निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी को राजनीति का तजुर्बा नहीं था, लेकिन उसके निगम पार्षद बन जाने के बाद उसे नेतागिरी समझ आने लगी थी. पत्नी को नेता बनाने के बाद एक बार फिर उसने 2017 में अपनी किस्मत निकाय चुनाव में आजमाई और वो एक बार फिर से चुनाव जीतकर पार्षद बन गया था. बताया जाता है कि पिछले कई वर्षों से उस वार्ड में पार्षद के तौर बच्चा पासी या उसकी पत्नी या बहन ही काबिज है.

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वर्तमान में निहाल कुमार उर्फ बच्चा पासी राजनीति में सक्रीय है. इस बार वो खुद पार्षद नहीं है, लेकिन उसकी बहन रीना वार्ड नं 2 सुलेमसराय से बीजेपी की निर्वाचित पार्षद है. अब भले ही बच्चा पासी का नाम यूपी पुलिस के माफियाओं वाली लिस्ट में हो, लेकिन फिलहाल वो प्रयागराज में दबंगई के साथ रहता है.

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