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हाथरस कांड का एक सालः पीड़ित परिवार को मिली CRPF की सुरक्षा, मगर अब भी इंसाफ का इंतजार

हाथरस की हैवानियत के एक साल बाद भी पीड़िता का परिवार बंदूकों के साये में जी रहा है. पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर उनकी सुरक्षा हटेगी तो वे लोग गांव छोड़ देंगे. अब उनके घर में ना तो नेता आते हैं ना अफसर.

पीड़ित परिवार अभी भी डर डर कर जीने को मजबूर है (फाइल फोटो) पीड़ित परिवार अभी भी डर डर कर जीने को मजबूर है (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 14 सितंबर 2020 को हुई थी युवती के साथ दरिंदगी
  • 29 सितंबर 2020 को पीड़िता ने ली थी आखरी सांस
  • हाथरस की 'निर्भया' को लेकर हुआ था सियासी बवाल

पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड का एक साल पूरा हो गया है. लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को इंसाफ की दरकार है. पीड़िता का परिवार सरकार के वादों के पूरा नहीं होने खफा है. पीडि़ता के परिजनों की मानें तो सरकार ने उन्हें आर्थिक मदद के अलावा मकान और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया था. लेकिन अभी तक उन्हें मकान और नौकरी में से कुछ भी नहीं मिला है.

हाथरस के बूलगढ़ी गांव में रहने वाला पीड़िता का परिवार सरकारी वादा पूरा नहीं होने की वजह से भले ही नाराज है, लेकिन सीआरपीएफ के जवानों की सुरक्षा मिलने से वो परिवार अपने आप को सुरक्षित ज़रूर महसूस कर रहा है. इस मामले को लेकर लगातार सिसायत भी होती रही है. विपक्षी दल और नेता लगातार सरकार पर हमले करते रहे हैं.

दरअसल, हाथरस की हैवानियत के एक साल बाद भी पीड़िता का परिवार बंदूकों के साये में जी रहा है. पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर उनकी सुरक्षा हटेगी तो वे लोग गांव छोड़ देंगे. अब उनके घर में ना तो नेता आते हैं ना अफसर. 

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उधर, हाथरस की घटना में आरोपियों के परिवार वाले भी शिकायती अंदाज़ में ही बात करते हैं. आरोपियों के परिवार वाले अब भी अपने बच्चों को गलत मानने से इनकार कर रहे हैं. राजनेता भी इस मामले के सहारे यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाना नहीं भूले.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक ट्वीट करते हुए लिखा कि आज से एक साल पहले हाथरस में बलात्कार की भयावह घटना घटी थी और उप्र सरकार ने परिवार को न्याय व सुरक्षा देने की बजाय धमकियां दीं थीं और उनसे बेटी के ससम्मान अंतिम संस्कार का हक भी छीन लिया था. महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर इतना खराब रुख रखने वाली सरकार के मुखिया से आप संवेदनशीलता की आस रख भी कैसे सकते हैं? वैसे भी यूपी के मुख्यमंत्री महिला विरोधी सोच के अगुआ हैं. वो कह चुके हैं कि "महिलाओं को स्वतंत्र नहीं होना चाहिए." महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर इतना खराब रुख रखने वाली सरकार के मुखिया से आप संवेदनशीलता की आस रख भी कैसे सकते हैं? 

14 सितंबर की खौफनाक वारदात

आपको बता दें कि 14 सितंबर 2020 को हाथरस के एक बूलगढ़ी गांव में  एक दलित युवती के साथ दरिंदगी की गई थी और उसे जान से मारने की कोशिश हुई थी. इलाज के दौरान युवती ने 29 सितंबर 2020 को दम तोड़ दिया था. इस मामले के गांव के चारों आरोपी युवक अलीगढ़ जेल में है. सीबीआई ने मामले की जांच कर चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी है. चार्जशीट पर हाथरस जिला न्यायालय में सुनवाई चल रही है. केस की अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तिथि तय है. उधर, बचाव पक्ष केस को लेकर मीडिया से बेहद नाराज है. उनकी मानें तो मीडिया ने केस में लोगों को गुमराह किया है.

 

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