
सूरत के गोडादरा इलाके में 1000 रुपये के मामूली विवाद ने बड़े झगड़े का रूप ले लिया. हालांकि पुलिस की तत्परता ने एक बड़ी वारदात को होने से पहले ही रोक दिया. यह घटना किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी, जहां पुलिस ने न सिर्फ आरोपियों को मौके पर ही दबोच लिया बल्कि पूरी कार्रवाई सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गई. इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि समय पर पुलिस की कार्रवाई कितनी अहम होती है.
असल में गोडादरा में उस वक्त दहशत फैल गई, जब वहां का माहौल किसी गैंगस्टर मूवी जैसा नजर आने लगा. आमतौर पर पुलिस घटनाओं के बाद पहुंचती है, लेकिन यहां कहानी बिल्कुल उलट थी. पुलिस पहले से सतर्क थी और उसने बदमाशों की साजिश को पहले ही भांप लिया था. इलाके में रहने वाले लोग इस पूरे घटनाक्रम को देखकर हैरान रह गए. सीसीटीवी में कैद हुई तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं.
सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई देता है कि तीन बाइक पर कुल 9 लोग सवार होकर एक रिहायशी सोसायटी में घुसते हैं. हर बाइक पर तीन-तीन युवक बैठे हुए थे. इन सभी के पास धारदार हथियार थे, जिनमें बड़े चाकू शामिल थे. उनका इरादा साफ तौर पर हमला करने का था. इलाके में अचानक इतनी संख्या में हथियारबंद युवकों को देखकर लोगों में डर फैल गया. यह पूरी घटना बेहद सुनियोजित लग रही थी.
पुलिस जांच में सामने आया कि यह पूरा विवाद महज 1000 रुपये के लेन-देन से शुरू हुआ था. आरोपी सचिन धर्मेंद्रभाई चौधरी से पैसे मांग रहे थे. जब सचिन ने तुरंत पैसे देने में असमर्थता जताई, तो विवाद बढ़ गया. आरोपियों ने उसे फोन पर गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी. यह मामूली विवाद धीरे-धीरे हिंसक रूप लेने लगा. इसी कारण यह मामला बेहद संवेदनशील बन गया.
हालात को गंभीर समझते हुए सचिन ने तुरंत पुलिस को कॉल कर मदद मांगी. यही बात उसकी सबसे बड़ी समझदारी साबित हुई. रात का समय था और सोसायटी में शांति थी. तभी अचानक तीन बाइकें गली में दाखिल हुईं. हर बाइक पर तीन लोग सवार थे और उनके पास कुल 6 बड़े चाकू थे. उनका मकसद साफ था- सचिन पर हमला करना. लेकिन पुलिस पहले से अलर्ट हो चुकी थी.
जैसे ही पुलिस को इमरजेंसी कॉल मिली, गोडादरा थाने की टीम तुरंत मौके के लिए रवाना हो गई. सर्विलांस स्टाफ के हरविजय सिंह, संदीप भाई और विशाल भाई तुरंत एक्शन में आ गए. पुलिस की गाड़ियों को देखते ही बदमाशों के होश उड़ गए. उन्होंने भागने की कोशिश की. लेकिन पुलिस ने उन्हें घेर लिया और भागने का मौका नहीं दिया.
इस पूरी कार्रवाई का सबसे चौंकाने वाला मंजर तब सामने आया जब एक पुलिसकर्मी ने अपनी चलती बाइक का व्हील उठा दिया. बाइक का अगला पहिया हवा में उठ गया और वह सीधे आरोपी के पास पहुंच गया. उसने भाग रहे आरोपी को बाइक से ही पकड़ लिया. इस दौरान पुलिसकर्मी ने उसकी गर्दन के पीछे से पकड़कर उसे काबू में किया. यह सीन बिल्कुल किसी एक्शन फिल्म जैसा लग रहा था.
एक अन्य पुलिसकर्मी ने आरोपी को पकड़ने के लिए उसके कंधे पर चढ़कर उसे गिरा दिया. यह कार्रवाई बेहद जोखिम भरी थी, लेकिन पुलिसकर्मी पीछे नहीं हटे. उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना आरोपियों को काबू किया. इस दौरान कई बार हाथापाई भी हुई. लेकिन आखिरकार पुलिस ने सभी को जमीन पर गिराकर गिरफ्तार कर लिया.
एक आरोपी ने भागने के लिए बाइक का एक्सीलेटर तेजी से घुमाया. तभी एक पुलिसकर्मी ने पीछे से उसे खींचकर सड़क पर गिरा दिया. इससे बाइक का संतुलन बिगड़ गया और वह गिर पड़ा. पुलिस जवान डंडे लेकर गलियों में दौड़ते नजर आए. यह पूरा घटनाक्रम बेहद तेज और रोमांचक था. हर कदम पर पुलिस की तत्परता दिखाई दे रही थी.
पुलिस ने इस मामले में 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनमें मनीष उर्फ कालिया गुप्ता, प्रियेश उर्फ साहुल दुबे, दीपक यादव, अमित उर्फ बीड़ी यादव, प्रकाश उर्फ विक्की सोनी और अभिषेक उर्फ बच्ची यादव शामिल हैं. इनके साथ दो नाबालिग भी पकड़े गए हैं. ये सभी मूल रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं और सूरत में मजदूरी करते थे.

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता-2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इनमें गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होना, हमला करना और घातक हथियार रखना शामिल है. पुलिस अब इनसे पूछताछ कर रही है. आगे और खुलासे होने की संभावना भी जताई जा रही है.
डीसीपी डॉ. कानन देसाई ने बताया कि पुलिस का काम केवल अपराध के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि उसे रोकना भी है. उन्होंने कहा कि यह मामला एक बड़ा प्रिवेंटिव एक्शन है. सचिन चौधरी, जिसकी उम्र 19 साल है, मजदूरी करता है और उसी के विवाद में यह घटना हुई थी. पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर एक बड़ी घटना टाल दी.
डीसीपी के अनुसार, आरोपी सचिन को मारने के इरादे से चाकू लेकर आए थे. पुलिस ने उन्हें रेनबो चाकू के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया. सभी के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है. यह घटना दिखाती है कि छोटी सी बात भी कितनी बड़ी बन सकती है.
गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है. इनके खिलाफ लिम्बायत, डिंडोली, सरोली और गोडादरा थानों में पहले से 4-5 मामले दर्ज हैं. ये पासा (PASA) के तहत सजा भी काट चुके हैं. इससे साफ है कि ये लोग पहले से अपराध में लिप्त थे. सचिन की जागरूकता और पुलिस की तत्परता ने एक जान बचा ली. यह मामला बताता है कि सतर्कता और समय पर एक्शन से बड़ी घटनाओं को रोका जा सकता है.