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IRS समीर वानखेड़े ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दी सफाई, शाहरुख खान से रिश्वत मांगने का आरोप गलत, CBI जांच पर उठे सवाल

अब विवादित IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने बॉम्बे हाईकोर्ट में शाहरुख खान से रिश्वत मांगने के आरोपों को खारिज कर दिया है. CBI की जांच में देरी होने पर हाई कोर्ट ने भी सवाल उठाए हैं. आखिर क्यों उलझा है ये मामला? जानिए पूरी कहानी.

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IRS अफसर समीर लगातार विवादों में रहे हैं (फाइल फोटो-ITG)
IRS अफसर समीर लगातार विवादों में रहे हैं (फाइल फोटो-ITG)

विवादित आई.आर.एस. अधिकारी समीर वानखेड़े (Sameer Wankhede) से जुड़े चर्चित कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स केस में नया मोड़ आ गया है. सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान वानखेड़े ने साफ कहा कि उन्होंने कभी भी ग्लोबल सुपर स्टार शाहरुख खान से रिश्वत नहीं मांगी और न ही कोई रकम ली. इस मामले में अदालत ने सीबीआई (CBI) से भी सख्त सवाल पूछे हैं, जिससे यह पूरा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

सोमवार को हुई सुनवाई में समीर वानखेड़े ने अदालत के सामने कहा कि रिश्वत मांगने या लेने में उनका कोई हाथ नहीं है. उनके वकील आबाद पोंडा ने दलील दी कि CBI के अपने केस में भी यह बात सामने आई है कि रिश्वत किसी और ने ली थी. उन्होंने यह भी कहा कि अब तक इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है, जिससे आरोपों की गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं. वानखेड़े ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए FIR को रद्द करने की मांग दोहराई.

यह पूरा मामला अक्टूबर 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स केस से जुड़ा है. उस समय वानखेड़े नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) में डिपुटेशन पर थे. उसी दौरान कई बॉलीवुड हस्तियों के खिलाफ ड्रग्स से जुड़े केस दर्ज हुए थे. क्रूज पर छापेमारी के दौरान कुछ लोगों के पास ड्रग्स मिलने का दावा किया गया था, जिससे यह मामला देशभर में सुर्खियों में आ गया था.

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इस केस में सुपर स्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान का नाम भी सामने आया था. हालांकि उनके पास कोई ड्रग्स नहीं मिला था. लेकिन वे उन लोगों के साथ थे जिनके पास ड्रग्स बरामद होने की बात कही गई थी. बाद में उनके मोबाइल फोन की जांच में पुराने चैट्स मिले, जिनमें ड्रग्स सेवन की चर्चा बताई गई. इसी आधार पर NCB ने उन्हें भी आरोपी बनाया था और गिरफ्तार किया था.

CBI की जांच में आरोप लगाया गया कि वानखेड़े और चार अन्य लोगों ने शाहरुख खान से 25 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी. यह रकम उनके बेटे आर्यन को केस में फंसाने से बचाने के बदले मांगी गई थी. यही आरोप इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है. हालांकि वानखेड़े लगातार इन आरोपों को नकारते रहे हैं और इसे साजिश बता रहे हैं.

समीर वानखेड़े ने 2023 में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था. उन्होंने CBI द्वारा दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की थी. साथ ही उन्होंने किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई से अंतरिम राहत भी मांगी थी. कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा भी दी थी, जिससे उन्हें राहत मिली थी. इस मामले में CBI की जांच लंबे समय से जारी है, लेकिन अब तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है. 

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जुलाई 2025 में केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा था कि वह तीन महीने में जांच पूरी कर लेगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ. इस देरी को लेकर वानखेड़े पक्ष ने अदालत में गंभीर सवाल उठाए हैं. वानखेड़े के वकील आबाद पोंडा ने अदालत में कहा कि CBI बार-बार सुनवाई टाल रही है. उन्होंने बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के पेश होने के कारण पिछले दो साल से मामले में देरी हो रही है. इस देरी का असर वानखेड़े के करियर पर पड़ रहा है, जो एक गंभीर मुद्दा है.

सुनवाई के दौरान अदालत ने CBI से पूछा कि आखिर जांच कब पूरी होगी. जजों ने तीखा सवाल करते हुए कहा कि क्या एजेंसी को 10-20 साल लगेंगे जांच खत्म करने में? यह टिप्पणी दिखाती है कि कोर्ट भी इस देरी से संतुष्ट नहीं है और जल्द नतीजे चाहती है.

तीन महीने का आश्वासन
CBI की ओर से पेश वकील कुलदीप पाटिल ने अदालत को बताया कि एजेंसी तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर लेगी. यह बयान कोर्ट के सामने दिया गया, लेकिन इससे पहले भी इसी तरह का आश्वासन दिया जा चुका है, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है. ऐसे में इस बार भी सवाल बने हुए हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल चार्जशीट दाखिल न होना ही केस खत्म करने का आधार नहीं हो सकता. 

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अदालत ने कहा कि असली मुद्दा यह है कि क्या वानखेड़े के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं या नहीं. कोर्ट ने वकील से कहा कि वे यह दिखाएं कि मामला रद्द करने लायक क्यों है. वानखेड़े के वकील ने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ एक अलग मामला आय से अधिक संपत्ति का भी है, लेकिन वह इस रिश्वत केस से पूरी तरह अलग है. उन्होंने कहा कि दोनों मामलों को मिलाकर नहीं देखा जाना चाहिए और हर केस को अपने तथ्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए.

इस केस में आर्यन खान को अक्टूबर 2021 में गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने करीब तीन हफ्ते जेल में बिताए थे. बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी. जांच के बाद NCB की स्पेशल टीम ने चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सबूतों के अभाव में आर्यन को आरोपी नहीं बनाया गया. NCB की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी जांच में पाया कि आर्यन खान के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं. इसी वजह से उन्हें चार्जशीट से बाहर रखा गया. 

इस फैसले ने पूरे केस को नया मोड़ दिया और कई सवाल खड़े किए. अब इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी, जहां कोर्ट वानखेड़े की याचिका पर आगे विचार करेगा. यह देखना अहम होगा कि क्या अदालत FIR को रद्द करती है या CBI को जांच जारी रखने का निर्देश देती है. इस केस का फैसला न सिर्फ वानखेड़े बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा असर डाल सकता है.

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