
मुंबई के मीरा रोड इलाके में हुए 'लोन वुल्फ' हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है. आरोपी जैब जुबेर अंसारी पर अब आतंकवाद विरोधी कानून UAPA के तहत कार्रवाई की जा रही है. महाराष्ट्र ATS इस मामले में न सिर्फ हमले की वजह बल्कि उसके पीछे संभावित कट्टरपंथी नेटवर्क की भी गहराई से जांच कर रही है. मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं.
मीरा रोड के नयानगर इलाके में हुए इस हमले के बाद महाराष्ट्र पुलिस की एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने आरोपी जैब जुबेर अंसारी के खिलाफ UAPA यानी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा लगा दी है. सोमवार को अंसारी को ठाणे की अदालत में पेश किया गया, जहां ATS ने बताया कि उस पर UAPA की धारा 16 लगाई गई है, जो आतंकवादी कृत्य के लिए सजा से जुड़ी है. इससे पहले उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं भी लगाई गई थीं.
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पिछले हफ्ते एक निर्माण स्थल पर काम कर रहे दो सिक्योरिटी गार्ड्स पर हमला किया था. हमले से पहले उसने दोनों से उनका धर्म पूछा और कलमा पढ़ने के लिए कहा. जब गार्ड्स ऐसा नहीं कर पाए, तो उसने चाकू से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया. इस घटना ने इलाके में दहशत फैला दी और इसे सांप्रदायिक एंगल से भी देखा जा रहा है.
जांच के दौरान पुलिस को अंसारी के घर से कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं. इसके अलावा उसके मोबाइल और लैपटॉप से ISIS और सीरिया से जुड़े प्रोपेगेंडा वीडियो भी बरामद हुए हैं. उसकी सर्च हिस्ट्री में भी ऐसे कई वीडियो और कंटेंट पाए गए, जो कट्टरपंथ और आतंकवाद की ओर इशारा करते हैं. इससे ATS को शक है कि आरोपी किसी तरह के ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन का शिकार हुआ हो सकता है.

ATS अब आरोपी के मोबाइल, ईमेल और अन्य डिजिटल कम्युनिकेशन की फॉरेंसिक जांच करवा रही है. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कोई व्यक्ति या संगठन उसे कट्टरपंथ की ओर धकेल रहा था या फिर वह खुद किसी और को प्रभावित कर रहा था. फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की मदद से डिलीट किए गए डेटा को भी रिकवर किया जा रहा है, क्योंकि गिरफ्तारी से पहले आरोपी ने काफी डेटा मिटा दिया था.
सोमवार को ATS ने आरोपी को स्पेशल कोर्ट में पेश कर आगे की पूछताछ के लिए कस्टडी मांगी. एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि आरोपी के फोन के मिरर इमेज डेटा के साथ उसका सामना कराना जरूरी है. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या उसने किसी और को भी कट्टरपंथी बनाया है, क्योंकि वह UAE समेत अन्य देशों के छात्रों को ऑनलाइन क्लास भी देता था.
इस मामले में आरोपी की अलग रह रही पत्नी की भूमिका भी जांच के दायरे में है. ATS यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसकी पत्नी, जो अफगान मूल की अमेरिकी नागरिक बताई जा रही है, कहीं रेडिकलाइजेशन या ब्रेनवॉशिंग में शामिल तो नहीं थी. बताया जा रहा है कि अंसारी पिछले साल अपनी पत्नी से अलग हो गया था और इस साल फरवरी में उनका तलाक भी हो गया.
वहीं, बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में दावा किया कि अंसारी मानसिक बीमारी स्किजोफ्रेनिया से पीड़ित है और उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाना चाहिए. अदालत ने इस दलील को ध्यान में रखते हुए ATS को मेडिकल जांच कराने का निर्देश दिया है. साथ ही आरोपी को 11 मई तक ATS की कस्टडी में भेज दिया गया है, ताकि जांच एजेंसी इस मामले के हर पहलू को विस्तार से खंगाल सके.