Manvendra Singh Murder Case: यूपी की राजधानी लखनऊ में हुए मानवेंद्र सिंह हत्याकांड का हर सच सामने आ चुका है. कातिल बेटे अक्षत की पूरी साजिश और करतूत पुलिस ने बेनकाब कर दी है. पुलिस ने साफ कर दिया है कि इस मामले में न तो एसिड के इस्तेमाल की कोई पुष्टि हुई है और न ही लाश के टुकड़ों को जलाने के सबूत मिले हैं. बुधवार को मेडिकल के बाद पुलिस आरोपी अक्षत को कोर्ट लेकर पहुंची थी. इस दौरान अक्षत ने कैमरे के सामने ये ज़रूर माना कि ये सब 'गलती से हो गया.'
कत्ल पर बोला कातिल- गलती से हो गया
जब अक्षत पुलिस की हिरासत में कैमरों के सामने आया तो उसने कहा- गलती से हो गया था. ये उस ग़लती की बात नहीं कर रहा है, जो अमूमन 18,19 साल की उम्र में लड़कों से हो जाती है. ये उस ख़ूनी गलती की बात कर रहा है जिस गलती ने पिछले दो दिनों से देश के हर मां-बाप को और यहां तक की ख़ुद बच्चों को झकझोर कर रख दिया है. चलिए मान लीजिए गुस्से में, गलती से राइफल से गोली चल गई. ऐसी गलतियां इससे पहले भी कई बार ग़ुस्से में हो चुकी हैं.
लेकिन गोली मारने के बाद ऑनलाइन चाकू ख़रीदना, बाज़ार से आरी लाना और फिर अपने हाथों से अपने ही बाप के चार टुक़ड़े कर, फिर उन टुकड़ो को किश्तों में ठिकाने लगाते जाना, ड्राइंग रूम में उसी बाप के धड़ और सिर को ड्रम में रख देना. ये सब करने के बाद भी क्या कोई बेटा ये कह सकता है कि गलती से हो गया था.
चलिए फिर भी मान लेते हैं कि इतना सब कुछ करने के बाद भी ये इस वक्त सच कह रहा है कि गलती से हो गया था. उसका चेहरा बेशक मास्क से ढका था. पर हाथ, पांव, आंखें सब कुछ बोल रही थीं. उसके देखने, चलने, बोलने या गर्दन हिलाने.. यानि उसकी बॉडी लैंग्वेज को अगर देखा जाए. किसी भी पल, उसके किसी भी हाव भाव से, कहीं से भी ये लगता है कि इसे अपने किए पर कोई पछतावा है. कोई शर्म या डर है. बिल्कुल नहीं.
यहां तक की लखनऊ के एक आला पुलिस अफसर के सामने जब वो एक घंटे तक बैठे रहा और वो पुलिस अफसर उससे पूछताछ करते रहे तब वो खुद परेशान हो गया. उस एक घंटे की पूछताछ में उन्हें एक बार भी ये नहीं लगा कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा या अफसोस है. बल्कि जिस तरह वो बातें कर रहा था ख़ुद वो पुलिस अफसर हैरान थे. हैरान थे इस बात पर कि आज की इस जनरेशन को क्या हो गया है. जो उसने किया उसे अब भी उसकी कोई परवाह नहीं है. हां, शायद अब उसे ये यक़ीन हो चला है कि अपने घर और अपनी आजादी से दूर अब उसे जेल में रहना होगा. इस बात को लेकर वो नर्वस ज़रूर है.
पांच शब्दों का जवाब
बुधवार को अक्षत को आशियाना कोतवाली से कोर्ट ले जाया जाना था ताकि उसकी पुलिस रिमांड ली जा सके. जिस तरह से इसने अपने पिता को मारा उस खबर को सुनने के बाद खुद मीडिया में बहुत से ऐसे लोग थे जो सिर्फ उसे देखने कोतवाली चले आए थे. जैसे ही अक्षत को कोतवाली से बाहर लाया गया. बाहर खड़ी मीडिया ने उन सारे सवालों को अक्षत की तरफ उछाल दिया जिनके जवाब हर कोई जानना चाहता है. खासकर हर मां-बाप. जो औलाद वाले हैं. ख़ुद मीडिया के मन में अक्षत को लेकर कैसे-कैसे सवाल थे. वैसे भी अक्षत का जवाब सिर्फ 5 शब्दों में मिला.
पिता को क्यों गोली मारी? क्यों काटा? बहन चुप क्यों है? अमित कौन है? चाची घर पर थी? क्यों मर्डर किया? क्या बहन भी शामिल है? इतने सारे सवाल थे अक्षत के लिए. पर बार बार लगातार तमाम सवाल दोहराए जाने के बावजूद अक्षत ने सिर्फ दो सवालों के जवाब दिए. एक जवाब 5 शब्दों में और दूसरा गर्दन हिलाकर. जो जवाब 5 शब्दों में दिया उसका सवाल ये था कि उसने अपने पिता को क्यों मारा? इसके साथ ही बीच में कई सवाल आए. लेकिन अक्षत खामोश रहा. अलबत्ता उसी ख़ामोशी के बीच बड़ी ख़ामोशी से गर्दन हिलाकर उसने एक और सवाल का जवाब ज़रूर दिया. सवाल ये था कि क्या पापा को मारने में बहन भी शामिल थी. इस पर अक्षत ने ना में गर्दन हिलाया.
यानि अक्षत खुद तो जुर्म कुबूल कर रहा है पर साथ ही अपनी छोटी बहन को बेकसूर बता रहा है. दरअसल, अक्षत की छोटी बहन को लेकर इसलिए बाते हो रही हैं क्योंकि 20 फरवरी की सुबह चार से साढ़े चार बजे के दरम्यान जब अक्षत ने अपने पिता मानवेद्र सिंह को उन्हीं की लाइसेंसी राइफल से गोली मारी तब गोली की आवाज सुनकर उसकी बहन कीर्ति जाग गई थी. कहा ये जा रहा है कि इसके बाद अक्षत ने कीर्ति को धमकी दी और डरा कर उसे अपना मुंह बंद रखने को कहा. पर अगले चार दिनों तक घर में पिता की आधी अधूरी लाश पड़ी रही.
इस दौरान कीर्ति फर्स्ट फ्लोर पर अपने चाचा चाची के पास भी गई. पड़ोस में दोस्त के घर भी गई. इम्तिहान देने स्कूल भी गई. पर तब भी चुप रही. यानि कीर्ति को ऐसे कई मौके मिले थे जब उसका भाई उसके पास नहीं था और वो सच बता सकती थी. पर वो खामोश रही. इसीलिए कुछ लोग भाई बहन की मिलीभगत को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं. पर सवाल ये है कि क्या वाकई कीर्ति अपने भाई के साथ मिली हुई थी या सचमुच अपनी बहन को लेकर उसका भाई यानि अक्षत बेहद संस्कारी है.
20 फरवरी की रात ढाई घंटे क्यों जाग रहा था अक्षत?
अक्षत की बुआ आनि मानवेंद्र की छोटी बहन ने ये भी बताया है कि 19 फरवरी की रात करीब 12.30 से 1 के दरम्यान मानवेंद्र एक शादी से घर लौटे थे. इसके बाद रात 1 बजकर 34 मिनट तक वो ऑनलाइन थे. लखनऊ पुलिस का भी कहना है कि बाप बेटे के बीच बहस या झगड़ा एक बजे के बाद हुआ लेकिन पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जब झगड़े के बाद रात दो बजे के आसपास मानवेंद्र सो चुके थे. तब अगले दो ढाई घंटे तक अक्षत क्यों जागता रहा. अगर गुस्से में था तो उसी वक्त गोली मार सकता था. या तो हो सकता है वो अपने पिता की गहरी नींद में जाने का इंतजार कर रहा हो. अक्षत की बुआ का ये भी कहना है कि अक्षत को डॉक्टर बनाने को लेकर बाप बेटे में अक्सर झगड़ा हुआ करता था.
डॉक्टरी की पढ़ाई कराने की जिद को लेकर रिश्तेदारों ने मानवेंद्र को कई बार समझाया भी. बाद में मानवेंद्र इस बात पर राजी भी हो गए कि वो जो करना चाहे उसे करने देंगे. अक्षत बीबीए कर बिजनेस करना चाहता था. अक्षत की बुआ ने ये भी बताया कि उनकी भाभी यानि अक्षत की मां की 9 मई 2018 को मौत हो गई थी. उनकी मौत अस्पताल में हुई थी, जहां उनकी ब्रेन की सर्जरी हुई थी.
अक्षत के दादा कभी यूपी पुलिस में दरोगा हुआ करते थे. हालांकि वो बहुत पहले रिटायर हो चुके. लेकिन मानवेंद्र अब भी अपनी कार में पुलिस का स्टिकर लगाया करते थे. इसे इत्तेफाक कहें या अक्षत की समझ कि कत्ल के बाद जिस कार में उसने अपने पिता की लाश के टुकड़ों को ठिकाने लगाया ये वही कार थी जिस पर पुलिस लिखा है. शायद अक्षत को पता था कि कार पर पुलिस का स्टिकर होने की वजह से पुलिस वाले उसकी कार की तलाशी नहीं लेंगे.
लखनऊ पुलिस के मुताबिक, अक्षत ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है. उसने पूछताछ के दौरान बताया कि उसके हाथों उसके पिता का कत्ल गुस्से में हो गया था. लेकिन कत्ल हो जाने के बाद उसे पकड़े जाने का डर सताने लगा. तब उसने खामोशी से लाश को ठिकाने लगाने के बारे में सोचा था. पर लाश वजनी थी, वो अकेला उठा नहीं सकता था.
ऑनलाइन मंगाया था चाकू
अक्षत ने 20 फरवरी की सुबह ऑनलाइन चाकू मंगाया था. पर ऑनलाइन चाकू छोटे साइज का मिलता है उससे लाश के टुकड़े नहीं हुए. तब वो खुद बाजार गया और आरी खरीद कर लाया. लखनऊ पुलिस के मुताबिक, अक्षत ने आरी से अपने पिता की लाश के कुल चार टुकड़े किए. इनमें से दोनों हाथ और पैर वो कार में रखकर ठिकाने लगा चुका था. बकौल पुलिस इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि उसने लाश के टुकड़ों को जलाने की कोशिश की थी.
लाश का बाक़ी हिस्सा उसने नीले ड्रम में रख दिया ताकि बाद में उन्हें भी ठिकाने लगा सके. लेकिन 21 फरवरी की शाम तक मानवेंद्र की गुमशुदगी की खबर पड़ोसियों और रिश्तेदारों तक पहुंच गई. लोगों का घर आना शुरु हो गया. लिहाजा, अक्षत को लाश के बाकी टुकड़े ड्रम से निकाल कर बाहर ले जाने का मौका ही नहीं मिला.
मानवेंद्र के कत्ल की वजह!
मानवेंद्र मर्डर केस की एफआईआर में मानवेंद्र के कत्ल की वजह लिखी हुई है. वजह ये है कि मानवेंद्र अक्षत को नीट क्लियर कर MBBS की पढ़ाई करने के लिए कहते थे. इसी बात पर झगड़ा हुआ और अक्षत ने अपने बाप को गोली मार दी. पर एक सवाल जो आम लोगों के साथ साथ पुलिस को भी परेशान कर रहा था वो ये कि बेशक अक्षत चाकू या आरी खरीद लाया. पर उसे ये कैसे पता कि लाश के टुकड़े कहां से और कैसे किए जाते हैं. तो लखनऊ पुलिस के मुताबिक, अक्षत ने ये आइडिया या लाश के टुकड़े करने का तरीका कुछ वेब सीरीज देखकर सीखा था. इनमें से एक हाल में आई वेब सीरीज वध थी.
(लखनऊ से अंकित मिश्रा के साथ समर्थ श्रीवास्तव का इनपुट)