कोरोना लॉकडाउन की वजह से दिहाड़ी मजदूरी करने वालों पर आफत टूट पड़ी है. हर रोज कमाने और खाने वाली इस बिरादरी के पास खाने को कुछ नहीं है. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और यूपी के हजारों मजदूरों के परिवार पैदल ही लगातार पलायन कर रहे हैं. कोरोना का खतरा होने के बावजूद यह परिवार झुंड में पैदल कई किलोमीटर दूरी तय करके हर रोज यहां से वहां पहुंच रहे हैं. एक ऐसी ही कहानी बिहार के मुजफ्फरपुर से आई है, जहां पर दो दिनों से भूखे पिता और बेटी के लिए महिला दारोगा फरिश्ता बनीं.
फरिस्ता बनीं महिला दरोगा
गुजरात के अहमदाबाद में मजदूरी करने वाले लल्लू पाल और उनकी बेटी नीलम पाल प्रशासन की गलती के कारण उत्तर प्रदेश की जगह बिहार के बरौनी पहुंच गए. प्रशासन ने उन्हें श्रमिक एक्सप्रेस से यूपी बॉर्डर भेजने की जगह पटना भेज दिया. वहां भी इन बाप-बटी की किसी से सुद नहीं ली और भूखे-प्यासे ट्रक और पैदल चलकर मुजफ्फरपुर पहुंच गए. परेशान बाप-बेटी सड़क किनारे उदास बैठे थे, तभी ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिस दारोगा माया रानी की नजर इन पर पड़ी और पूछताछ में इन्होंने बताया कि ये लोग पिछले दो दिनों से भूखे हैं और इनके पास पैसे भी नहीं है. इन्हें उत्तर प्रदेश जाना था लेकिन गलती से बिहार पहुंच गए.
लल्लू पाल और नीलम पाल
दो दिन से भूखे-प्यासे बाप बेटी
ड्यूटी में तैनात महिला दारोगा माया रानी ने तत्काल एक ढाबे से लल्लू पाल और उनकी बेटी के लिए खाने-पीने का बंदोबस्त किया और दोनों यूपी बॉर्डर भेजने की व्यवस्था कराई. उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के रहने वाले लल्लू पाल अहमदाबाद में एक कपड़े की फैक्ट्री में काम करते थे. लॉकडाउन की वजह से काम-धंधा बंद हो गया और अपने गांव की तरफ निकल पड़े.
यूपी बॉर्डर पहुंचने के लिए इन बाप- बेटी ने ट्रक चालकों से कई बार गुहार लगाई. लेकिन पैसे ना होने की वजह से इनकी मदद किसी ने नहीं की. बिहार पुलिस में तैनात दारोगा माया रानी ने की जो खुद ही लॉकडाउन में फंसी हैं इनकी मदद के लिए सामने आईं. माया रानी मधेपुरा में पोस्टेड है और मुजफ्फरपुर में ड्यूटी कर रही हैं.