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हमास से जंग में उतरी इजरायल की स्पेशल फोर्स 'सायरेत मतकल' की दास्तान, जिसके नाम से थर्राता है दुश्मन

Sayeret Matkal: इजरायल जमीन, हवा और पानी तीनों ओर से हमास के आतंकियों पर हमले कर रहा है. उसकी फौज गाजा की सरहद पर टैंक से गोले दाग रही है. लड़ाकू विमान आसमान से बम बरसा रहे हैं. इसी बीच इजरायली सेना की सबसे खतरनाक यूनिट 'सायरेत मतकल' को भी जंग में उतार दिया गया है. उसे एक खास काम सौंपा गया है.

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इजरायल जमीन, हवा और पानी तीनों ओर से हमास के आतंकियों पर हमले कर रहा है.
इजरायल जमीन, हवा और पानी तीनों ओर से हमास के आतंकियों पर हमले कर रहा है.

Israel Hamas War: इजरायल और हमास के बीच चल रही जंग के 9 दिन बीत चुके हैं. इस दौरान गाजा में अब तक 2300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इजरायल गाजा में जमकर गदर मचा रहा है. वो जल्द से जल्द अपने इंतकाम को अंजाम तक पहुंचाना चाहता है. इसलिए जमीन, आसमान और पानी तीनों ओर से हमास के आतंकियों पर हमले कर रहा है. इजरायली सेना की सबसे खतरनाक यूनिट 'सायरेत मतकल' भी जंग में उतर चुकी है. इस स्पेशल यूनिट के जाबांज जवानों को गाजा पट्टी पर उतार दिया गया है. इजरायल की ओर से उनको खास काम सौंपा गया है. उन्हें हमास के चंगुल में कैद इजरायली बंधकों को छुड़ाकर सकुशल वापस लाने की जिम्मेदारी दी गई है. 

'सायरेत मतकल' इजरायली सेना की प्रीमियर स्पेशल यूनिट है, जिसे पूरी दुनिया में खतरनाक माना जाता है. इसे पहले 'यूनिट 269' और 'यूनिट 262' के नाम से भी जाना जाता था. इसे इजराइल के जनरल स्टाफ (मतकल) की स्पेशल खोजी यूनिट (सायरेत) के रूप में जाना जाता है. इसके कमांडो अच्छी तरह से प्रशिक्षित होते हैं. उन्हें कड़ी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसकी वजह से वो फौलाद बन जाते हैं. इस यूनिट का एक कमांडो आधा दर्जन से अधिक दुश्मनों पर अकेले भारी पड़ता है. ये जितने शारीरिक रूप से मजबूत होते हैं, उतने ही बुद्धि में तेज होते हैं. पल भर में फैसला कर लेते हैं कि आगे उन्हें क्या और कैसे करना है. दुश्मन कुछ समझ पाए, इससे पहले उनका काम तमाम कर जाते हैं.

बंधकों को वापस लाने की जिम्मेदारी

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7 अक्टूबर को हमास के आतंकियों ने इजरायल में जमकर कत्लेआम किया था. इसमें सैकड़ों बेकसूर लोग मारे गए थे. इतना ही नहीं वापस जाते समय आतंकी अपने साथ सैकड़ों की संख्या में इजरायली लोगों को किडनैप करके ले गए थे. उन्हें गाजा पट्टी में बंधक बनाकर रखा गया है. आतंकी इजरायल के साथ हो रहे जंग में इन बंधकों को ढ़ाल के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं. इजरायल अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाना चाहता है, लेकिन उसकी सेना अभी गाजा में घुस नहीं पाई है. ऐसे में 'सायरेत मतकल' के कमांडो को ये अहम जिम्मेदारी दी गई है. शुरूआती सफलता भी मिलनी शुरू हो गई है. पिछले दिनों 60 आतंकियों को मारकर 250 बंधकों को उनकी चंगुल से आजाद कराया गया है.

'सायरेत मतकल' क्या काम करती है?

इजरायल डिफेंस फोर्सेस की सबसे खतरनाक और खास यूनिट 'सायरेत मतकल' मुख्य रूप से तीन काम करती है. पहला अपने देश इजरायल के लिए जरूरी रणनीतिक खुफिया जानकारी एकत्र करना, दूसरा देश या बाहर आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन करना और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण इजरायली बंधकों को दुश्मन के चंगुल से सुरक्षित आजाद कराना है. इसके साथ ही इसको ब्लैक ऑपरेशन, खुफिया ऑपरेशन, कॉम्बैट सर्च और रेस्क्यू, एंटी टेरर ऑपरेशन, हॉस्टेज रेस्क्यू और स्पेशल ऑपरेशन की जिम्मेदारी भी समय-समय पर दी जाती रही है. इसे ब्रिटिश आर्मी की स्पेशल एयर सर्विस (एसएएस) की तर्ज पर तैयार किया गया है. इस स्पेशल यूनिट का आदर्श वाक्य है, "जो साहस करता है, वो जीतता है".

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'सायरेत मतकल' के कमांडों की ट्रेनिंग

इस स्पेशल यूनिट में सिलेक्शन की प्रक्रिया बहुत कठिन होती है. इसमें भर्ती जवानों की ट्रेनिंग दो साल तक चलती है. इसके बाद उन्हें शहरों में कॉम्बैट और पेट्रोलिंग, बम और लैंड माइंस को डिफ्यूज करने की तकनीक, फायरिंग की ट्रेनिंग के साथ रेगिस्तान, पहाड़ और जंगल में जीने की कला सिखाई जाती है. इसके साथ ही मार्शल आर्ट, नेविगेशन, खोजी रणनीति, सामरिक ड्राइविंग, सामरिक आपातकालीन चिकित्सा, ट्रैकिंग रणनीति, छापेमार युद्ध रणनीति, छोटे और हल्के हथियारों के उपयोग को सीखाया जाता है. दुश्मन की कैद में भी जिंदा रहने के लिए ट्रेंड किया जाता है. ट्रेनिंग के आखिरी चार दिनों में हर कमांडो को 120 से 150 किलोमीटर का पैदल मार्च करना होता है, तभी रेड बैरेट मिलता है.

कमांडों की ट्रेनिंग के पांच अहम चरण

1. सबसे पहले पैराट्रूपर्स बेसिक ट्रेनिंग बेस में चार महीने की इन्फैंट्री (पैदल सेना) ट्रेनिंग होती है.

2. दो महीने के लिए यूनिट के साथ एडवांस इन्फैंट्री ट्रेनिंग दी जाती है.

3. आईडीएफ काउंटर-टेरर वेलफेयर स्कूल में चार हफ्तों का काउंटर टेरर कोर्स कराया जाता है.

4. आईडीएफ पैराशूटिंग स्कूल में तीन हफ्तों का पैराशूटिंग कोर्स कराया जाता है.

5. इसके बाद बचे हुए दिनों में लंबी दूरी का खोजी पेट्रोल ट्रेनिंग कराया जाता है, जो विशेष रूप से नेविगेशन/ओरिएंटियरिंग के लिए समर्पित रहता है. इसका यूनिट में बहुत महत्व है. सायरेत मतकल आईडीएफ उन खास यूनिट में से एक है, जो लंबी दूरी की सोलो नेविगेशन प्रैक्टिस करती है.

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crime

'सायरेत मतकल' की स्थापना क्यों हुई?

साल 1954 में हुए किब्या नरसंहार से भड़के आक्रोश के बाद इजराइल की पहली स्पेशल ऑपरेशन यूनिट 101 को भंग कर दिया गया. इसके बाद आईडीएफ के पास 'नेवी सायरेत 13' को छोड़कर कोई समर्पित स्पेशल फोर्स यूनिट नहीं थी, जिसके जरिए वो खास ऑपरेशन को अंजाम दे सके. चारों तरफ से अरब देशों से घिरे इजरायल को एक ऐसी यूनिट की जरूरत थी, जो देश या उससे बाहर जाकर सीक्रेट मिशन को अंजाम दे सके. ऐसे में साल 1957 में पामाच सेनानी मेजर अव्राहम अरनान ने आईडीएफ जनरल स्टाफ को एक ऐसी यूनिट बनाने का सुझाव दिया, जिसके कमांडो को खुफिया जानकारी इकट्ठा करने वाले मिशनों को अंजाम देने के लिए दुश्मन के कब्जे वाले इलाके में भेजा जा सके. इसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया. इसी साल 'सायरेत मतकल' की स्थापना कर दी गई. इस यूनिट के चीफ कमांडर सीधे आईडीएफ जनरल स्टाफ को रिपोर्ट करते हैं.

'सायरेत मतकल' का सबसे बड़ा ऑपरेशन

इजरायली स्पेशल फोर्स 'सायरेत मतकल' ने अपनी स्थापना के बाद से अभी तक दो दर्जन से अधिक बड़े ऑपरेशन किए हैं. इनमें ऑपरेशन गिफ्ट (1968) से लेकर ऑपरेशन ऑर्चर्ड (2007) तक शामिल है. इस यूनिट आखिरी प्रमुख ऑपरेशन साल 2017 में आईएसआईएस के खिलाफ हुआ था. किसी दूसरे देश में जाकर उसकी धरती पर सफलतापूर्वक ऑपरेशन करने का पहला मामला साल 1976 मे देखने को मिला था. उस वक्त 'सायरेत मतकल' ने 'ऑपरेशन थंडरबोल्ट' के जरिए पूरी दुनिया में अपने नाम का डंका बजा दिया था. इस ऑपरेशन में 'सायरेत मतकल' के जाबांज कमाडों ने आतंकियों के चंगुल से सैकड़ों इजरायली नागरिकों को सकुशल रिहा कराया था. 

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क्या है 'ऑपरेशन थंडरबोल्ट' की कहानी?

27 जून 1976 को तेल अवीव के बेनगुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाले फ्रांस के एक प्लेन को पेरिस पहुंचने से पहले हाईजैक कर लिया गया. हाईजैकर्स में 2 फलीस्तीनी लिबरेशन आर्मी और 2 जर्मनी के रेवोल्यूशनरी ब्रिगेड से थे. उन्होंने प्लेन को युगांडा के एंतेबे एयरपोर्ट पर लैंड कराया. इसके बाद इजरायल से उनके नागरिकों को छोड़ने के बदले वहां की जेलों में बंद अपने साथियों को छोड़ने की मांग रखी थी. इतना ही नहीं 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मांग भी की गई थी. लेकिन इजरायल आतंकियों के सामने झुकने वाला नहीं था. इसके बाद 'मोसाद' और 'सायरेत मतकल' को इजरायली बंधकों को छुड़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई. 'सायरेत मतकल' के करीब 200 कमाडों की टीम हरक्यूलिस विमानों से युगांडा पहुंच गई. वहां अपने साहस और सूझबूझ के जरिए आतंकियों का सफाया करके अपने नागरिकों को रिहा करा लिया. इस ऑपरेशन में वर्तमान में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के छोटे भाई योनाथन नेतन्याहू मारे गए थे. उनकी मौत के बाद ही बेंजामिन अमेरिका से इजरायल लौटे थे.

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'सायरेत मतकल' के महत्वपूर्ण ऑपरेशन 

  • 1968 - ऑपरेशन गिफ्ट
  • 1969 - ऑपरेशन बुलमस 6
  • 1969 - ऑपरेशन रविव
  • 1972 - ऑपरेशन आइसोटोप
  • 1972 - ऑपरेशन क्रेट 3
  • 1973 - ऑपरेशन स्प्रिंग ऑफ यूथ 13 
  • 1973 - योम किप्पुर वॉर
  • 1974 - मालोट नरसंहार
  • 1975 - सेवॉय ऑपरेशन
  • 1976 - ऑपरेशन थंडरबोल्ट
  • 1978 - कोस्टल रोड नरसंहार
  • 1980 - मिसगॉ एम हॉस्टेज क्राइसिस
  • 1982 - लेबनान वॉर
  • 1984 - काव 300 अफेयर
  • 1988 - ट्यूनीशिया में अबू जिहाद की हत्या 
  • 1989 - हिजबुल्लाह के शेख अब्दुल करीम ओबेद का लेबनान से अपहरण 
  • 1992 - ऑपरेशन ब्रम्बल बुश, इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की हत्या की योजना 
  • 1994 - लेबनान से मुस्तफा दिरानी का अपहरण
  • 1994 - नचशोन वाच्समैन 
  • 2006 - दूसरे लेबनान वॉर के दौरान ऑपरेशन शार्प एंड स्मूथ
  • 2007 - ऑपरेशन ऑर्चर्ड 
  • 2017 - ऑपरेशन सीरिया 

वीडियो में देखिए 'सायरेत मतकल' का ऑपरेशन...

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वीडियो साभार- इजरायल डिफेंस फोर्सेस 

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