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गुरुग्राम किडनैपिंग केस: बुलेरो एक्सीडेंट में बच गए दो मासूम, 3 किडनैपर की मौत, जानें ‘कुदरत के इंसाफ’ की पूरी कहानी

गुरुग्राम से अगवा किए गए दो मासूम बच्चों को किडनैपर बुलेरो की डिग्गी में ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में हुए एक भयानक एक्सीडेंट ने ये पूरी कहानी बदलकर रख दी. इस हादसे में 3 किडनैपर की मौत हो गई, जबकि दोनों बच्चे चमत्कारिक रूप से बच गए. जानिए पूरी सनसनीखेज कहानी.

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पुलिस जिंदा बचे एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है (फोटो-ITG)
पुलिस जिंदा बचे एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है (फोटो-ITG)

चार बदमाश दो बच्चों को उनके पिता समेत अगवा कर लेते हैं. इसके बाद बच्चों के पिता को मारने के लिए एक अलग कमरे में बंद कर दिया जाता है. जबकि दोनों बच्चों को एक गाड़ी में डालकर किसी अनजान जगह पर ले जाया जाता है. फिर दोनों बच्चों के हाथ पांव बांधकर उसी गाड़ी की डिग्गी में छुपा दिया जाता है. मगर तभी अचानक उस गाड़ी का एक्सीडेंट हो जाता है. इसके बाद जो कुछ होता है, उसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. चलिए जान लेते हैं, इस सनसनीखेज वारदात की पूरी कहानी.

उस काले रंग की बुलेरो की बुरी हालत देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसके अंदर बैठे लोगों का हाल क्य़ा हुआ होगा. उसी गाड़ी के बराबर में खड़े लंबे-चौड़े टैंकर का हाल भी खराब था. यही वो टैंकर है, जिससे वो बुलेरो बेहद तेज रफ्तार में जाकर पीछे से टकराई थी. वो तो शुक्र है कि टैंकर तब इसी तरह सड़क किनारे खड़ा था. अगर चलते टैंकर से टक्कर होती तो पता नहीं वो बची-खुची बुलेरो भी बचती कि नहीं.

ड्राइविंग, सीट, उसके बराबर वाली सीट, पीछे की सीट सब पिचक कर एक-दूसरे से जा मिले हैं. इन सीटों पर बैठने वाले किसी भी शख्स के बचने की कोई उम्मीद ही नहीं थी. लेकिन उसी बुलेरो की डिग्गी को देखने पर पता चला कि इतनी भयानक टक्कर के बावजूद हैरतअंगेज तौर पर गाड़ी के पिछले हिस्से को कोई ज्यादा नुकसान नहीं हुआ. वो भी तब जब इसी पिछले हिस्से से पीछे से आ रही एक मोटरलाइकिल भी टकरा गई थी और उस मोटर साइकिल पर बैठे दोनों ही लोगों की मौत हो गई थी.  

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जानते हैं इतने भयानक हादसे के बाद भी गाड़ी की डिग्गी को ज्यादा नुकसान क्यों नहीं हुआ. क्योंकि उसी डिग्गी में तीन और छह साल के दो मासूम बच्चों को उनके हाथ-पांव बांध कर जबरन ठूंस दिया गया था. दोनों बच्चों को किडनैप किया गया था और किडनैपर उसी बुलेरो में उन बच्चों को किसी गुप्त ठिकाने पर लेकर जा रहे थे. लेकिन कुदरत को तो कुछ और ही मंज़ूर था.

किडनैपिंग की हैरान कर देने वाली ये वो कहानी है जिसे जिसने भी सुना वही कह रहा है कि ये कुदरत का इंसाफ था. कुदरत का बदला था. जो कुदरत ने अपने हाथों से किडनैपर को दिया. इस बुलेरो में सवार चार में से तीन किडनैपर एक्सिडेंट के बाद मौके पर ही दम तोड़ चुके थे. जबकि चौथा गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है. पर करिश्मा देखिए कि दोनों बच्चे बिल्कुल ठीक हैं. बस तीन साल के छोटे बच्चे के एक पैर में फ्रैक्चर है.

1 अप्रैल 2026, गुरुग्राम
इस कहानी की शुरूआत होती है एक अप्रैल को. उबर की गाड़ी चलाने वाला ड्राइवर मनोज यूं तो बरेली का रहने वाला है. मगर रोजी-रोटी की वजह से वो काफी वक्त से गुरुग्राम में अपने परिवार के साथ रह रहा था. मनोज के घर में पत्नी तीन और छह साल के दो बेटे और 15 साल की गोद ली हुई एक बेटी रहती है. एक अप्रैल को एक शख्स जिसका नाम विशेष है, मनोज की गाड़ी बुक करता है. इसके बाद अगले तीन दिनों तक वो मनोज की ही गाड़ी में घूमता रहता है.

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चार अप्रैल को भी विशेष ने गाड़ी बुक कर रखी थी. पर शनिवार को स्कूल की छुट्टी जल्दी हो जाती है तो मनोज पहले दोनों बेटों को लेने स्कूल जाता है. पर उससे पहले वो विशेष से बात करता है. असल में विशेष पांच किडनैपर में से एक था. वो बीते तीन दिनों से मनोज की रेकी कर रहा था. चार अप्रैल को उसे मौका मिल गया और लगातार उसका पीछे कर रहे उसके बाकी साथी किडनैपर बुलेरो कार में मनोज और उसके दोनों बटों को किडनैप कर लेते हैं. इसके बाद गाड़ी बरेली की तरफ चल पड़ती है.

चार अप्रैल की रात ही दो बच्चों और उनके पिता को किडनैप करने के बाद बरेली लाया जाता है. वहां सभी को एक घर के अंदर बंद कर दिया जाता है. उधर, देर रात तक जब मनोज दोनों बेटे के साथ घर नहीं लौटता तो मनोज की पत्नी और दोनों बच्चों की मां पूजा गुरुग्राम थाने में रिपोर्ट लिखा देती है.

रात बीत चुकी थी. अब पांच अप्रैल का दिन आ चुका था. किडनैपर पहले से तय कर चुके थे, उन्हें मनोज को मारना है. लिहाज़ा, पांच अप्रैल को चार किडनैपर दोनों बच्चों के हाथ-पांव बांध कर उन्हें बुलेरो गाड़ी की डिग्गी में डाल देते हैं. बाकी चार किडनैपर अब उसी बुलेरो में बैठते हैं और नए ठिकने की तरफ चल पड़ते हैं. गाड़ी अब मुरादाबद-दिल्ली हाईवे की तरफ जा रही थी. वो भी बेहद तेज रफ्तार से.

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बुलेरो गाड़ी अब मुरादाबाद-दिल्ली हाईवे की तरफ भाग रही थी. चूंकि किडनैपर डरे हुए थे और जल्दी में भी थे. लिहाज़ा गाड़ी की रफ्तार बेहद तेज थी. तभी मुरादाबाद-दिल्ली हाईवे पर एक जगह सड़क का काम चल रहा था. बुलेरो के ड्राइवर ने गाड़ी रॉंग साइड ले ली. पर रफ्तार अब भी तेज थी. इत्तेफाक से आगे एक टैंकर सड़क किनारे खड़ा था. गाड़ी पहले से ही रॉंग साइड पर दौड़ रही थी. ड्राइवर को जब तक वो टैंकर दिखता, तेज रफ्तार की वजह से उसने गाड़ी से कंट्रोल खो दिया और गाड़ी सीधे जाकर टैंकर से जा टकराई.

उसी वक्त पीछे से एक मोटर साइकिल भी आ रही थी. बुलेरो और टैंकर के टक्कर की वजह से मोटर साइकिल भी बुलेरो के पीछे से जा टकराई. मोटर साइकिल पर दो लोग सवार थे. दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. कुछ राहगीरों ने फौरन पुलिस को हादसे की खबर दी. अब पुलिस मौके पर आती है. बुलेरो से एक-एक कर चार लोगों को लहूलुहान हालत में बाहर निकालती है. पर तभी एक पुलिस वाले की नजर गाड़ी की डिग्गी पर पड़ती है. पुलिस हैरान रह जाती है. दो बच्चे जिनके हाथ पांव बंधे थे. बुरी तरह डरे-सहमे रो रहे थे. फौरन पुलिस सभी को गाड़ी से निकाल कर अस्पताल ले जाती है. पर तब तक बुलेरों में सवार तीन लोग दम तोड़ चुके थे. जबकि एक की हालत गंभीर थी.

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दोनों बच्चों को भी चोटें आई थीं. मगर चोट गहरी नहीं थी. मगर तीन साल के बच्चे के एक पैर मे फ्रैक्चर हुआ था. पर दोनों ठीक थे. बच्चों को जिस हाल में डिग्गी में रखा गया था. उससे पुलिस को फौरन समझ आ गया था कि मामला किडनैपिंग का है. अब पुलिस बच्चों से पूछती है, तो बच्चे पूरी कहानी सुनाते हैं. इसी के बाद पुलिस बुलेरो से बरामद चारों किडनैपर के मोबाइल की मदद से पुलिस उनकी जानकारी जुटाना शुरू करती है.

दरअसल, साल 2025 में यूपी पुलिस ने यक्ष ऐप की शुरूआत की थी. ये ऐेप असल में यूपी के अपराधियों का एक डेटा बैंक हैं. जिसमें ऐसे अपराधियों की जानकारी होती है, जिन्होंने कोई अपराध किया हो, जेल गए हैं या फरार हैं. यक्ष ऐप से पता चला कि बुलेरो में सवार चारों लड़के पेशेवर अपराधी थे. 

उधर, पुलिस की दूसरी टीम को जैसे ही पता चला कि चौथा शख्स होश में आ गया है. पुलिस उससे भी पूछताछ करती है. इसी के बाद सारी कहानी सामने आ जाती है. अस्पताल में घायल किडनैपर का नाम प्रिंस है. वो बताता है कि उसके साथ गाड़ी में जो बाकी के तीन लोग सवार थे. उनके नाम मनमोहन, सिकंदर और विशेष यादव है. प्रिंस ये भी बताता है कि उन लोगों ने दोनों बच्चों के पिता को बरेली के करीब ही मनमोहन के पिता नत्थु के घर में बंधक बना रखा है. इसी के बाद फौरन पुलिस की एक टीम घर पर दबिश डालती है और मनोज को सुरक्षित आजाद करा लेती है.

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अब पुलिस के सामने सवाल ये था कि एक मामूली ड्राइवर और उसके दो बेटों को कोई क्यों किडनैप करेगा. तो मनोज इसकी पूरी कहानी बताता है. दरअसल, मनोज ने अपनी बहन की एक बेटी यानी भांजी को गोद ले रखा है. उस भांजी से मनोमहन प्यार करता था. मगर मनमोहन के पिता नत्थु ने मनमोहन का रिश्ता कहीं और तय कर दिया था. इसके बाद मनोज ने भी अपनी गोद ली हुई बेटी के मनमोहन से मिलने पर रोक लगा दी थी. मनोमहन इसी बात से नाराज हो गया और उसने मनोज को मारने का फैसला कर लिया.

मनमोहन और उसके साथी दोनों बच्चों को कहीं और बंधक बना कर रखने के लिए ले जा रहे थे या दोनों बच्चों को मार देना थे. फिलहाल, पुलिस इसकी जांच कर रही है. लेकिन कुदरत का कहर देखिए. जिस गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ, वो खुद मनमोहन चला रहा था. और दोनों बच्चे गाड़ी की डिग्गी में बंद हर बात से बेखबर थे. उन्हें तो शायद ये भी समझ नहीं आ रहा था कि मौत कैसे उनके बिल्कुल करीब से आकर गुजर गई. इस एक कहानी ने एक बार फिर से एक साथ दो बातें सच कर दीं. पहली कुदरत कभी-कभी ऐसे ही इंसाफ करती है और दूसरी ज़िंदगी और मौत सब ऊपर वाले के हाथ में है.

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(गुरूग्राम से नीरज कुमार के साथ कृष्ण गोपाल राज का इनपुट)

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