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मुंबई: यूसुफ पठान के ससुराल वालों को नहीं मिली जमानत, कोर्ट ने खतरनाक हथियार से हमला माना गंभीर अपराध

मुंबई की मजगांव कोर्ट ने सांसद यूसुफ पठान के ससुराल वालों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि आरोपियों ने खतरनाक हथियार से हमला किया और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है. जानें, क्या है पूरा मामला?

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कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया (फोटो-ITG)
कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया (फोटो-ITG)

मुंबई की मजगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने टीएमसी सांसद यूसुफ पठान के ससुराल पक्ष के तीन आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है. कोर्ट ने साफ कहा कि आरोप गंभीर हैं और वारदात में खतरनाक हथियार का इस्तेमाल हुआ है. साथ ही, जांच अभी शुरुआती चरण में है और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका भी जताई गई है.

मजगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया. मजिस्ट्रेट आरती कुलकर्णी ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों ने अपराध करते समय खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल किया है. कोर्ट ने यह भी माना कि प्रथम दृष्टया आरोपियों की संलिप्तता साफ दिखाई देती है. ऐसे में इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा. अदालत ने कहा कि केस की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाना जरूरी है. यह फैसला पूरे मामले में एक अहम मोड़ माना जा रहा है.

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि आरोपियों के बाहर आने पर गवाहों और शिकायतकर्ता पर दबाव बनाया जा सकता है. अदालत ने कहा कि पीड़ित और उसके परिवार को धमकाने या प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसी वजह से जमानत देने से इंकार किया गया. कोर्ट ने जांच के शुरुआती चरण का हवाला देते हुए कहा कि इस समय आरोपियों को रिहा करना जांच को प्रभावित कर सकता है.

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इस मामले में यूसुफ पठान के ससुर मोहम्मद खालिक खान, रिश्तेदार सोएब गुलफराज खान और साले उमराशद मोहम्मद खालिक खान को आरोपी बनाया गया है. इन तीनों की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी. कोर्ट ने माना कि तीनों की भूमिका इस कथित हमले में अहम है. पुलिस जांच में इनके खिलाफ शुरुआती सबूत भी सामने आए हैं.

आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है. इनमें खतरनाक हथियार से गंभीर चोट पहुंचाने, गलत तरीके से रोकने, जानबूझकर अपमान करने और आपराधिक धमकी देने जैसी धाराएं शामिल हैं. साथ ही, सामूहिक इरादे (कॉमन इंटेंशन) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. इन धाराओं के तहत सजा भी कड़ी हो सकती है, जिसे देखते हुए कोर्ट ने जमानत देने में सख्ती दिखाई.

पठान परिवार की ओर से वकील दयानंद डेरे ने कोर्ट में दलील दी कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है. उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वे जांच में सहयोग करने को तैयार हैं. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपियों की कस्टोडियल पूछताछ की जरूरत नहीं है. साथ ही, वे मुंबई के स्थायी निवासी हैं और फरार होने की कोई संभावना नहीं है.

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वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा कि आरोपियों ने पीड़ित को गंभीर चोट पहुंचाई है. अभियोजन ने यह भी दावा किया कि उमराशद के खिलाफ पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद है. इससे यह आशंका बढ़ जाती है कि आरोपी दोबारा ऐसा अपराध कर सकते हैं. इसी आधार पर अभियोजन ने जमानत देने का विरोध किया.

अभियोजन ने कोर्ट को बताया कि घटना का सीसीटीवी फुटेज मौजूद है, जिसमें आरोपी साफ नजर आते हैं. पीड़ित के वकील प्रताप निम्बालकर ने बताया कि हमले में बांस की लकड़ी से वार किया गया, जिससे पीड़ित का हाथ टूट गया. उसे सर्जरी करानी पड़ी और वह अभी भी अस्पताल में भर्ती है. इसके अलावा, पीड़ित के चाचा जाकी अहमद सिद्दीकी को भी गंभीर चोटें आईं और उन्हें भी ऑपरेशन कराना पड़ा.

अभियोजन ने कहा कि अगर आरोपियों को जमानत दी जाती है तो पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. इसी आधार पर कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी. अब संभावना जताई जा रही है कि पठान परिवार इस फैसले को मुंबई सेशंस कोर्ट में चुनौती देगा. आने वाले दिनों में इस केस में और कानूनी लड़ाई देखने को मिल सकती है.

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