उत्तर प्रदेश में LPG और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. 12 मार्च से लेकर अब तक राज्यभर में 17 हजार से ज्यादा छापे और निरीक्षण किए गए हैं. इस दौरान कई एफआईआर दर्ज हुईं और 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. सरकार का दावा है कि प्रदेश में ईंधन की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है.
उत्तर प्रदेश सरकार ने 12 मार्च के बाद से राज्यभर में बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की. इस कार्रवाई का मकसद LPG और पेट्रोलियम उत्पादों की कालाबाजारी पर रोक लगाना और सप्लाई को सुचारू बनाए रखना है. सरकारी बयान के मुताबिक, अब तक 17,581 छापे और निरीक्षण किए जा चुके हैं. यह कार्रवाई लगातार जारी है और हर जिले में अधिकारी सक्रिय रूप से निगरानी कर रहे हैं. इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. सरकार का कहना है कि इस कदम से उपभोक्ताओं को राहत मिली है.
इन छापों के दौरान कानून तोड़ने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की गई है. कुल 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई मामलों में एफआईआर दर्ज हुई है. सरकार के अनुसार, LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स के खिलाफ 33 एफआईआर दर्ज की गईं. इसके अलावा अन्य मामलों में 189 एफआईआर दर्ज हुई हैं. यह दिखाता है कि प्रशासन किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं कर रहा है. कार्रवाई के जरिए कालाबाजारी करने वालों में डर का माहौल बनाने की कोशिश है.
सिर्फ एफआईआर ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर कानूनी कार्रवाई भी शुरू की गई है. कुल 224 लोगों के खिलाफ अभियोजन की प्रक्रिया शुरू की गई है. यह संकेत देता है कि सरकार सिर्फ कार्रवाई दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए भी गंभीर है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हर शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो. इससे पूरे सिस्टम में जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.
मुख्य सचिव के निर्देश के बाद सभी जिलों में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है. जिला आपूर्ति अधिकारी और स्थानीय प्रशासन नियमित रूप से निरीक्षण कर रहे हैं. इन निरीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर और ईंधन मिल सके. सरकार चाहती है कि किसी भी स्थिति में सप्लाई चेन प्रभावित न हो. इसके लिए लगातार फील्ड विजिट और रिपोर्टिंग की जा रही है.
सरकार ने साफ किया है कि राज्य में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है. मौजूदा समय में करीब 91 हजार किलोलीटर पेट्रोल और 1.15 लाख किलोलीटर डीजल का स्टॉक उपलब्ध है. इसके अलावा प्रदेश में 12,888 पेट्रोल पंप सुचारू रूप से काम कर रहे हैं. यह आंकड़े बताते हैं कि सप्लाई पूरी तरह नियंत्रण में है. अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें.
27 मार्च से 29 मार्च के बीच बड़ी मात्रा में ईंधन की बिक्री भी हुई है. इन तीन दिनों में हजारों किलोलीटर पेट्रोल और डीजल उपभोक्ताओं को बेचा गया. इससे यह साफ होता है कि बाजार में मांग और सप्लाई दोनों संतुलित हैं. सरकार का मानना है कि यह स्थिति आगे भी बनी रहेगी. इसके लिए लगातार निगरानी और सप्लाई मैनेजमेंट किया जा रहा है.
सरकार ने आम जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और ईंधन का अनावश्यक भंडारण न करें. कई बार अफवाहों के चलते लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल या गैस खरीद लेते हैं, जिससे कृत्रिम संकट पैदा हो जाता है. सरकार ने साफ कहा है कि ऐसा करने से बचें. पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और हर उपभोक्ता को उसकी जरूरत के अनुसार सप्लाई मिल रही है.
पीटीआई के मुताबिक, LPG की स्थिति को लेकर भी सरकार ने संतोषजनक बताया है. पूरे प्रदेश में 4,107 गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए सिलेंडर की सप्लाई की जा रही है. उपभोक्ताओं को उनकी बुकिंग के अनुसार समय पर सिलेंडर मिल रहे हैं. साथ ही पर्याप्त स्टॉक भी उपलब्ध है. इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी घर में गैस की कमी न हो.
सरकार शहरों में गैस नेटवर्क को और मजबूत करने पर भी काम कर रही है. सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है. इसके तहत पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में लंबित मंजूरियों को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं. इससे आने वाले समय में गैस सप्लाई और बेहतर होगी.
इस बीच केंद्र सरकार ने भी राज्य को राहत दी है. 23 मार्च से कमर्शियल LPG सिलेंडरों के लिए 20 प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन की अनुमति दी गई है. इससे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायिक गतिविधियों को फायदा मिलेगा. अतिरिक्त आवंटन से बाजार में सप्लाई और मजबूत होगी. सरकार को उम्मीद है कि इससे किसी भी तरह की कमी की आशंका खत्म हो जाएगी.
स्थिति पर नजर रखने के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है. खाद्य एवं रसद आयुक्त कार्यालय में यह कंट्रोल रूम लगातार काम कर रहा है. इसके अलावा सभी जिलों में भी कंट्रोल रूम सक्रिय हैं. ये कंट्रोल रूम रियल टाइम में सप्लाई और शिकायतों पर नजर रखते हैं. इससे प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलती है. सरकार का दावा है कि इस पूरी व्यवस्था से प्रदेश में ईंधन सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है.