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कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, हाई कोर्ट को 3 महीने में फैसला करने का आदेश

उन्नाव कांड से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के केस में दोषी ठहराए गए कुलदीप सेंगर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट को तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया है.

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उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में जमानत देने से इनकार. (File Photo: ITG)
उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में जमानत देने से इनकार. (File Photo: ITG)

उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप केस की पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में दोषी ठहराए गए कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि उनकी याचिका पर जल्द सुनवाई करते हुए तीन महीने के भीतर फैसला किया जाए. यह याचिका 10 साल की सजा को चुनौती देने से जुड़ी है.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस एन वी अंजारिया शामिल थे. उन्होंने हाई कोर्ट के 19 जनवरी के आदेश को चुनौती देने वाली कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इस स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.

यह भी कहा गया कि यदि पीड़ित परिवार ने भी कोई अपील दायर की है, तो हाई कोर्ट को कुलदीप सिंह सेंगर की याचिका के साथ-साथ उस पर भी एक साथ सुनवाई करनी चाहिए. कोर्ट को बताया गया कि कुलदीप सेंगर की अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट में 11 फरवरी को सुनवाई होनी है. इस दौरान पीड़ित पक्ष के वकील द्वारा मीडिया में दिए गए बयानों पर नाराजगी जाहिर की गई. 

मुख्य न्यायाधीश नेकहा कि कोर्ट किसी हाथीदांत के टावर में नहीं बैठा है. उसे मीडिया ट्रायल की पूरी जानकारी है. उन्होंने दो टूक कहा कि कोर्ट के बाहर किसी भी तरह का समानांतर ट्रायल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. गौरतलब है कि 13 मार्च 2020 को एक ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को रेप पीड़िता के पिता की मौत के मामले में 10 साल की कैद की सजा सुनाई थी.

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इसके साथ ही 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था. कोर्ट ने कहा था कि परिवार के एकमात्र कमाने वाले की मौत के मामले में किसी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती. रेप पीड़िता के पिता को कुलदीप सिंह सेंगर के कहने पर आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था. 9 अप्रैल 2018 को पुलिस हिरासत में कथित बर्बरता के चलते उनकी मौत हो गई थी. 

हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को हत्या का दोषी नहीं माना, लेकिन आईपीसी की धारा 304 के तहत गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए अधिकतम सजा दी थी. कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ नाबालिग से रेप के मुख्य मामले में दिसंबर 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. उस फैसले के खिलाफ उनकी अपील भी दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है. 

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