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तुर्कमान गेट हिंसा: 5 आरोपियों की जमानत पर फैसला सुरक्षित, न्यायिक हिरासत में भेजे गए 2 लोग

तुर्कमान गेट हिंसा मामले में दिल्ली की अदालत ने पांच आरोपियों की जमानत पर फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने दो नए आरोपियों को आठ दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया है. सुनवाई के दौरान पुलिस, बचाव पक्ष और कस्टोडियल वायलेंस के आरोपों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली.

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हिंसा मंगलवार-रविवार की रात रामलीला मैदान के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई थी. (Photo: PTI)
हिंसा मंगलवार-रविवार की रात रामलीला मैदान के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई थी. (Photo: PTI)

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई पत्थरबाजी और हिंसा के मामले में मंगलवार को अदालत में अहम सुनवाई हुई. दिल्ली की एक कोर्ट ने इस मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला 14 जनवरी तक के लिए सुरक्षित रख लिया है.

ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सायशा चड्डा ने आरोपियों आरिब, काशिफ, कैफ, अदनान और समीर की बेल याचिकाओं पर दलीलें सुनीं. वहीं हाल ही में गिरफ्तार किए गए दो अन्य आरोपियों को भी कोर्ट में पेश किया गया, जिन्हें आठ दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया है.

बचाव पक्ष की ओर से अदनान के वकील ने दलील दी कि सभी आरोपी पुलिस को पहले से जानते थे. उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. उन्होंने कहा कि आरोपी एक-दूसरे को नहीं जानते थे और उन्हें सिर्फ एहतियातन हिरासत में लिया गया. उनका दावा था कि अदनान CCTV फुटेज में कहीं नजर नहीं आता.

सभी आरोपियों के वकीलों ने यह भी आरोप लगाया कि FIR दर्ज होने से पहले ही गिरफ्तारियां कर ली गई थीं. उनका कहना था कि 7 जनवरी को सुबह 10.07 बजे FIR दर्ज हुई, जबकि आरोपियों को उसी दिन तड़के पकड़ लिया गया और सुबह 6.30 बजे औपचारिक गिरफ्तारी दिखाई गई.

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दिल्ली पुलिस की ओर से वकील तुषार कादियान, अतुल श्रीवास्तव और अनीश कुमार ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के तहत फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जा रहा था. इस दौरान MCD ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस से मदद मांगी थी.

उस वक्तच इलाके में निषेधाज्ञा लागू थी. यह सिर्फ मारपीट का मामला नहीं था, बल्कि सिस्टम पर सीधा हमला था. पुलिसवालों पर पत्थर फेंके गए, जिससे उनकी जान खतरे में पड़ गई. अभियोजन पक्ष ने यह भी दावा किया कि आरोपियों के मोबाइल फोन से भड़काऊ वीडियो मिले हैं, जिनमें मस्जिद गिराए जाने की अफवाह फैलाई गई थी.

बेल अर्जी का विरोध करते हुए पुलिस ने कहा कि FIR में दर्ज कुछ धाराओं में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है, ऐसे में अर्नेश कुमार गाइडलाइंस लागू नहीं होतीं. पुलिस ने यह भी तर्क दिया कि हिंसा में शामिल कई लोग अब भी फरार हैं. आरोपियों को बेल मिलने से वे अन्य लोगों को चेतावनी दे सकते हैं.

पुलिस ने कोर्ट में CCTV फुटेज से ली गई तस्वीरें पेश कीं, जिनसे काशिफ और कैफ की मौके पर मौजूदगी की पुष्टि होने का दावा किया गया. हालांकि, कैफ के वकील ने कहा कि उनके पास ऐसा CCTV फुटेज है, जिससे साबित होता है कि उनका क्लाइंट 6 जनवरी की शाम 7 बजे से 7 जनवरी की सुबह 3 बजे तक घर पर था. 

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वहीं आरिब के वकील ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर दावा किया कि घटना के वक्त वह चितली क़बर इलाके में था, जो घटनास्थल से कुछ किलोमीटर दूर है. कोर्ट ने जमानत याचिकाओं पर अपना आदेश बुधवार शाम 4 बजे तक के लिए सुरक्षित रख लिया. इस दौरान दो नए गिरफ्तार आरोपियों मोहम्मद इमरान और अदनान को भी कोर्ट में पेश किया गया. 

दोनों ने कस्टोडियल वायलेंस का आरोप लगाया. कोर्ट ने चैंबर में दोनों की जांच कराई. अदनान के शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई, लेकिन इमरान के शरीर पर चोट के निशान मिले, जो MLC में दर्ज नहीं थे. कोर्ट ने पुलिस को इमरान की दोबारा मेडिकल जांच कराने और बुधवार तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए है. 

इसके साथ ही कस्टोडियल वायलेंस के आरोपों और चोटों की रिपोर्ट न करने पर पुलिस और LNJP अस्पताल के CMO को नोटिस जारी किया गया. दोनों आरोपियों को 21 जनवरी तक आठ दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया है. यह हिंसा 6 और 7 जनवरी की दरमियानी रात को भड़की थी.

उस वक्त रामलीला मैदान इलाके में मस्जिद के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जा रहा था. सोशल मीडिया पर मस्जिद गिराने की अफवाह फैलाई गई, जिसके बाद 150 से 200 लोगों की भीड़ ने पुलिस और MCD कर्मचारियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी, जिसमें SHO समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए.

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