उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में सामने आए धर्मांतरण और ब्लैकमेलिंग मामले के मुख्य आरोपी इमरान को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. उसे रविवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल कुमार सिंह की अदालत में पेश किया गया. उत्तर प्रदेश पुलिस ने इमरान को शनिवार को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था, जहां से वह विदेश फरार होने की कोशिश में था.
पुलिस बीते कई दिनों से इमरान की तलाश कर रही थी और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था. पुलिस को इनपुट मिले थे कि वह दुबई या मलेशिया भाग सकता है. जांच में सामने आया है कि इमरान 27 जनवरी 2024 को दुबई जा चुका था, जहां उसने अपना नेटवर्क खड़ा किया था. इसी नेटवर्क के जरिए फंडिंग मिलने की बात भी सामने आई है.
पुलिस को उसके पासपोर्ट की कॉपी भी बरामद हुई है. इमरान के मलेशिया के कई दौरों की जानकारी भी पुलिस को मिली है. जांच में यह बात सामने आई है कि उसे बड़े पैमाने पर विदेशों से पैसा मिल रहा था. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फंडिंग किस रूट से और किन माध्यमों से की जा रही थी.
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि जिम की आड़ में हिंदू लड़कियों और महिलाओं को निशाना बनाया जाता था. पहले उनकी अश्लील वीडियो बनाई जाती थी और फिर उन्हें ब्लैकमेल कर धर्मांतरण के लिए दबाव डाला जाता था. मिर्जापुर में इमरान के जिम की चेन थी, जिनके जरिए अवैध धर्मांतरण और ब्लैकमेलिंग का रैकेट संचालित किया जा रहा था.
इस मामले में अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें रेलवे पुलिस का एक हेड कांस्टेबल भी शामिल है. गिरफ्तार आरोपियों में इरशाद खान, मोहम्मद शेख अली आलम, फैज़ल खान, ज़हीर, शादाब और फरीद अहमद के नाम शामिल हैं. इस पूरे मामले का खुलासा 20 जनवरी को तब हुआ, जब मिर्जापुर के कोतवाली देहात थाने में दो महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई.
शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिसके बाद पुलिस ने जांच के लिए चार टीमें गठित की थी. जांच के दौरान पता चला कि जिले में एक ही चेन से जुड़ी 47 जिम संचालित हो रही थीं. इनमें से चार जिम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया था. इस मामले के खुलासे के बाद धर्मांतरण के जिम मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है.