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MP: शहडोल जिला अस्पताल में 6 बच्चों की मौत, परिजन लगाते रहे गुहार, नहीं मिली एंबुलेंस

कुशा भाऊ ठाकरे जिला अस्पताल में बीते 3 दिनों के अंदर सिलसिले बार 6 बच्चों की मौत की खबर से शहडोल से लेकर राजधानी भोपाल तक हड़कंप मच गया. इन 6 बच्चों में उमरिया जिले ग्राम भरौला के रहने वाले सोहन चौधरी की 3 माह की भतीजी निशा भी शामिल थी. 

गिड़गिड़ाते रहे परिजन नहीं दी एम्बुलेंस. गिड़गिड़ाते रहे परिजन नहीं दी एम्बुलेंस.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गिड़गिड़ाते रहे परिजन नहीं दी एम्बुलेंस
  • कर्ज़ लेकर वाहन किया और पहुंचे अपने गांव

मध्य प्रदेश के शहडोल कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल में सिलसिलेवार 6 बच्चों की मौत की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग का अमानवीय चेहरा सामने आया है. मृत बच्चे के शव को ले जाने के लिए परिजन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी से शव वाहन या एम्बुलेंस की मांग करते रहे. साधन मुहैय्या नहीं कराने पर आखिरकार विवश परिजनों को कर्ज लेकर वाहन कर बच्ची का शव घर ले जाने को विवश होना पड़ा.  

कुशा भाऊ ठाकरे जिला अस्पताल में बीते 3 दिनों के अंदर सिलसिले बार 6 बच्चों की मौत की खबर से शहडोल से लेकर राजधानी भोपाल तक हड़कंप मच गया. इन 6 बच्चों में उमरिया जिले ग्राम भरौला के रहने वाले सोहन चौधरी की 3 माह की भतीजी निशा भी शामिल थी. 

निशा को उमरिया जिले से अच्छे इलाज के लिए संभाग के सबसे बड़े कुशा भाऊ ठाकरे जिला अस्पताल रेफर किया गया था. लेकिन बच्ची की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई. जिसके बाद परिजन बच्चे का शव लेकर उमरिया ग्रह ग्राम जाने के लिए जिला अस्पताल के सीएमएचओ डॉ. राजेश पांडेय के कार्यालय के चक्कर लगाते रहे.

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परिजनों का कहना है कि वे लगातार फोन पर सम्पर्क कर शव वाहन या एम्बुलेंस जैसे अन्य साधन उपलब्ध कराने की गुहार लगाते रहे. लेकिन सीएमएचओ ने दो टूक कहा कि कोई वाहन उपलब्ध नहीं होगा और कहकर फोन काट दिया.

सीएमएचओ का जबाव सुनकर लाचार विवस सोहन बच्ची का शव लेकर मदद के लिए निकल पड़े. जहां उन्होंने अपने एक परिचित कुशवाह जी से 26 सौ रुपये उधार लेकर एक वाहन हायर कर बच्ची का शव घर ले गए. वहीं, सिलसिले बार 6 बच्चों की मौत के बाद अभी भी 3 बच्चों की हालत नाजुक बनी हुई है. उनमें  से 2 की हालात ज्यादा नाजुक होने पर उन्हें जबलपुर रेफर किया जा रहा था.

मृत बालिका के चाचा सोहन चौधरी का कहना है कि हमने बच्ची को उमरिया से रेफर कराकर शहडोल में भर्ती कराया था. वह दो दिन अस्पताल में भर्ती रही. जब सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो हमने डॉक्टर को बताया लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया. तब हमने CMHO राजेश पांडेय को फोन लगाया और बच्ची की गंभीर हालत की जानकारी दी. न कोई डॉक्टर आया और न ही CMHO ने फ़ोन उठाया. तब तक बच्ची की मौत हो गई.

परिजनों को नहीं मिली एम्बुलेंस, कर्ज लेकर किया वाहन.
परिजनों को नहीं मिली एम्बुलेंस, कर्ज लेकर किया वाहन

परिजनों के आपत्ति के बाद भी बच्चों का इलाज वापस जिला अस्पताल में चल रहा है. 6 बच्चों के मौत के मामले में नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने आपात बैठक बुलाई. वहीं, शहडोल संभाग के कमिश्नर बालिका के चाचा ने कमेटी गठित कर मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं. 

बता दें कि लगभग 11 महीने पहले भी इसी तरह से 24 घंटे के अंदर 6 बच्चों की मौत का मामला खूब गरमाया था. तब प्रदेश में कांग्रेस सरकार कमलनाथ के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट को आनन-फानन में हेलिकॉप्टर से शहडोल आना पड़ा था. जिसके बाद सीएमएचओ और सिविल सर्जन को हटा दिया गया था. सरकार बदली लेकिन अस्पताल प्रशासन का कार्यप्रणाली नहीं बदली, जिसका नतीजा एक बार फिर 6 बच्चों की माता पिता की गोद सुनी हो गई. जिन 6 बच्चों की मौत हुई है उनमें ज्यादातर बच्चे आदिवासी हैं. दूसरी तरफ बच्चों की मौत का कारण क्या है अभी तक अस्पताल प्रशासन स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बता पा रहा है.

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