दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके में चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक घरेलू सहायक (हाउस हेल्प) ने अपने साथियों के साथ मिलकर अपने ही मालिकों के घर फर्जी ईडी (ED) रेड की साजिश रच डाली.
आरोप है कि घरेलू सहायक ने कुछ लोगों के साथ मिलकर खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पुलिस अधिकारी बताकर घर में घुसने की योजना बनाई. आरोपी पुलिस की वर्दी पहनकर पहुंचे. पहले उन्होंने घर वालों को डराया-धमकाया, उनके मोबाइल फोन छीन लिए और उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया. इसके बाद घर में रखे लाखों रुपये के जेवरात और नकदी लेकर फरार हो गए.
पुलिस ने इस मामले में दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के पास से फर्जी आईडी कार्ड, पुलिस की वर्दी, वायरलेस सेट और एक पिस्तौल बरामद की है, जिसका लाइसेंस एक्सपायर हो चुका था.
इसके अलावा लूटे गए जेवरात और महंगी घड़ियां भी बरामद कर ली गई हैं. बाकी आरोपियों की तलाश जारी है और चोरी हुए अन्य सामान की बरामदगी के लिए छापेमारी की जा रही है. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस वारदात की साजिश कब और कैसे रची गई.
क्या है मामला?
11 फरवरी 2026 को तीन लोग पुलिस की वर्दी पहनकर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में रहने वाले 86 वर्षीय रिटायर्ड सीनियर आर्किटेक्ट आर.सी. सभरवाल के घर में जबरन घुस गए. उन्होंने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताया.
आरोपियों ने परिवार को डराया-धमकाया, उनके मोबाइल फोन छीन लिए और घर में तलाशी का नाटक किया. इसी दौरान जब पीड़ित का पोता बीच में आ गया तो आरोपी मौके से फरार हो गए. जाते-जाते वे करीब 3-4 लाख रुपये नकद और सात लग्जरी घड़ियां लेकर भाग निकले.
इस मामले में एफआईआर नंबर 66/2026, दिनांक 24/02/2026, बीएनएस की धाराओं 318(4), 319(2), 329(4), 127(3) और 3(5) के तहत न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में दर्ज की गई और जांच शुरू की गई.
CCTV और डिजिटल फुटप्रिंट से खुला राज
जांच स्थानीय पुलिस टीम ने एसीपी न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी रवि शंकर और एसएचओ राजेंद्र जैन की निगरानी में की. पुलिस ने तकनीक का बड़ा इस्तेमाल किया. टीम ने 350 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. इसमें डी ब्लॉक इलाके के निजी कैमरे, दिल्ली पुलिस के कैमरे और ट्रैफिक कैमरे शामिल थे.
फुटेज को जोड़कर आरोपियों की मूवमेंट ट्रैक की गई. कार सराय काले खां से होते हुए गाजीपुर बॉर्डर पार कर उत्तर प्रदेश में दाखिल हुई और आखिर में गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर-4 में पार्क होती दिखी. कार का रजिस्ट्रेशन नंबर भी सीसीटीवी से मिल गया.
गाजियाबाद में गाड़ी मिलने के बाद पुलिस ने मोबाइल टावर डंप डेटा और IMEI ट्रैकिंग के जरिए उन नंबरों को चिन्हित किया जो घटना स्थल और वैशाली पार्किंग लोकेशन पर एक ही समय सक्रिय थे.
जांच सीधे पूजा राजपूत के घर तक पहुंची. स्थानीय जानकारी से पता चला कि शिकायतकर्ता के घर काम करने वाली नौकरानी रेखा देवी अक्सर उसी पते पर जाती थी. यहीं से अंदरूनी साजिश की पुष्टि हुई. 25 फरवरी को जब पुलिस ने पूजा के घर पर छापा मारा तो फर्जी रेड में इस्तेमाल सामान बरामद हुआ.
क्या-क्या बरामद हुआ?
आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट की पूरी वर्दी
वायरलेस सेट बॉक्स
फर्जी आईडी कार्ड
लूटी गई सात लग्जरी घड़ियां और जेवरात
इन बरामदगियों ने आरोपियों को सीधे वारदात से जोड़ दिया.
गिरफ्तार आरोपी
25 फरवरी 2026 को दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया गया:
रेखा देवी (40) पीड़ित के घर की नौकरानी और मुख्य साजिशकर्ता
पूजा राजपूत (45) रेखा की भाभी
फरार आरोपी
पुलिस अब तीन अन्य आरोपियों की तलाश में है इनमें प्रकाश (सेवारत आईटीबीपी कांस्टेबल), मनीष और उपदेश सिंह थापा (रिटायर्ड आर्मी पर्सनल) का नाम शामिल है. वारदात में इस्तेमाल की गई बलेनो कार उपदेश सिंह थापा के नाम पर रजिस्टर्ड है.
दिल्ली पुलिस का कहना है कि बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और लूट का बाकी सामान बरामद करने की कोशिश जारी है.