कर्नाटक के धर्मस्थल में रहस्यमयी हत्याओं, यौन उत्पीड़न और शवों के दफनाने से जुड़ा केस अब अपने निर्णायक दौर में है. गृह मंत्री जी परमेश्वर ने सोमवार को बताया कि इस केस की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) महीने के आखिर तक अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है. उन्होंने कहा कि एसआईटी को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट, केमिकल एनालिसिस और अन्य जांच रिपोर्ट का इंतजार है.
उन्होंने कहा कि एसआईटी अपनी फाइनल रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपने की तैयारी में है. उन्होंने बताया कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने कहा है कि वो 31 अक्टूबर से पहले या दो दिन आगे-पीछे रिपोर्ट दे सकते हैं. उनसे पूरी जानकारी के साथ फाइनल रिपोर्ट सबमिट करने के लिए निर्देशित किया गया है. एसआईटी सबूतों के वैज्ञानिक विश्लेषण में जुटी है. एकत्रित की गईं हड्डियों का केमिकल एनालिसिस किया जा रहा है.
धर्मस्थल कांड में शिकायतकर्ता सीएन चिन्नैया ने दावा किया था कि उसने पिछले दो दशकों में धर्मस्थल में सैकड़ों शवों को दफनाया है. इन शवों में महिलाओं के शव भी शामिल थे, जिन पर यौन उत्पीड़न के निशान थे. उसने यह भी आरोप लगाया था कि इन घटनाओं के पीछे स्थानीय मंदिर के कुछ प्रशासक शामिल थे. हालांकि, बाद में जांच के दौरान उसको झूठी गवाही के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.
धार्मिक नगरी धर्मस्थल में रहस्यमयी हत्याओं और रेप के आरोपों ने मंदिर प्रशासन और पुलिस दोनों को कठघरे में ला खड़ा किया. कर्नाटक सरकार ने इन आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया. जांच के दौरान धर्मस्थल में नेत्रावती नदी के किनारे जंगल वाले इलाकों में कई जगहों पर खुदाई गई. इस दौरान दो लोकेशनों से कंकाल के अवशेष बरामद किए गए. एक नरमुंड भी बरामद किया गया.
एसआईटी की अगली कार्रवाई इन बरामद अवशेषों की फोरेंसिक और केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट पर निर्भर है. जांच एजेंसी का मानना है कि इन रिपोर्ट्स से यह साफ हो सकेगा कि बरामद हड्डियां इंसानी हैं या नहीं, और यदि हैं, तो उनकी उम्र, लिंग और मौत का समय क्या है. यही रिपोर्ट एसआईटी की फाइनल सबमिशन का आधार बनेगी. जैसे ही एफएसएल की रिपोर्ट आती है, एसआईटी अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट दे देगी.
कर्नाटक सरकार को उम्मीद है कि एसआईटी की जांच धर्मस्थल मंदिर शहर के इस रहस्यमय केस की असलियत को उजागर करेगी. फिलहाल प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है ताकि अफवाहों या गलत सूचनाओं से माहौल न बिगड़े. इस रिपोर्ट के आने से न केवल एक धार्मिक नगरी के नाम पर उठे सवालों का जवाब मिलेगा, बल्कि यह भी तय होगा कि दो दशकों से दबे रहस्यों में कितनी सच्चाई थी.