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मानेसर में CBI का एक्शन, 2.6 लाख की रिश्वत लेते पकड़े गए इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर और जांच अधिकारी

मानेसर में CBI ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर और जांच अधिकारी को 2.6 लाख की रिश्वत लिए जाने के मामले में गिरफ्तार किया है. पता चला है कि अस्पताल की कैशलेस सुविधा बहाल करने के बदले में ये घूस मांगी गई थी. पढ़ें इस एक्शन की पूरी कहानी.

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CBI ने पीड़ित की शिकायत मिलने पर यह कार्रवाई की (फोटो-ITG)
CBI ने पीड़ित की शिकायत मिलने पर यह कार्रवाई की (फोटो-ITG)

हरियाणा के मानेसर में रिश्वतखोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के एक मैनेजर और एक जांच अधिकारी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दोनों ने एक निजी अस्पताल की कैशलेस मेडिकल सुविधा दोबारा शुरू करने के बदले लाखों रुपये की रिश्वत मांगी थी. CBI ने ट्रैप लगाकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा, जिससे पूरे मामले का खुलासा हुआ.

CBI के मुताबिक यह मामला हरियाणा के मानेसर इलाके से जुड़ा है, जहां एक निजी अस्पताल की कैशलेस मेडिकल सुविधा बंद कर दी गई थी. इस सुविधा को फिर से चालू कराने के लिए अस्पताल की ओर से संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया था. इसी दौरान आरोपियों ने इस काम के बदले रिश्वत की मांग की. शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की जानकारी CBI को दी, जिसके बाद एजेंसी ने जांच शुरू की.

जांच में सामने आया कि नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के लिए नियुक्त एक जांच अधिकारी (इंवेस्टिगेटर) ने शिकायतकर्ता से 3 लाख रुपये की अवैध मांग की थी. आरोप था कि बिना रिश्वत दिए अस्पताल की कैशलेस सुविधा बहाल नहीं की जाएगी. यह मांग पूरी तरह गैरकानूनी थी और इसी के आधार पर शिकायत दर्ज कराई गई.

CBI के प्रवक्ता के अनुसार, शिकायतकर्ता पहले ही आरोपियों को 1 लाख रुपये दे चुका था. बाद में बातचीत और मोलभाव के बाद रिश्वत की रकम 3 लाख से घटाकर 2.6 लाख रुपये कर दी गई. इसके तहत बाकी की रकम यानी 1.6 लाख रुपये देने की बात तय हुई थी. आरोपी ने शिकायतकर्ता को निर्देश दिया कि वह तय रकम लेकर मंगलवार को पहुंचे.

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CBI ने इस सूचना के आधार पर एक ट्रैप प्लान किया और मौके पर जाल बिछाया. जैसे ही आरोपी जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता से बाकी 1.6 लाख रुपये की मांग की, टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया. इस कार्रवाई के दौरान पूरे लेनदेन को रिकॉर्ड किया गया, जिससे आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत जुटाए जा सके.

ट्रैप के दौरान हुई आगे की जांच में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के एक मैनेजर की भूमिका भी सामने आई. पता चला कि वह भी इस पूरे रिश्वतखोरी के खेल में शामिल था. इसके बाद CBI ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनसे पूछताछ शुरू कर दी गई है.

CBI अब इस मामले में आगे की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. साथ ही यह भी जांच हो रही है कि क्या इस तरह की रिश्वतखोरी के और मामले भी सामने आ सकते हैं. एजेंसी का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को कानून के तहत सजा दिलाई जाएगी.

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