देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध के खिलाफ हैदराबाद सिटी पुलिस ने एक ऐतिहासिक कार्रवाई की है. ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ नाम से चलाए गए इस अभियान के तहत 16 राज्यों में एक साथ छापेमारी की गई. यह कार्रवाई साइबर फ्रॉड के पैन-इंडिया नेटवर्क को तोड़ने के लिए की गई थी. पुलिस ने 10 दिनों तक लगातार अभियान चलाया. इस दौरान 104 लोगों को गिरफ्तार किया गया. यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है.
16 राज्यों में एक साथ ऑपरेशन
इस बड़े ऑपरेशन के लिए 32 स्पेशल टीमें बनाई गईं, जिनका नेतृत्व इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों ने किया. इन टीमों को महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, असम, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में तैनात किया गया. सभी टीमों ने स्थानीय पुलिस के साथ तालमेल बनाकर एक साथ कार्रवाई की. अलग-अलग राज्यों में साइबर क्राइम के हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए थे. वहां सटीक सूचना के आधार पर छापेमारी की गई.
निवेश और डिजिटल अरेस्ट स्कैम की जांच
हाल के दिनों में निवेश घोटाले, ट्रेडिंग फ्रॉड और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे मामलों में भारी बढ़ोतरी देखी गई थी. साइबर ठग लोगों को डराकर, बहला-फुसलाकर और भावनात्मक दबाव डालकर उनके बैंक खातों से रकम निकाल रहे थे. कई लोग अपनी जिंदगी भर की कमाई गंवा चुके थे. इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पुलिस ने गहन जांच शुरू की. जांच में 151 बैंक खातों का ऐसा नेटवर्क सामने आया, जिनके जरिए ठगी की रकम इधर-उधर की जा रही थी.
151 बैंक खाते बेनकाब
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, हैदराबाद ने फॉरेंसिक विश्लेषण और खुफिया जानकारी के आधार पर इन 151 खातों को चिन्हित किया. ये खाते ठगी की रकम को लेयरिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल हो रहे थे. आरोपियों ने अलग-अलग नामों और फर्जी दस्तावेजों के जरिए खाते खुलवाए थे. इन खातों से रकम निकालकर मास्टरमाइंड तक पहुंचाई जाती थी. पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क को तकनीकी साक्ष्यों के जरिए जोड़ा.
104 गिरफ्तारियां
गिरफ्तार 104 लोगों में 86 म्यूल अकाउंट होल्डर थे. ये लोग जानबूझकर अपने बैंक खाते ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल करने देते थे. 17 अकाउंट सप्लायर या एग्रीगेटर थे, जो इन खातों की व्यवस्था करते और रकम आगे पहुंचाते थे. एक बैंक अधिकारी भी गिरफ्तार किया गया है. यह बैंक अधिकारी ग्राहकों के नाम पर फर्जी खाते खुलवाने में मदद कर रहा था.
बैंक अधिकारी की मिलीभगत उजागर
चौंकाने वाली बात यह रही कि बंधन बैंक के एक रिलेशनशिप मैनेजर को भी गिरफ्तार किया गया. आरोप है कि उसने ठगों के साथ मिलकर फर्जी खातों के संचालन में मदद की. यह अंदरूनी मिलीभगत साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को और गंभीर बनाती है. पुलिस ने साफ किया है कि चाहे कोई भी हो, कानून से ऊपर नहीं है. बैंकिंग सिस्टम के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
1055 मामले, 127 करोड़ की ठगी
गिरफ्तार आरोपी देशभर में दर्ज 1055 साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े पाए गए हैं. इन मामलों में करीब 127 करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है. यह रकम अलग-अलग राज्यों के पीड़ितों से ठगी गई थी. पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी मामलों का खुलासा हो सकता है. यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था.
छापेमारी में भारी बरामदगी
इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 204 मोबाइल फोन, 141 सिम कार्ड, 152 बैंक पासबुक और 234 डेबिट-क्रेडिट कार्ड जब्त किए. इसके अलावा 26 लैपटॉप और 56 कॉरपोरेट या फर्म की मुहरें भी बरामद की गईं. पुलिस ने 36 लाख रुपये नकद भी जब्त किए. ये सभी सामान साइबर ठगी के नेटवर्क को संचालित करने में इस्तेमाल हो रहे थे. जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच जारी है.
अधिकारियों की निगरानी में कार्रवाई
पूरे ऑपरेशन की निगरानी संयुक्त पुलिस आयुक्त (स्पेशल ब्रांच) एस.एम. विजय कुमार और डीसीपी (साइबर क्राइम) वी. अरविंद बाबू ने की. पुलिस अधिकारियों, डिटेक्टिव इंस्पेक्टर और आर्म्ड रिजर्व कर्मियों ने मिलकर यह कार्रवाई की. अलग-अलग राज्यों में जाकर समन्वय स्थापित करना और सटीक छापेमारी करना बड़ी चुनौती थी. लेकिन पुलिस ने पेशेवर तरीके से इसे अंजाम दिया.
जीरो टॉलरेंस नीति
हैदराबाद पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई है. पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन ऑक्टोपस अभी जारी है और सिंडिकेट के ऊपरी स्तर तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है. जो भी व्यक्ति साइबर अपराध में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. चाहे वह बैंक अधिकारी हो, म्यूल अकाउंट होल्डर हो या कोई और मददगार, किसी को नहीं बख्शा जाएगा. यह साफ संदेश है कि साइबर ठगों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं होगा.