राजस्थान की चर्चित युवा साध्वी प्रेम बाईसा की मौत जितनी अचानक हुई, उतनी ही रहस्यमय भी बनती जा रही है. मौत के बाद सामने आया सुसाइड नोट, इंजेक्शन का सवाल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के संकेतों ने इस केस को उलझा दिया है. पुलिस अब हर कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि साध्वी की मौत हादसा थी, खुदकुशी या फिर किसी साजिश का नतीजा.
28 जनवरी की शाम करीब 5 बजे कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित ने साध्वी प्रेम बाईसा को इंजेक्शन लगाया. यह वही इंजेक्शन था, जिसके कुछ ही मिनटों बाद साध्वी की हालत तेजी से बिगड़ गई. साध्वी के पिता वीरमनाथ और आश्रम के सेवादारों के मुताबिक इंजेक्शन लगने के बाद उनकी तबीयत इतनी बिगड़ी कि अस्पताल पहुंचाने तक का समय नहीं मिल पाया. अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई.
यहीं से सारे सवाल उसी इंजेक्शन पर टिक गए. आखिर ऐसा क्या था कि एक सामान्य सा इंजेक्शन साध्वी की जान ले गया. इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा जांच का सहारा लिया. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो बातें सामने आई हैं, वे कई चौंकाने वाले संकेत देती हैं. इनमें कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो जांच कर रही पुलिस टीम को भी चौंका रहे हैं.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा नंबर 1 – सिकुड़ गई थीं आंतें
सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने पाया कि मौत से पहले साध्वी की आंतें और पेट के कई अंदरुनी अंग सिकुड़ चुके थे. फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसा आमतौर पर गंभीर बीमारी या किसी तेज रिएक्शन की वजह से हो सकता है. सवाल यह है कि क्या साध्वी की बीमारी इतनी गंभीर थी या फिर इंजेक्शन के हेवी डोज ने अंदरुनी अंगों पर घातक असर डाला.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा नंबर 2 – लाल पाए गए अंदरुनी अंग
पोस्टमार्टम में कुछ अंदरुनी अंग लाल पाए गए. फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसा इंफेक्शन और प्वाइजनिंग दोनों मामलों में हो सकता है. कई जहरीले पदार्थ शरीर के अंदर इस तरह के बदलाव पैदा करते हैं. यही वजह है कि पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह जहर का असर था या फिर किसी दवा का खतरनाक रिएक्शन.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा नंबर 3 – नीले पड़ गए थे नाखून
डॉक्टरों ने यह भी पाया कि साध्वी के हाथ और पांव के नाखून नीले पड़ चुके थे. आमतौर पर इसे प्वाइजनिंग से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि टॉक्सिकोलॉजी एक्सपर्ट्स का कहना है कि शरीर में ऑक्सीजन की कमी से भी ऐसा हो सकता है. हैंगिंग या ड्राउनिंग के मामलों में भी नाखून नीले पड़ने के उदाहरण सामने आते हैं. इस बात की पुष्टि साध्वी के पिता वीरमनाथ भी कर चुके हैं.

इन शुरुआती संकेतों के बाद पुलिस की जांच का फोकस उस इंजेक्शन पर आ गया, जो साध्वी को लगाया गया था. जांच में सामने आया कि 28 जनवरी को साध्वी को दो इंजेक्शन दिए गए थे. डायनापार और डेक्सोना. डायनापार यानी डाइक्लोफिनैक और डेक्सोना यानी डेक्सामेथासोन. ये दोनों दवाएं तेज दर्द, सूजन और चोट के मामलों में दी जाती हैं, लेकिन डॉक्टर की निगरानी में.
मेडिकल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कभी-कभी इन दोनों दवाओं का एक साथ या एक ही सीरिंज से दिया जाना खतरनाक कार्डियोवैस्कुलर इवेंट, यहां तक कि हार्ट फेल का कारण बन सकता है. पेट से जुड़ी गंभीर समस्याएं, चक्कर और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. साध्वी के मामले में डॉक्टर की निगरानी की शर्त को नजरअंदाज किया गया.
कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित का कहना है कि उसने पुराने प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही इंजेक्शन लगाए थे. उसने यह भी बताया कि इंजेक्शन के कुछ देर बाद ही आश्रम से फोन आया कि साध्वी की हालत बिगड़ रही है, जिसके बाद वह उन्हें डॉक्टर के पास लेकर गया. हालांकि कंपाउंडर खुद इस बात से हैरान है कि यह इंजेक्शन जानलेवा कैसे साबित हो गया.

इसी बीच साध्वी की मौत के बाद सामने आए इंस्टा पोस्ट ने पूरे मामले को और उलझा दिया. साध्वी की मौत के करीब चार घंटे बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट किया गया, जिसे सुसाइड नोट माना गया. पहले कयास लगाए गए कि यह पोस्ट खुद साध्वी ने मौत से पहले लिखी थी. अब पुलिस जांच में सामने आया है कि यह पोस्ट न तो साध्वी ने लिखा था और न ही उन्होंने पोस्ट किया था.
यह पोस्ट साध्वी के ड्राइवर भोमाराम ने लिखा और पोस्ट किया था. पूछताछ में खुलासा हुआ कि पोस्ट का कंटेंट साध्वी के पिता वीरमनाथ ने ड्राइवर को बताया था. वीरमनाथ ने पुलिस को बताया कि प्राइवेट वीडियो लीक होने के बाद से उनकी बेटी मानसिक रूप से बेहद परेशान थी. अस्पताल जाने से पहले साध्वी ने कहा था कि यदि वो जिंदा न रह सकें, तो कम से कम उन्हें इंसाफ जरूर मिलना चाहिए.
इसी भावनात्मक हालत में वीरमनाथ ने वह पोस्ट ड्राइवर से लिखवाया. फिलहाल पुलिस वीरमनाथ और ड्राइवर भोमाराम के बयानों को क्रॉस-चेक कर रही है. साध्वी की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए अब तक कई राउंड की पूछताछ हो चुकी है और सभी बयानों की वीडियोग्राफी भी करवाई गई है. जांच पूरी तरह फॉरेंसिक साक्ष्यों पर टिकी है.

पुलिस ने साध्वी के अंदरुनी अंगों के अलावा उनके रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों के करीब 40 सैंपल रसायनिक जांच के लिए भेजे हैं. इनमें रसोई का सामान, कपड़े, कंघी, इंजेक्शन के रैपर, नीडल और दवाएं शामिल हैं. साध्वी के तीनों मोबाइल फोन भी पुलिस के कब्जे में हैं. दो फोन के पासवर्ड मिल चुके हैं, जबकि तीसरे फोन का कोड फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से क्रैक किया जा रहा है.
इसके साथ ही पुलिस उस प्राइवेट वीडियो में नजर आ रही तीसरी महिला से भी पूछताछ करने की तैयारी में है, जिसने इस पूरे मामले को पहली बार सुर्खियों में ला दिया था. कहने की जरूरत नहीं कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का सच अब विसरा रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच पर टिका है. जब तक ये रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक इंजेक्शन, सुसाइड नोट और साजिश के सवाल बने रहेंगे.